घर ढहाए गए लोगों के वोटसबातर लिस्ट से नाम गायब होने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त
लखनऊ के चुनाव अधिकारी को दिए निर्देश
ब्यूरो प्रयागराज- सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को लखनऊ के जिला चुनाव अधिकारी को अकबर नगर के 91 निवासियों की शिकायतों की जांच करने और उनका समाधान करने का निर्देश दिया. इनका दावा है कि सितंबर 2023 में उनके घरों को गिराए जाने के बाद उन्हें उत्तर प्रदेश की मतदाता सूची से बाहर कर दिया गया था.
याचिकाकर्ताओं ने निर्देश देने की मांग की कि उनके जनगणना प्रपत्र बूथ स्तरीय अधिकारियों (बीएलओ) को सौंपे जाएं, ताकि सितंबर 2023 में घरों को गिराए जाने के बाद स्थायी पते के अभाव के बावजूद उनके मतदान के अधिकार को संरक्षित किया जा सके.
आज यह मामला मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ के समक्ष आया. याचिकाकर्ताओं का प्रतिनिधित्व वरिष्ठ अधिवक्ता एम आर शमशाद ने किया.शुरुआत में, पीठ ने संकेत दिया कि वह याचिकाकर्ताओं के आवास से संबंधित विवादित तथ्यों के मामले को रिट याचिका के माध्यम से नहीं देख सकती.
हालांकि, पीठ ने सना परवीन और 90 अन्य लोगों द्वारा दायर याचिका का संज्ञान लिया और लखनऊ जिला निर्वाचन अधिकारी को उनकी शिकायतों की जांच करने और निवारणात्मक उपाय करने का निर्देश दिया.
शमशाद ने तर्क दिया कि निवासी 2025 की पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान विशेष सूची का हिस्सा थे. वकील ने सर्वोच्च न्यायालय से आग्रह किया कि उनके मुवक्किलों को विस्थापन के कारण मताधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए.
हालांकि, पीठ ने स्थानीय अधिकारियों को तथ्यात्मक सत्यापन करने की अनुमति देने की इच्छा व्यक्त की. पीठ ने कहा, “हम तथ्यात्मक जांच के प्रश्न पर विचार कर रहे हैं. उच्च न्यायालय इस पर विचार कर सकता है.”
पीठ ने लखनऊ जिला निर्वाचन अधिकारी को याचिकाकर्ताओं के पूर्व मतदाता सूची में नाम और उनकी वर्तमान स्थिति के संबंध में तथ्यों का पता लगाने का निर्देश दिया.अदालत ने अपने आदेश में कहा, “याचिकाकर्ताओं का दावा है कि वे अकबर नगर, लखनऊ के निवासी हैं… यह दावा किया गया है कि यूपी एसआईआर में याचिकाकर्ताओं के नाम इसलिए हटा दिए गए हैं, क्योंकि विध्वंस अभियान के बाद उनका कोई पहचान योग्य पता नहीं है.”
पीठ ने याचिकाकर्ताओं को जिला निर्वाचन अधिकारी से राहत न मिलने की स्थिति में इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ के समक्ष अपील करने की स्वतंत्रता भी दी.

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