हाईटेंशन लाइन बनी मौत का जाल: पत्रकार रंजीत तिवारी की दर्दनाक मौत, 10 साल की शिकायतें रहीं बेअसर
दस वर्षों से लगातार शिकायतों के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं होती और अंततः एक जान चली जाती है,
गोंडा। जिले के पथवलिया पोर्टरगंज गांव में शुक्रवार सुबह एक बेहद हृदयविदारक घटना सामने आई, जहां हाईटेंशन बिजली लाइन का तार टूटकर गिरने से एक पत्रकार की दर्दनाक मौत हो गई। मृतक रंजीत तिवारी एक हिंदी दैनिक समाचार पत्र से जुड़े थे और क्षेत्र में अपनी सक्रिय पत्रकारिता के लिए जाने जाते थे। बताया जा रहा है कि गांव की आबादी के बीच से गुजर रही हाईटेंशन लाइन लंबे समय से खतरे का कारण बनी हुई थी। ग्रामीणों और स्वयं मृतक द्वारा बीते करीब दस वर्षों से इस तार को हटाने की लगातार शिकायतें की जा रही थीं, लेकिन बिजली विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
बच्चों को बचाने की कोशिश में गई जान
घटना के संबंध में मृतक के परिजन अमरजीत तिवारी ने बताया कि शुक्रवार सुबह घर के पीछे लगे पेड़ से हाईटेंशन तार टकरा रहा था, जिससे चिंगारियां निकल रही थीं। उसी स्थान के पास कुछ बच्चे खेल रहे थे। रंजीत तिवारी बच्चों को वहां से हटाने के लिए दौड़े, लेकिन तभी अचानक तार टूटकर उनके ऊपर गिर गया। करंट की चपेट में आने से वह गंभीर रूप से झुलस गए और मौके पर ही उनकी मौत हो गई।
लापरवाही पर गिरी गाज, पांच अधिकारियों पर FIR
घटना की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन हरकत में आया। जिला जज दुर्गनरायन सिंह, डीएम प्रियंका निरंजन और एसपी विनीत जायसवाल ने मामले की जानकारी ली। पुलिस ने बिजली विभाग के मुख्य अभियंता सहित अधीक्षण अभियंता, अधिशासी अभियंता, उपखंड अधिकारी और अवर अभियंता के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 105 (गैर इरादतन हत्या) के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
रंजीत तिवारी चार भाई-बहनों में दूसरे नंबर पर थे। उनकी एक बहन की शादी हो चुकी है। उनके पीछे पत्नी पूजा तिवारी, मां सरोज देवी और तीन छोटे-छोटे बच्चे—सात वर्षीय बेटी पूर्णिमा, चार वर्षीय बेटा आर्यन और डेढ़ वर्षीय बेटा विराट हैं। घटना के बाद परिवार में कोहराम मचा हुआ है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
जनप्रतिनिधियों ने जताया शोक, उठे सवाल
घटना के बाद भाजपा जिला प्रवक्ता विवेक मणि श्रीवास्तव और सपा नेता सूरज सिंह समेत कई जनप्रतिनिधियों ने मौके पर पहुंचकर शोक संवेदना व्यक्त की और पीड़ित परिवार को हर संभव मदद का भरोसा दिया। वहीं, इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर बिजली विभाग की लापरवाही और संवेदनहीनता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बड़ा सवाल: आखिर कब जागेगा तंत्र?
दस वर्षों से लगातार शिकायतों के बावजूद अगर कोई कार्रवाई नहीं होती और अंततः एक जान चली जाती है, तो यह सिर्फ हादसा नहीं बल्कि तंत्र की घोर लापरवाही का नतीजा है। अब देखना यह होगा कि इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या ठोस कार्रवाई होती है और क्या भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कोई सख्त कदम उठाए जाते हैं या नहीं।
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