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गेल के माध्यम से कई जिलों को पीएनजी से जोड़ा जाए
उपभोक्ताओं को उनकी वास्तविक खपत के अनुसार ही भुगतान करना होगा, जो इसे और अधिक सुविधाजनक बनाता है
भारत सरकार के सबसे बड़े उपक्रम, गेल इंडिया लिमिटेड द्वारा एक अनुमान के तहत देश में 16,000 किलोमीटर से अधिक गैस पाइपलाइन नेटवर्क का संचालन किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, गेल द्वारा 2,000 किलोमीटर से अधिक एलपीजी गैस पाइपलाइन का भी संचालन किया जाता है। गेल इंडिया लिमिटेड के माध्यम से देश के 22 राज्यों के लगभग 90 से अधिक जिलों में गैस पाइपलाइन बिछाई जा चुकी है, जिसके जरिए सीएनजी, एलपीजी तथा कुछ जिलों में पीएनजी गैस की आपूर्ति भी की जा रही है।
यदि भारत सरकार अपने इस प्रमुख प्राकृतिक गैस उपक्रम के सहयोग से उन राज्यों के जिलों में, जहां से गैस पाइपलाइन गुजरती है, राज्य सरकारों के साथ समन्वय स्थापित कर जिला एवं तहसील मुख्यालयों को पाइपयुक्त प्राकृतिक गैस (पीएनजी) से जोड़ने की दिशा में ठोस पहल करे, तो आमजन को गैस सिलेंडर के झंझट से काफी हद तक मुक्ति मिल सकती है। निस्संदेह, पीएनजी गैस एलपीजी की तुलना में अधिक सुरक्षित है और इससे प्रत्येक घर की रसोई में चौबीसों घंटे गैस की उपलब्धता सुनिश्चित हो सकती है। साथ ही उपभोक्ताओं को उनकी वास्तविक खपत के अनुसार ही भुगतान करना होगा, जो इसे और अधिक सुविधाजनक बनाता है।
वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में ऊर्जा संकट की स्थिति बनती दिखाई दे रही है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के चलते विश्व स्तर पर तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हो रही है, जिसका असर भारत सहित अन्य देशों पर भी स्पष्ट रूप से महसूस किया जा रहा है। ऐसे समय में भारत सरकार यदि उन राज्यों और जिलों में, जहां से गैस पाइपलाइन गुजरती है, पीएनजी कनेक्शन के विस्तार की योजना को प्राथमिकता देते हुए उसे क्रियान्वित करती है, तो इससे देश पर गैस आपूर्ति का दबाव कुछ हद तक कम किया जा सकता है। राज्य सरकारों को भी चाहिए कि वे अपने-अपने राज्यों में गैस आपूर्ति को सुदृढ़ बनाने के लिए पीएनजी परियोजनाओं को प्राथमिकता दें और उन्हें शीघ्रता से लागू करें। यह न केवल नागरिकों के जीवन को सुगम बनाएगा, बल्कि ऊर्जा के सुरक्षित, सुलभ और सतत उपयोग को भी सुनिश्चित करेगा।
अरविंद रावल


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