नवीनतम
फीचर्ड
राजनीति
होला-मोहल्ला पर गुरुद्वारे का वातावरण खालसा रंग में रंगा
होला-मोहल्ला पर्व,वीरता,साहस और सांस्कृतिक धरोहर को संजोता है
नैनी, प्रयागराज। होला महल्ला के अवसर पर प्रयागराज के गुरुद्वारा अलोपीबाग मे बोले सो निहाल के जयकारे लगाए और गुरुद्वारा का वातावरण खालसा रंग में रंगा नजर आ रहा था।गुरुद्वारे मे दीवान सजा इस दौरान जपुजी साहिब,सुखमनी साहिब,चौपई साहिब जी के पाठ,शब्द-कीर्तन,पंथ के प्रसिद्ध रागी जत्थो ने गुरुबाणी व गुरु इतिहास से जोड़ा। गुरुद्वारा प्रधान परमजीत सिंह बग्गा ने कहा कि साहिब श्री गुरु गोविंद सिंह होला मोहल्ला सिख समुदाय में सैन्य कौशल और वीरता को प्रोत्साहित करने के लिए इस पर्व की नींव रखी।
'होला' शब्द संस्कृत के 'होलिका' से लिया गया है, जबकि 'मोहल्ला' अरबी शब्द 'महल्ला' से, जिसका अर्थ है संगठित जुलूस या जुलूस का स्थान। साहिब श्री गुरु गोविंद सिंह जी ने आनंदपुर साहिब के निकट अगमपुर गांव में एक खुले मैदान में संगत को एकत्रित कर इस पर्व की शुरुआत की,जहां सिख योद्धाओं ने अपने युद्ध कौशल का प्रदर्शन किया। सिख विरासत की शान ही सिख कौम को दुनिया अंदर विलक्षणता दिखाती है,जिसका एक अंग गुरु साहिब की तरफ से चलाई गई होले महल्ले की परंपरा है।
साहिब श्री गुरु गोबिंद सिंह जी द्वारा आरंभ किया गया यह उत्सव आज भी सिखों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। आनंदपुर साहिब में आयोजित होने वाला यह पर्व न केवल सिख समुदाय, बल्कि संपूर्ण समाज के लिए एकता, साहस और सेवा का संदेश देता है।होले महल्ले की बधाई दीl,अरदास समाप्ती उपरांत गुरु का प्रसाद अटूट बरता गयाl संगत समय से गुरु घर पहुंच कर गुरबानी पढ़,सुनकर,जपकर गुरु का आशीर्वाद प्राप्त किया।
मलकीत सिंह बाजवा,परमजीत सिंह बग्गा,गुरुदीप सिंह सरना, सरदार पतविंदर सिंह,कुलदीप सिंह बग्गा,परमिंदर सिंह बंटी,मनु चावला,गुरदीप सिंह रोमी,अगम सिंह,बलजीत सिंह,लखविंदर सिंह,राजेंद्र सिंह ग्रोवर,गुरबख्श सिंह,जसवीर सिंह,त्रिलोचन सिंह सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु सम्मिलित होकर होला-मोहल्ला की बधाइयां दी।

Comments