मोदी और नेतन्याहू क्या राजनीतिक रूप से नाकाम

भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर पाकिस्तान को दलाल देश बता रहे थे

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ब्यूरो प्रयागराज-ईरान-अमेरिका सीज़फायर का असर इसराइल और भारत में नज़र आ रहा है। भारत और इसराइल के विपक्षी दलों ने अपने-अपने देशों के प्रधानमंत्रियों नेतन्याहू और नरेंद्र मोदी पर हमला बोला है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को नेस्तानाबूद करने की धमकी दी थी लेकिन वो समझौते की टेबल पर आ गए। नेतन्याहू ने अमेरिका को इस युद्ध में जबरन ढकेला और जब ट्रंप ने सीज़फायर डील की घोषणा की तो नेतन्याहू की उसमें कोई भूमिका नहीं थी।

पीएम मोदी ईरान पर युद्ध थोपे जाने से तीन दिन पहले इसराइल गए थे। यह भी इसराइल का गेम था। वो दुनिया को दिखाना चाहता था कि ईरान का सदियों पुराना दोस्त भारत आज उसके साथ खड़ा है। यानी ईरान पर युद्ध थोपे जाने की मोदी की मौन सहमति थी। मोदी ने आज तक ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की हत्या की निन्दा नहीं की। युद्ध के बीच में जब पाकिस्तान की भूमिका की बात कही जा रही थी तो भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर पाकिस्तान को दलाल देश बता रहे थे।

कांग्रेस के संचार प्रभारी और सांसद जयराम रमेश ने एक्स पर लिखा- पूरी दुनिया पश्चिम एशिया में एक तरफ यूएस और इसराइल और दूसरी तरफ ईरान के बीच चल रहे इस संघर्ष में लागू हुए दो सप्ताह के संघर्षविराम का सावधानीपूर्वक स्वागत करेगी।

यह संघर्ष 28 फरवरी को ईरान के शासन के शीर्ष नेतृत्व की टारगेटेड किलिंग के साथ शुरू हुआ था। यह घटनाएं प्रधानमंत्री मोदी की बहुचर्चित इसराइल यात्रा पूरी होने के ठीक दो दिन बाद शुरू हुई थीं। इस यात्रा ने भारत की वैश्विक साख और प्रतिष्ठा को कम किया। पीएम मोदी ने ग़ज़ा में इसराइल द्वारा किए जा रहे नरसंहार और कब्जे वाले वेस्ट बैंक में उसकी आक्रामक विस्तारवादी नीतियों पर कुछ नहीं कहा।

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जयराम रमेश ने कहा- युद्धविराम कराने में पाकिस्तान की भूमिका, पीएम मोदी की अत्यधिक व्यक्तिनिष्ठ कूटनीति के सार और शैली-दोनों-के लिए एक गंभीर झटका है। जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद को जारी समर्थन के कारण पाकिस्तान को अलग-थलग करने और दुनिया को यह विश्वास दिलाने की नीति कि वह एक विफल राष्ट्र है, स्पष्ट रूप से सफल नहीं हुई है। जैसा कि डॉ. मनमोहन सिंह ने मुंबई आतंकी हमलों के बाद कर दिखाया था।

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यह तथ्य कि एक दिवालिया अर्थव्यवस्था (पाकिस्तान की), जो पूरी तरह बाहरी डोनर्स की मदद पर निर्भर है, और कई मायनों में एक टूटे हुए देश ने ऐसी भूमिका निभा ली, पीएम मोदी की कूटनीतिक रणनीति और नैरेटिव प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने या उनकी टीम ने यह भी कभी नहीं बताया कि ऑपरेशन सिंदूर को 10 मई 2025 को अचानक और तत्काल क्यों रोक दिया गया। जिसकी पहली घोषणा अमेरिका के विदेश मंत्री ने की थी और जिसके लिए अमेरिकी राष्ट्रपति तब से लगभग सौ बार श्रेय ले चुके हैं।

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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा- हर जगह एक स्पष्ट राहत की भावना है। विदेश मंत्री ने पाकिस्तान को दलाल कहकर खारिज किया था। लेकिन अब स्वयंभू विश्वगुरु पूरी तरह एक्सपोज हो चुके हैं। उनका स्वयं घोषित 56 इंच का सीना सिमटकर रह गया है। उनकी कायरता न केवल इसराइल की आक्रामकता पर, बल्कि व्हाइट हाउस में बैठे उनके करीबी मित्र द्वारा इस्तेमाल की जा रही पूरी तरह अस्वीकार्य और शर्मनाक भाषा पर भी उनकी चुप्पी से पता चलती है।

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