बारा में ‘कार्रवाई’एक ट्रैक्टर सीज, कई सवाल जिंदा

ट्रैक्टर पकड़ा, लेकिन क्या न्याय भी हुआ?

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बारा, प्रयागराज। बारा थाने में बुधवार को चेकिंग के दौरान ओवरलोड बालू से लदा एक ट्रैक्टर पकड़ा गया और उसे सीज कर दिया गया। कागजों में यह कार्रवाई सख्त कदम के रूप में दर्ज हो गई, लेकिन इसके पीछे छिपी कहानी किसी एक परिवार की टूटी कमर और बिखरी उम्मीदों की दास्तान बन गई है। जिस ट्रैक्टर को पकड़कर खड़ा कर दिया गया, वह सिर्फ एक वाहन नहीं था—वह किसी के घर का सहारा था। उस पर लदी बालू से जो कमाई होनी थी, उससे पहले ही सब थम गया।
 
कोई जमीन गिरवी रखता है, कोई कर्ज में डूबता है, तब जाकर यह साधन मिलता है। वह इसे घर पर सजाने के लिए नहीं, बल्कि सड़कों पर चलाकर पेट पालने के लिए खरीदता है। अब पहले उसे छुड़ाने के लिए दौड़ो, फिर कर्ज चुकाओ, फिर जिंदगी को दोबारा पटरी पर लाने की जद्दोजहद करो—क्या यही व्यवस्था है? सबसे चुभने वाला सवाल यह है कि क्या यह ट्रैक्टर सिर्फ उसी दिन चला था? क्या यह ओवरलोड एक दिन की गलती थी? या फिर यह सिलसिला लंबे समय से चल रहा था? अगर महीनों से चल रहा था, तो अचानक एक दिन की कार्रवाई में ही पूरी सख्ती क्यों टूट पड़ती है?
 
और अगर सख्ती है, तो क्या वह हर स्तर पर एक जैसी है? इलाके में यह भी चर्चा है कि क्या कभी बड़े स्तर पर काम करने वाले, भारी वाहनों या प्रभावशाली व्यापारियों पर भी इसी तरह की सीधी चोट की गई? या फिर कार्रवाई वहीं तक सिमट जाती है, जहां आवाज कमजोर होती है और विरोध की ताकत कम होती है? महंगाई से पहले ही कराह रही जनता के बीच यह घटना एक और झटका बनकर सामने आई है। गैस सिलेंडर से लेकर हर जरूरी चीज महंगी है, ऊपर से रोजी-रोटी के साधन पर ही ताला लग जाए, तो सवाल उठना लाजिमी है। यह सिर्फ एक ट्रैक्टर का सीज होना नहीं है—यह उस संघर्ष का चेहरा है, जहां मेहनत करने वाला हर बार कटघरे में खड़ा दिखता है, और उसकी पीड़ा कागजों में कहीं दर्ज नहीं होती।

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