‘साधु-संतों को परेशान करता है…’आशुतोष ब्रह्मचारी को लेकर कृष्ण जन्मभूमि के याचिकाकर्ता ने उठाए सवाल

कोर्ट ने उन्हें जांच में पूरा सहयोग करने का निर्देश भी दिया है।

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हाईकोर्ट ने ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद गिरी को बड़ी राहत दी है। कथित यौन उत्पीड़न और पोक्सो एक्ट के मामले में उनकी अग्रिम जमानत याचिका को कोर्ट ने मंजूर कर लिया है। इससे सनातन हिंदू समाज में खुशी की लहर दौड़ गई है। कोर्ट ने दोनों पर लगे आरोपों पर गंभीर सवाल उठाए और सबूतों के आधार पर फैसला सुनाया। न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकलपीठ ने यह आदेश दिया। अब दोनों को गिरफ्तारी से तुरंत राहत मिल गई है। कोर्ट ने उन्हें जांच में पूरा सहयोग करने का निर्देश भी दिया है।

इस फैसले के बाद सनातन धर्म के अनुयायियों में खुशी देखी जा रही है। श्री कृष्ण जन्मभूमि मंदिर मामले के मुख्य याचिकाकर्ता दिनेश फलाहारी महाराज ने कहा कि माननीय प्रयागराज हाईकोर्ट का यह फैसला बहुत सही है। उन्होंने न्यायालय को धन्यवाद दिया और कहा कि अदालत हमेशा सबूतों के आधार पर फैसला लेती है। फलाहारी महाराज ने जोर देकर कहा कि यह केस फर्जी लगता है।

उन्होंने शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आशुतोष पांडे शामली जनपद का 25,000 रुपये का इनामी हिस्ट्रीशीटर रहा है। उस पर गौ हत्या का भी आरोप लग चुका है। ऐसे व्यक्ति द्वारा लगाए गए आरोपों पर गंभीर संदेह है। दिनेश फलाहारी महाराज ने आगे कहा कि आशुतोष ब्रह्मचारी ने शंकराचार्य जी पर फर्जी केस लगाया है। यह व्यक्ति कई आपराधिक मामलों में शामिल रहा है। उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग की कि आशुतोष पांडे के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। 

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