बाबा या हिस्ट्रीशीटर… कौन है आशुतोष ब्रह्मचारी?

शंकराचार्य पर केस के बाद शिकायतकर्ता की ‘क्राइम कुंडली’ आई सामने, कई जिलों में मुकदमों का दावा

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लखनऊ/प्रयागराज।


ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर यौन शोषण के आरोप में दर्ज एफआईआर के बाद अब शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। शंकराचार्य की ओर से सार्वजनिक किए गए दस्तावेजों में आशुतोष ब्रह्मचारी पर 20 से अधिक आपराधिक मुकदमे दर्ज होने का दावा किया गया है।

बताया जा रहा है कि इन मामलों में हत्या, दुष्कर्म, जमीन कब्जा, ठगी, गो-तस्करी और मारपीट जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। शंकराचार्य पक्ष का कहना है कि शिकायतकर्ता का आपराधिक इतिहास रहा है और इसी वजह से एफआईआर की निष्पक्ष जांच जरूरी है।

हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि पुलिस या अदालत की ओर से अभी नहीं की गई है।

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हिस्ट्रीशीट नंबर 76A, कई जिलों में मुकदमे

शंकराचार्य पक्ष द्वारा जारी जानकारी के अनुसार आशुतोष ब्रह्मचारी के खिलाफ शामली जिले के कांधला थाने में हिस्ट्रीशीट नंबर 76A दर्ज बताई गई है।

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दावा किया जा रहा है कि उनके खिलाफ निम्न जिलों में भी मुकदमे दर्ज रहे हैं:

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  • शामली

  • मुजफ्फरनगर

  • गोंडा

  • लखनऊ

इन मामलों में संगठित अपराध, जमीन विवाद, मारपीट और धोखाधड़ी जैसे आरोप शामिल बताए जा रहे हैं। कुछ मामलों में गो-तस्करी और एक विधवा महिला के साथ दुष्कर्म का आरोप भी दर्ज होने की बात कही जा रही है।

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार (दावा) आशुतोष ब्रह्मचारी का आपराधिक इतिहास वर्ष 2002 से शुरू बताया जा रहा है।


असली नाम और पहचान

सूत्रों के मुताबिक आशुतोष ब्रह्मचारी का असली नाम आशुतोष पांडेय उर्फ अश्वनी सिंह बताया जाता है और वह पश्चिमी उत्तर प्रदेश के शामली क्षेत्र के निवासी बताए जा रहे हैं।

बताया जाता है कि उन्होंने कुछ वर्ष पहले धार्मिक वेश धारण किया और ब्रह्मचारी के रूप में पहचान बनानी शुरू की। इसके बाद उन्होंने खुद को सहारनपुर क्षेत्र स्थित शाकंभरी पीठ से जुड़ा महंत बताना शुरू किया।

स्थानीय स्तर पर उनके खिलाफ जमीन कब्जाने और विवादित गतिविधियों में शामिल होने के आरोप भी लगाए जाते रहे हैं, हालांकि इन मामलों की स्थिति अदालत में क्या है, यह स्पष्ट नहीं है।


रामभद्राचार्य कनेक्शन से बढ़ा विवाद

इस पूरे मामले में तुलसी पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामभद्राचार्य का नाम भी सामने आया है। बताया जा रहा है कि आशुतोष ब्रह्मचारी ने लगभग दो वर्ष पहले उनसे दीक्षा ली थी और धार्मिक गतिविधियों से जुड़ गए थे।

धार्मिक जगत के जानकारों का कहना है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और रामभद्राचार्य के बीच पहले से वैचारिक मतभेद रहे हैं, जो समय-समय पर सार्वजनिक भी होते रहे हैं।


पुराने विवादों से जुड़ रहा मामला

बताया जा रहा है कि कुछ समय पहले एक पॉडकास्ट में संत प्रेमानंद महाराज को लेकर हुई टिप्पणी के बाद दोनों पक्षों के बीच विवाद सामने आया था। उस समय शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रेमानंद महाराज का समर्थन किया था, जिसके बाद मतभेद और गहरे हो गए थे।

अब आशुतोष ब्रह्मचारी द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर को भी कुछ लोग उसी विवाद की कड़ी के रूप में देख रहे हैं, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।


जांच के बाद ही साफ होगी सच्चाई

फिलहाल इस पूरे मामले में दो बड़े सवाल हैं:

  1. शंकराचार्य पर लगे आरोप कितने सही हैं?

  2. आशुतोष ब्रह्मचारी का आपराधिक रिकॉर्ड कितना प्रमाणित है?

दोनों ही मामलों में अंतिम सच्चाई पुलिस जांच और न्यायालय की प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगी।

नोट: आशुतोष ब्रह्मचारी के खिलाफ मुकदमों की जानकारी संबंधित पक्ष द्वारा सार्वजनिक दस्तावेजों और दावों पर आधारित है। इनकी अंतिम पुष्टि जांच एजेंसियों और न्यायालय के स्तर पर होना बाकी है।

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