लाल किला बस स्टैंड पर रेहड़ी पटरी वालों का कब्जा अतिक्रमण दे रहा बडे हादसे का न्योता

अतिक्रमण दिल्ली के लिए चिंता जनक बात है 

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नई दिल्ली, देश और दुनिया से आने वाले हजारों पर्यटकों के लिए ऐतिहासिक धरोहर लाल किला एक प्रमुख आकर्षण का केंद्र है। यहां लाल किले के ठीक सामने वाली मुख्य सड़क और आसपास के इलाके अतिक्रमण के शिकार हैं। हालात ऐसे हैं कि पूरे इलाके में रेहड़ी पटरी वालों का कब्जा है। सुबह से लेकर रात 10 बजे तक इस मार्ग पर अवैध दुकानदार कब्जा जमाए बैठे रहते हैं। हैरानी की बात यह है कि कई वरिष्ठ अधिकारी भी इसी मार्ग से गुजरते हैं, फिर भी हालत जस के तस है।
 
लोगों का कहना है कि अदि किसी को इस मार्ग से जाना हो तो घंटों जाम में फंसे रहना पड़ता है और न तो कोई देखने वाला है और न ही सुनने वाला। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि लाल किला बस स्टैंड पर भी रेहड़ी पटरी वालों ने कब्जा जमा रखा है। राहगीरों के लिए बस स्टैंड पर रुकने की कोई जगह नहीं बची है। रेहड़ी पटरी वालों की वजह से बस चालक भी यहां बस नहीं रोकते।आपात स्थिति में अगर एम्बुलेंस को इस मार्ग से गुजरना पड़ता है तो मरीज की हालत एम्बुलेंस में ही बिगड़ जाती है।
 
उल्लेखनीय ए है कि पीछले दिनों इसी जगह पर एक आतंकी हमला हुआ था जिसमें एक दर्जन से अधिक लोगों की मौत हो गई थी । इसके बावजूद रेहड़ी पटरी वाले सबक नहीं ले रही है।लोगों का आरोप है कि इन रेहड़ी पटरी के कब्जे के पीछे पूरा एक तंत्र काम करता है, जिसमें माफीया व जनप्रतिनिधि से लेकर एमसीडी व दिल्ली पुलिस के लोग शामिल हैं। यह लोग रेहड़ी पटरी वालों से पैसे लेकर फूटपाथ और सड़क के कुछ हिस्सों तक को बेच रहे हैं। इस वजह से अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा रही है।
 
यात्री का कहना है यात्री अशोक मंडल, ने बताया कि रेहड़ी की पटरी वाले इस तरह बस स्टैंड पर कब्जा जमाए हुए हैं कि आप खड़े भी नहीं हो सकतें। इससे काफी परेशानी होती है। साथ ही बस में चढ़ने में भी काफी दिक्कत होती है।बस चालक बस भी नहीं रोकते क्योंकि उन्हें बस स्टैंड पर यात्री दिखाई ही नहीं देते हैं। वहीं यात्री रवि,का कहना है कि बस स्टैंड होने के बावजूद भी धूप और बारिश में बाहर खड़ा रहना पड़ता है।
 
आप बस स्टैंड के आस पास भी खड़े नहीं हो सकतें क्योंकि वहां दुकानों पर पहले से ही भीड़ रहती है और बस में चढ़ने वाले यात्रियों की भी भीड़ रहती है।इसी कारण बस चालक बस नहीं रोकते। उन्हें लगता है कि यहां सभी लोग दुकान से सामान खरीदने आए हैं। कोई यात्री नहीं है।

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