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आजाद की शहादत पर ओबरा में गूंजी देशभक्ति आनंद पटेल दयालु ने उठाई क्रांतिकारियों के पाठ्यक्रम की मांग, भ्रष्टाचार पर भी साधा निशाना
सबसे पहले बने सच्चा देशभक्त: आनंद पटेल दयालु
ब्यूरो रिपोर्ट
ओबरा /सोनभद्र-
महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद के शहादत दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय नव निर्माण सेना ट्रस्ट द्वारा चोपन रोड स्थित नेताजी कॉटन भंडार के समक्ष एक भव्य श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस दौरान संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष आनंद पटेल दयालु ने क्रांतिकारियों के सम्मान और क्षेत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार को लेकर हुंकार भरी। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए आनंद पटेल दयालु ने शहीद चंद्रशेखर आजाद को नमन करते हुए कहा कि 27 फरवरी 1931 को इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क में आजाद ने अपनी प्रतिज्ञा निभाते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया था।

उन्होंने प्रधानमंत्री से मांग की कि देश के हर शैक्षणिक पाठ्यक्रम में क्रांतिकारियों की जीवनी अनिवार्य की जाए। उन्होंने जोर देकर कहा चाहे कोई डॉक्टर, इंजीनियर, जज या पत्रकार बने, सबसे पहले उसे एक सच्चा देशभक्त बनना चाहिए। यह तभी संभव है जब बचपन से ही क्रांतिकारियों के आदर्श पढ़ाए जाएं। जिस दिन देश का हर नागरिक देशभक्त होगा, उसी दिन भ्रष्टाचार का अंत सुनिश्चित होगा।
श्रद्धांजलि सभा के मंच से श्री दयालु ने स्थानीय बुनियादी समस्याओं और भ्रष्टाचार पर भी कड़ा प्रहार किया। उन्होंने PWD विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जो सड़क (ओबरा-चोपन रोड) पहले से ठीक थी, उसे रातों-रात दोबारा बना दिया गया, जबकि डिग्री कॉलेज रोड बदहाली के आंसू रो रही है।
उन्होंने इस मामले में उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए विभाग को चेतावनी दी कि सरकार की छवि धूमिल करने वाले अधिकारियों को होश में आना चाहिए।कार्यक्रम में भारी संख्या में कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों ने शिरकत की। चंद्रशेखर आजाद के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। कार्यक्रम में मुख्य रूप से निम्नलिखित पदाधिकारी उपस्थित रहे।झल्लन शर्मा (राष्ट्रीय योग गुरु) महताब आलम (प्रदेश अध्यक्ष)
संतोष कनौजिया (प्रदेश उपाध्यक्ष)सोनी खान (प्रदेश अध्यक्ष, महिला सेना)संतोष पटेल, विकास कुमार गोंड, शरीफ खान (प्रदेश सचिव) विभाश घटक (जिला महासचिव)विवेक कुमार जायसवाल (नगर सचिव) इसके साथ ही अनिल सिंह, मुन्नीलाल कनौजिया, सुदामा कन्नौजिया सहित कई गणमान्य नागरिक और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे। राष्ट्रीय नव निर्माण सेना ट्रस्ट का यह कार्यक्रम न केवल शहीदों को याद करने का जरिया बना, बल्कि इसने स्थानीय प्रशासन की लापरवाही और राष्ट्रीय शिक्षा नीति में बड़े बदलाव की आवश्यकता की ओर भी ध्यान आकर्षित किया।

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