रेहटा 4 माह से प्यासे ग्रामीण, ककरी परियोजना के 11 आर.ओ. प्लांट पड़े ठप आंदोलन की चेतावनी

प्यासे ग्रामीण, सफेद हाथी बने 11 आर.ओ. प्लांट; ककरी परियोजना प्रबंधन को आंदोलन की चेतावनी

अजित सिंह / राजेश तिवारी Picture
Published On

 ब्यूरो रिपोर्ट

शक्तिनगर /सोनभद्र-

औद्योगिक विकास की चकाचौंध के बीच सोनभद्र के ग्रामीण इलाकों में बुनियादी सुविधाओं का अकाल पड़ा है। ताज़ा मामला एनसीएल ककरी परियोजना के पुनर्वास ग्राम रेहटा और बासी का है, जहाँ पिछले चार महीनों से शुद्ध पेयजल की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। टेंडर प्रक्रिया में देरी के कारण क्षेत्र के सभी 11 आर.ओ. (RO) प्लांट बंद पड़े हैं, जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है।

IMG-20260227-WA0105

प्रदेश में महिलाओं का बहुत ही सम्मान है, बेटियों की शिक्षा पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता-सतीश महाना Read More प्रदेश में महिलाओं का बहुत ही सम्मान है, बेटियों की शिक्षा पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता-सतीश महाना

विदित हो कि लगभग 10 वर्ष पूर्व, एनजीटी के कड़े रुख और सीएसआर (CSR) नीति के तहत ककरी परियोजना ने प्रभावित क्षेत्रों में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने का संकल्प लिया था। इसके अंतर्गत ग्राम रेहटा 08 आर.ओ. प्लांट लगाए गए। ग्राम बासी 03 आर.ओ. प्लांट लगाए गए। इन प्लांटों का मुख्य उद्देश्य खदानों से निकलने वाले प्रदूषित जल और फ्लोराइड युक्त पानी के दुष्प्रभावों से ग्रामीणों को बचाना था। लेकिन वर्तमान में प्रबंधन की उदासीनता ने इन आदेशों को ठंडे बस्ते में डाल दिया है।

रास्ते के विवाद में खूनी संघर्ष, 13 नामजद समेत कई पर मुकदमा दर्ज Read More रास्ते के विवाद में खूनी संघर्ष, 13 नामजद समेत कई पर मुकदमा दर्ज

IMG-20260227-WA0103

युवती की नहाते समय फोटो खींची:मां ने छेड़छाड़ का विरोध किया तो जान से मारने की धमकी Read More युवती की नहाते समय फोटो खींची:मां ने छेड़छाड़ का विरोध किया तो जान से मारने की धमकी

पिछले 4 महीनों से ये सभी प्लांट केवल एक मशीन बनकर रह गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि संचालन हेतु टेंडर प्रक्रिया को जानबूझकर लटकाया जा रहा है। आपको बताते चले दुष्प्रभाव ग्रामीण हैंडपंपों का दूषित और लाल पानी पीने को मजबूर हैं। क्षेत्र में चर्म रोग, पेट की बीमारियाँ और फ्लोरोसिस का खतरा बढ़ गया है।मजबूरन ग्रामीणों को दूर-दराज के क्षेत्रों से पानी ढोना पड़ रहा है।

ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से ककरी परियोजना प्रबंधक को एक मांग पत्र सौंपा है। पत्र में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि टेंडर प्रक्रिया तत्काल पूरी कर आर.ओ. प्लांट चालू नहीं किए गए, तो ग्रामीण सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे। ग्रामीणों का दोटूक कहना है हम अशुद्ध जल पीकर तिल-तिल मरने को तैयार नहीं हैं। यदि जल्द समाधान नहीं हुआ, तो उग्र आंदोलन होगा और इसकी पूरी जिम्मेदारी एनसीएल ककरी प्रबंधन की होगी।

सोनभद्र जैसे ऊर्जांचल क्षेत्र में, जहाँ बड़ी कंपनियाँ अरबों का मुनाफा कमा रही हैं, वहाँ के निवासियों को पीने के साफ पानी के लिए तरसना न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है बल्कि प्रशासनिक विफलता का प्रतीक भी है। ककरी प्रबंधन को इस जनहित की समस्या पर कुंभकर्णी नींद छोड़कर तुरंत संज्ञान लेना चाहिए।

Post Comments

Comments

संबंधित खबरें