अधिवक्ता समीर हत्याकांड: फांसी की सजा का फैसला सुन फीके पड़े चेहरे, 52 पेज का फैसला
इनके हवाले से पूरे प्रकरण को स्पष्ट करने की कोशिश की गई
ब्यूरो प्रयागराज- मुजफ्फरनगर शहर कोतवाली इलाके के मोहल्ला लद्दावाला निवासी अधिवक्ता समीर सैफी (28) की सात साल पहले अपहरण के बाद हुई हत्या के मामले में कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। सोमवार को अपर जिला एवं सत्र न्यायालय/फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-तीन के पीठासीन अधिकारी रवि कुमार दिवाकर ने सिंगोल अल्वी, सोनू उर्फ रिजवान, शालू उर्फ अरबाज को फांसी की सजा सुनाई।
वहीं, अदालत ने साक्ष्य खुदबुर्द करने में दिनेश को सात साल की कैद की सजा सुनाई। सभी पर कुल 15 लाख 30 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया। अदालत ने फैसले में लिखा है कि हमला केवल अधिवक्ताओं पर ही नहीं, बल्कि एक संस्था पर हमले के समान है। एडवोकेट बार को सीधे चुनौती देने जैसा है। अधिवक्ता की हत्या न हो, इसलिए मृत्युदंड देना चाहिए।
अधिवक्ता समीर सैफी ने 15 अक्तूबर 2019 को अपने चैंबर का उद्घाटन किया था। इसके बाद शाम को संदिग्ध हालात में लापता हो गए थे। पिता अजहर ने गुमशुदगी दर्ज कराई। 19 अक्तूबर को भोपा थाना क्षेत्र के सीकरी से उनका शव बरामद हुआ।
सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पुलिस ने अधिवक्ता के दोस्त सिंगोल अल्वी से पूछताछ की तो हत्या की वारदात का खुलासा हुआ। पुलिस ने अल्वी, उसके ड्राइवर सोनू उर्फ रिजवान, नौकर शालू उर्फ अरबाज एवं दिनेश को गिरफ्तार किया था।
पूछताछ में आरोपियों ने बताया था कि अपहरण के बाद अधिवक्ता को भोपा रोड पर स्थित पेट्रोल पंप के पास ले गए। रस्सी से गला घोंटकर हत्या कर दी। दोनों मोबाइल कूकड़ा रोड स्थित नाले में फेंक दिए। इसके बाद शव को बोरे में बंद कर सीकरी फार्म हाउस में गड्ढा खोदकर मिट्टी में दबा किया था।
मुर्गी फार्म के 40 लाख रुपये के लेनदेन के विवाद में इस वारदात को अंजाम दिया गया था। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया। वादी के अधिवक्ता अनिल जिंदल ने बताया कि छह गवाह पेश किए गए। चार अप्रैल को आरोपियों पर दोष सिद्ध हुआ था।
शहर के बकरा मार्केट निवासी सोनू उर्फ रिजवान, सिंगोल अल्वी, शालू उर्फ अरबाज को फांसी की सजा सुनाई गई। भोपा के सीकरी गांव निवासी दिनेश को सात साल कारावास की सजा हुई।
समीर सैफी हत्याकांड में अदालत ने शैलेंद्र जसवंत भाई बनाम स्टेट ऑफ गुजरात, माछी सिंह, बच्चन सिंह, निर्मल सिंह, धनंजय चटर्जी, शंकर लाल, त्रिवेणी बेन, मुकेश और पुरुषोत्तम केस की रुलिंग भी लिखी गई है। इनके हवाले से पूरे प्रकरण को स्पष्ट करने की कोशिश की गई ।
मुजफ्फरनगर के लद्दावाला के समीर सैफी (28) की हत्या के मामले में अदालत ने करीब सात साल बाद फांसी की सजा का फैसला सुनाया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायालय फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-तीन के पीठासीन अधिकारी रवि कुमार दिवाकर ने अपने 52 पेजों के फैसले में रिश्तों में हत्या, मानवीय पहलू, अधिवक्ताओं के अधिकार और विवेचना की स्थिति पर टिप्पणी की है।


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