ट्रंप का ऐलान- यूएस जल्द ही युद्ध से हट जाएगा
देश को संबोधित कर बाकी बातें बताएंगे
ब्यूरो प्रयागराज। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका बहुत जल्द ईरान के खिलाफ चल रहे अपने सैन्य अभियान को खत्म कर सकता है। शायद दो से तीन हफ्तों के भीतर। यह बयान ऐसे समय आया है जब पिछले एक महीने से चल रहा यह युद्ध पूरे मिडिल ईस्ट को हिला चुका है और वैश्विक ऊर्जा बाजारों को अस्थिर कर चुका है।
हालांकि वॉल स्ट्रीट जनरल ने मंगलवार को ही यह खबर दे दी थी कि ट्रंप को उनके नज़दीकी सलाहकारों ने ईरान युद्ध से जल्द से जल्द बाहर निकलने की सलाह दी है। ट्रंप आज बुधवार 1 अप्रैल को राष्ट्र को संबोधित करने वाले हैं, जिसमें वो सारी बातें साफ करेंगे।
व्हाइट हाउस में मीडिया से बात करते हुए ट्रंप ने कहा, “हम बहुत जल्द वहां से निकल जाएंगे।” उन्होंने आगे जोड़ा कि यह वापसी “दो हफ्तों में, शायद दो या तीन हफ्तों में” हो सकती है। यह अब तक का उनका सबसे स्पष्ट संकेत माना जा रहा है कि अमेरिका इस सैन्य अभियान को समेटने की तैयारी कर रहा है।
दिलचस्प बात यह रही कि ट्रंप ने यह भी साफ कर दिया कि इस युद्ध को खत्म करने के लिए ईरान के साथ किसी कूटनीतिक समझौते की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा, “ईरान को कोई डील करने की जरूरत नहीं है… उन्हें मेरे साथ कोई समझौता करने की आवश्यकता नहीं है।”
ईरान युद्ध में बुरी तरह फँसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब सहायता नहीं मिलने पर ब्रिटेन जैसे अपने सहयोगी देशों पर बौखला गए हैं। उनको धमकाते हुए उन्होंने चेताया है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से तेल की कमी झेल रहे देशों के पास सिर्फ दो रास्ते हैं- या तो अमेरिका से तेल खरीदें, या खुद जाकर होर्मुज से तेल ले आएं।
ट्रंप ने सीधे अपने सहयोगी देशों से साफ़-साफ़ कह दिया है कि अमेरिका हमेशा उनकी मदद नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि जो देश ईरान के ख़िलाफ़ अमेरिकी अभियान में शामिल नहीं हुए, उन्हें अब खुद लड़ना सीखना होगा। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा,
होर्मुज बंद होने से यूनाइटेड किंगडम जैसे जिन देशों को जेट फ्यूल नहीं मिल पा रहा है और जिसने ईरान के खिलाफ कार्रवाई में हिस्सा लेने से इनकार कर दिया है, उनको मेरी सलाह है- नंबर 1 – अमेरिका से खरीदो, हमारे पास बहुत है। नंबर 2 – थोड़ी हिम्मत जुटाओ, होर्मुज जाओ और बस ले लो।
उन्होंने आगे लिखा, 'तुम्हें अब खुद के लिए लड़ना सीखना होगा। अमेरिका अब तुम्हारी मदद नहीं करेगा, जैसा तुम हमारी मदद को नहीं आए थे। ईरान को क़रीब-क़रीब तबाह कर दिया गया है। मुश्किल काम हो गया। अब जाओ और अपना तेल खुद ले आओ!'
अमेरिका और इसराइल ने 28 फरवरी को ईरान पर सीमित सैन्य कार्रवाई की। इसके जवाब में ईरान ने दुनिया के सबसे अहम जलमार्ग स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज को ब्लॉक कर दिया। यह जलमार्ग दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल का परिवहन करता है। इस ब्लॉकेड से वैश्विक तेल की कीमतें तेजी से बढ़ गईं और 75 डॉलर प्रति बैरल से 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गईं। कई देशों में जेट फ्यूल और पेट्रोल की कमी हो गई है। कहा जा रहा है कि अमेरिका पर भी इसका असर पड़ा है।
इस बीच ट्रंप ने पहले सहयोगी देशों से अपील की थी कि वे युद्धपोत भेजकर होर्मुज को सुरक्षित करें। लेकिन ब्रिटेन समेत बड़े मित्र देशों ने साफ़ इनकार कर दिया या ज़्यादा मदद नहीं की। अब ट्रंप नाराज़ हैं और कह रहे हैं कि अमेरिका अकेला सब नहीं संभालेगा।
इस बीच ईरान की संसद की एक अहम समिति ने होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर टोल यानी टैक्स लगाने का प्रस्ताव पास कर दिया है। यह टोल ईरान की अपनी मुद्रा रियाल में लिया जाएगा। योजना में अमेरिका और इसराइल से जुड़े जहाजों पर सख्त पाबंदी लगाई गई है। जो देश ईरान पर एकतरफा प्रतिबंध लगाते हैं, उनके जहाजों को भी रोकने की बात कही गई है। ईरान कह रहा है कि वह होर्मुज पर अपना संप्रभु अधिकार लागू कर रहा है।


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