अशोक खरात मामले का सामाजिक विश्लेषण

इस रूपांतरण का इस्तेमाल महिलाओं के यौन शोषण के लिए एक हथियार की तरह किया

Swatantra Prabhat UP Picture
Published On

 महेन्द्र तिवारी

महाराष्ट्र के नासिक में खुद को त्रिकालज्ञानी और अवतारी पुरुष बताने वाले कथित ढोंगी बाबा अशोक खरात उर्फ 'कैप्टनकी गिरफ्तारी की खबर सामने आईतो पूरे देश में सनसनी फैल गई। यह केवल एक व्यक्ति की गिरफ्तारी नहीं थीबल्कि यह अंधविश्वाससत्ता के दुरुपयोग और महिला शोषण के एक ऐसे गठजोड़ का पर्दाफाश था जिसने समाज की रीढ़ को हिला कर रख दिया। रिटायर्ड मर्चेंट नेवी अधिकारी से लेकर एक प्रभावशाली ज्योतिषी और आध्यात्मिक गुरु बनने तक का सफर तय करने वाले खरात ने अपने इस रूपांतरण का इस्तेमाल महिलाओं के यौन शोषण के लिए एक हथियार की तरह किया।

नाशिक क्राइम ब्रांच ने 18 मार्च 2026 को सिन्नर तालुके के मिरगांव स्थित उसके फार्महाउस से उसे गिरफ्तार कियालेकिन इस कार्रवाई के पीछे की कहानी कई साल पुरानी थी। एक पीड़िता ने 2022 से 2025 तक के दौरान हुए उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराई थीजिसके बाद पुलिस की नींद खुली और एक बड़े षड्यंत्र का भंडाफोड़ हुआ। इस मामले ने यह साबित कर दिया कि कैसे आध्यात्मिकता के नाम पर अंधविश्वास का व्यापार किया जाता है और कैसे कमजोर वर्गविशेषकर महिलाएंइसका शिकार बनती हैं।

 खरात का तरीका बेहद सुनियोजित और खतरनाक था। उसने अपने आप को भगवान का अवतार और न्यूमेरोलॉजिस्ट के रूप में स्थापित किया था। श्री ईशानेश्वर महादेव ट्रस्ट का चेयरमैन बनकर उसने न केवल आम लोगों बल्कि सत्ता के गलियारों में भी अपनी पैठ बनाई थी। 2022 में तत्कालीन मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे द्वारा ट्रस्ट का दौरा करना और गौशाला के लिए दान देना खरात के प्रभाव का जीवित उदाहरण था। हाई-प्रोफाइल नेता और व्यापारी हेलीकॉप्टर से उसके पास पहुंचते थेजो उसके कद का अंदाजा लगाता है। लेकिन इस आध्यात्मिक चमक के पीछे एक काला सच छिपा था।

चुनावी घमासान में तीखे आरोप और बदलते समीकरण Read More चुनावी घमासान में तीखे आरोप और बदलते समीकरण

खरात महिलाओं को 'योनि पूजा', 'संतान प्राप्तिऔर 'पति की रक्षाजैसे झूठे अनुष्ठानों के नाम पर अपने जाल में फंसाता था। इसका सबसे खतरनाक हथियार था 'ओश्नो जल'। यह कोई पवित्र जल नहीं बल्कि कफ सिरपपानी और कुटी हुई वियाग्रा का मिश्रण थाजिसे पीने से महिलाओं में उत्तेजना और लत लग जाती थी। सामाजिक कार्यकर्ता अंजली दमानिया ने जब इसका राजफाश कियातब तक खरात अपना साम्राज्य खड़ा कर चुका था। पुलिस की जांच में पाया गया कि इस नशीले पेय का इस्तेमाल महिलाओं को बेहोश या उत्तेजित करके उनके साथ शोषण करने के लिए किया जाता थाजिसके बाद उन्हें ब्लैकमेल किया जाता था।

बिहार में मजदूरों का लिंक्डइन? Read More बिहार में मजदूरों का लिंक्डइन?

 गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने जो सबूत बरामद किएवे चौंकाने वाले थे। मिरगांव फार्महाउस की तलाशी में 58 से लेकर 100 से अधिक अश्लील वीडियो क्लिप पेन ड्राइव में मिलींजिनका इस्तेमाल पीड़िताओं को ब्लैकमेल करने के लिए किया जाता था। हिडन कैमरेसीसीटीवी फुटेजलैपटॉप और मोबाइल फोन जब्त किए गएजो इस बात का सबूत थे कि यह एक संगठित अपराध नेटवर्क था।

अदालती उलझनों के चलते विशेषज्ञों की कमी से स्वास्थ्य सेवाएं बेहाल Read More अदालती उलझनों के चलते विशेषज्ञों की कमी से स्वास्थ्य सेवाएं बेहाल

इसके अलावापुलिस को वहां से पिस्तौल और कारतूस भी मिलेजो खरात के आपराधिक मनोबल को दर्शाते हैं। सबसे बड़ा खुलासा तब हुआ जब संपत्ति के दस्तावेज सामने आएजिनकी कुल कीमत 200 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई। इसमें फार्महाउसबंगला और जमीन शामिल थी। ₹6.5 लाख नकद भी जब्त किया गया। ये आंकड़े बताते हैं कि अंधविश्वास के नाम पर कमाया गया धन कितना विशाल था और इसका जाल कितना गहरा था। पुलिस ने पाया कि ऑफिस में महिलाओं को मेज पर शोषण के वीडियो भी बनाए गए थेजो मानवता को शर्मसार करने वाले थे।

 कानूनी कार्रवाई के मामले में इस बार पुलिस और प्रशासन सख्त नजर आया। खरात पर महाराष्ट्र ब्लैक मैजिक एक्ट 2013 की धारा 3(1) और 3(2) के तहत कार्रवाई की गईजो मानव बलि और अमानवीय प्रथाओं को रोकने के लिए बनाया गया है। इसके साथ ही भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 64(1) यानी बलात्कारधारा 69 यानी धोखे से यौन संबंधधारा 74 यानी महिला की गरिमा भंग और धारा 351 यानी आपराधिक धमकी के तहत मामले दर्ज किए गए।

अब तक सरकारवाड़ावावी और शिरडी पुलिस स्टेशनों में कुल एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। नाशिक पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया गयाजिसका नेतृत्व आईपीएस तेजस्विनी सत्पुते ने किया। एसआईटी ने पीड़िताओं से संपर्क करने के लिए दो हेल्पलाइन नंबर भी जारी किएताकि डर के मारे चुप बैठी अन्य महिलाएं भी आगे आ सकें। कोर्ट ने खरात की पुलिस कस्टडी 24 मार्च 2026 तक बढ़ा दी हैताकि गहन पूछताछ की जा सके और नेटवर्क के अन्य सदस्यों का पता लगाया जा सके।

 इस मामले ने राजनीतिक गलियारों में भी भूचाल मचा दिया। महाराष्ट्र महिला आयोग की चेयरपर्सन रूपाली चाकणकरजो एनसीपी से संबद्ध हैंइस विवाद में घिर गईं। सामने आए एक वीडियो में वे खरात के पैर धोती हुई दिखींजिसे परिवारिक श्रद्धा बताया गयालेकिन विपक्ष ने इसे संरक्षण का सबूत माना। चाकणकर ने खरात के अपराधों से अपनी अनभिज्ञता जताई और व्यक्तिगत कारणों का हवाला देकर 19-20 मार्च 2026 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के निर्देश पर यह इस्तीफा स्वीकार किया गयालेकिन विपक्षविशेषकर शिवसेना (यूबीटी) और सुषमा अंधारे ने इस पर सवाल उठाए। उन्होंने खरात को संरक्षण देनेपीड़िताओं की दलाली करने और तंत्र-मंत्र के व्यापार में शामिल होने के आरोप लगाए तथा नार्को टेस्ट की मांग की। यह राजनीतिक विवाद इस बात का संकेत है कि कैसे ऐसे गॉडमैन राजनीतिक पार्टियों के लिए वोट बैंक या प्रभाव का साधन बन जाते हैं और जब पर्दा उठता है तो बड़े नेताओं की कुर्सी भी डगमगा जाती है।

