नाबालिग बच्चों को वाहनों में पेट्रोल नहीं देने पर सख्त हो सरकार

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दुनियाभर के देशों में सबसे ज्यादा भारत में नाबालिग बच्चों द्वारा वाहन चलाए जाते हैं और नाबालिग बच्चों के द्वारा वाहन चलाए जाने से देश में प्रतिदिन 26 बच्चे सड़क हादसे का शिकार होकर काल के गाल में समा जाते हैं। भारत में 18 वर्ष से कम उम्र के नाबालिग बच्चों के वाहन चलाने पर कानून तो बना हैलेकिन अफसोस इस बात का है कि अब तक सजा कितनों को हुई है ? 

नाबालिग बच्चों को यदि असमय मौत के मुंह में जाने से बचाना है तो घरपरिवारसमाज और सरकार को सख्त कदम उठाने होंगे। नाबालिग बच्चों के वाहन चलाने पर अक्सर माता-पिता की दलीलें रहती हैं कि दूर-दूर स्कूल और कोचिंग छोड़ने-लाने की दिक्कतों के चलते बच्चों को वाहन दिए जाते हैं। कुछ माता-पिता अपने नाबालिग बच्चों को वाहन देना नहीं चाहतेकिन्तु बच्चों के आगे बेबस होकर गिड़गिड़ाते रह जाते हैं और बच्चे वाहन लेकर चले जाते हैं।

नाबालिग बच्चों के वाहन चलाने से होने वाली दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाना है तो केंद्र व राज्य सरकारों को सख्त रुख अपनाना होगा। इसलिए सरकार से बच्चों के भविष्य को सुरक्षित बनाए रखने के लिए एक सुझाव यह भी है कि वह यह नियम लागू करे कि देशभर के सभी पेट्रोल-डीजल पंपों पर यदि अठारह वर्ष से कम उम्र के किसी भी व्यक्ति को पेट्रोल-डीजल नहीं दिया जाए । इस हेतु पेट्रोल पंप संचालकों को पेट्रोल-डीजल भरवाने आने वाले व्यक्ति के उम्र सत्यापन हेतु कोई भी वैध दस्तावेज दिखाना अनिवार्य कर दिया जाएतो स्वतः ही नाबालिग बच्चों को वाहन चलाने हेतु पेट्रोल-डीजल नहीं मिल पाएगाजिससे दुर्घटनाओं में भी कमी आएगी।

बेशक यदि सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाना और नाबालिग बच्चों का जीवन बचाना सरकार और समाज का ध्येय हैतो फिर देशभर के सभी गांवों और शहरों में बच्चों को वाहन चलाने से रोकना हम सभी की जिम्मेदारी बनती है। यदि इसका सभी ईमानदारी से पालन करें तो देशभर में बहुत कम नाबालिग बच्चे सड़क दुर्घटना के शिकार होंगे।

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अरविंद रावल

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