ग्रेटर नोएडा में गॉर यमुना सिटी पर गंभीर आरोप
निर्माण पेनल्टी और मेंटेनेंस शुल्क के नाम पर ₹100 करोड़ की वसूली का दावा
ग्रेटर नोएडा: यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास क्षेत्र की चर्चित टाउनशिप Gaur Yamuna City एक बार फिर विवादों में घिर गई है। प्रोजेक्ट के डेवलपर Gaursons Realtech Pvt. Ltd. पर आरोप है कि उन्होंने निर्माण पेनल्टी और मेंटेनेंस शुल्क के नाम पर आवंटियों (Allottees) से लगभग ₹100 करोड़ तक की अनियमित वसूली की है।
आवंटियों के एक समूह ने इस मामले को लेकर गंभीर आपत्तियाँ दर्ज कराई हैं और दावा किया है कि बिल्डर द्वारा लगाए गए शुल्क न तो बुकिंग एग्रीमेंट (BBA) की शर्तों के अनुरूप हैं और न ही लीज डीड में उनका स्पष्ट उल्लेख है।

क्या हैं आवंटियों के आरोप?
आवंटियों के प्रतिनिधियों का कहना है कि कई प्लॉट और मकान खरीदारों पर “निर्माण पेनल्टी” के नाम पर अतिरिक्त शुल्क लगाया गया। उनका आरोप है कि:
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निर्माण में कथित देरी का हवाला देकर भारी पेनल्टी लगाई गई
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पेनल्टी की गणना का आधार स्पष्ट नहीं बताया गया
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रजिस्ट्री, NOC और अन्य अनुमतियों के लिए भुगतान का दबाव बनाया गया
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मेंटेनेंस शुल्क की दरें पारदर्शी तरीके से साझा नहीं की गईं
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भुगतान न करने पर फाइल या अनुमतियाँ रोके जाने की शिकायतें सामने आईं
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कुछ आवंटियों का कहना है कि जब तक अतिरिक्त राशि जमा नहीं की जाती, तब तक जरूरी दस्तावेज जारी नहीं किए जाते। इससे कई लोगों की रजिस्ट्री और निर्माण कार्य प्रभावित हुआ है।
₹100 करोड़ तक वसूली का दावा
आवंटियों के समूह का दावा है कि अलग-अलग मदों में लगाई गई पेनल्टी और मेंटेनेंस चार्जेज़ को जोड़कर कुल वसूली की राशि ₹100 करोड़ के आसपास पहुंच सकती है। हालांकि इस आंकड़े की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है, लेकिन आवंटी सामूहिक रूप से इसकी जांच की मांग कर रहे हैं।

नियामक संस्थाओं से शिकायत
आवंटियों ने इस मामले की शिकायत Yamuna Expressway Industrial Development Authority (YEIDA) और Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority (UP RERA) से की है।
शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि:
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पेनल्टी और मेंटेनेंस शुल्क का ऑडिट कराया जाए
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एग्रीमेंट के अनुसार ही शुल्क वसूला जाए
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अवैध वसूली की स्थिति में रिफंड कराया जाए
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बिल्डर के खिलाफ कार्रवाई की जाए
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एग्रीमेंट पर सवाल
आवंटियों का कहना है कि:
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“निर्माण में देरी या अतिरिक्त निर्माण के नाम पर जो पेनल्टी लगाई गई है, उसका स्पष्ट प्रावधान एग्रीमेंट में नहीं है। जब तक राशि जमा नहीं की जाती, तब तक जरूरी सेवाएं नहीं दी जातीं।”
कई खरीदारों का यह भी दावा है कि मेंटेनेंस चार्जेज़ की गणना का फार्मूला और उपयोग का विवरण साझा नहीं किया गया, जिससे पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।
बिल्डर का पक्ष नहीं आया सामने
समाचार लिखे जाने तक Gaursons की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। माना जा रहा है कि यदि मामला नियामक संस्थाओं तक औपचारिक रूप से पहुंचता है, तो बिल्डर को जवाब देना पड़ सकता है।

क्या कहता है कानून?
रियल एस्टेट विशेषज्ञों के अनुसार, यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला:
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RERA अधिनियम
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उपभोक्ता संरक्षण कानून
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और लीज एग्रीमेंट की शर्तों
के उल्लंघन के दायरे में आ सकता है।
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सामूहिक कार्रवाई की तैयारी
स्थानीय स्तर पर आवंटी एकजुट होकर सामूहिक कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रहे हैं। कई खरीदारों ने संयुक्त शिकायत दर्ज कराने और कानूनी नोटिस भेजने की बात कही है।
अब निगाहें प्रशासनिक जांच और नियामक संस्थाओं की कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि जांच होती है तो यह मामला यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र के सबसे बड़े रियल एस्टेट विवादों में से एक बन सकता है।

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