 इस पूरे कांड का एक और संवेदनशील पहलू पितृत्व और डीएनए टेस्ट से जुड़ा है। खरात ने कई परिवारों को 'संतान प्राप्तिका झूठा वादा दिया थाजिससे कई बच्चों के जन्म हुए। अब सवाल यह है कि इन बच्चों का वास्तविक पिता कौन है। भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 116 के तहत विवाहकालीन पैदा हुआ बच्चा पति का माना जाता हैजब तक कि गैर-पहुंच साबित न हो।

हालांकिसुप्रीम कोर्ट ने 2025 में इवान रथिनम बनाम मिलन जोसेफ मामले में स्पष्ट किया है कि डीएनए टेस्ट रूटीन नहीं हो सकता। इसके लिए मजबूत प्राइमा फेसी सबूत जैसे धोखा या शोषण के सबूत होने चाहिए और कोर्ट के आदेश के बिना पति द्वारा टेस्ट कराना गोपनीयता के उल्लंघन के समान हो सकता है। इससे कानूनी पेचदांनियां खड़ी होती हैंक्योंकि एक तरफ न्याय की मांग है तो दूसरी तरफ बच्चे की पहचान और मानसिक स्थिरता का सवाल। पैटरनिटी फ्रॉड से बच्चों और माताओं में डिप्रेशन और आइडेंटिटी क्राइसिस पैदा हो सकता हैइसलिए कोर्ट को काउंसलिंग को अनिवार्य करने की आवश्यकता है।

 सामाजिक स्तर पर देखें तो यह मामला महाराष्ट्र में अंधविश्वास की जड़ों को उजागर करता है। खरात जैसे गॉडमैन पैसे और पावर के बल पर फलते-फूलते हैं। 'ओश्नो जलजैसे नशीले पदार्थों का इस्तेमाल केवल शारीरिक उत्तेजना के लिए नहींबल्कि मानसिक अधीनता के लिए किया जाता था। महिलाओं को पति की मृत्यु का भय दिखाकर या हिप्नोसिस के जरिए शोषित किया गयाजिससे उन्हें पीटीएसडी जैसी मानसिक चोटें लगीं।

अंजली दमानिया जैसे कार्यकर्ताओं की मेहनत से यह राज खुलालेकिन यह सिस्टम की कमजोरी भी दिखाता है कि इतने बड़े पैमाने पर अपराध होते रहे और पुलिस या प्रशासन की आंखें क्यों खुलीं। मुख्यमंत्री ने विधानसभा में सभी दोषियों को सजा का वादा किया हैलेकिन सवाल यह है कि क्या केवल खरात को सजा मिलने से काम चल जाएगा या इसके पीछे के गिरोह और संरक्षणकर्ताओं तक भी जांच पहुंचेगी।

 अंततःयह स्कैंडल महाराष्ट्र के लिए एक कलंक बनकर उभरा है। बाबा गिरफ्तार हुआचेयरपर्सन ने इस्तीफा दियालेकिन असली चुनौती अभी बाकी है। सैकड़ों पीड़िताएं अभी भी डर के मारे चुप हैं। एसआईटी को सख्ती बरतनी होगी ताकि न्याय मिल सके। सरकार को पीड़िताओं के लिए काउंसलिंग सेंटर और कानूनी सहायता प्रदान करनी चाहिए। समाज को भी अंधविश्वास छोड़कर विज्ञान और तर्क को अपनाना होगा।

डीएनए और कानून की जटिलताओं के बीच संवेदनशीलता बनाए रखना जरूरी है ताकि पीड़ितों पर दोबारा अत्याचार न हो। सच कड़वा हो सकता हैलेकिन इसके बिना न्याय असंभव है। यदि समाज को बचाना हैतो ऐसे संगठित अपराधों के खिलाफ जागरूकता फैलानी होगी और यह सुनिश्चित करना होगा कि आध्यात्मिकता के नाम पर किसी का शोषण न हो। खरात का मामला एक चेतावनी है कि सत्ता और अंधविश्वास का गठजोड़ कितना विनाशकारी हो सकता हैऔर इसे तोड़ने के लिए कानूनसमाज और प्रशासन को एकजुट होना होगा।

About The Author

Post Comments

Comments

संबंधित खबरें