जन-विरोधी नीतियों के खिलाफ गूंजा विरोध, ट्रेड यूनियनों ने किया कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन

राष्ट्रपति के नाम सौंपा 10-सूत्रीय मांग पत्र

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अजित सिंह / राजेश तिवारी ( ब्यूरो रिपोर्ट) 

सोनभद्र / उत्तर प्रदेश-

केंद्र और राज्य सरकारों की कथित मजदूर-विरोधी और निजीकरण समर्थक नीतियों के खिलाफ आज पूरे देश के साथ-साथ सोनभद्र में भी भारी जनाक्रोश देखने को मिला। देश की दस प्रमुख केंद्रीय ट्रेड यूनियनों (INTUC, AITUC, HMS, CITU आदि) और संयुक्त किसान यूनियन के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर जिले के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन कर हुंकार भरी।

प्रदर्शनकारियों ने जिलाधिकारी के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति को एक ज्ञापन प्रेषित किया। इसमें सरकार से तत्काल हस्तक्षेप करने और श्रमिक व किसान हितों की रक्षा करने की मांग की गई है। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे इंटक (INTUC) के जिला अध्यक्ष हरदेव नारायण तिवारी ने दो टूक कहा कि वर्तमान सरकार द्वारा लाए गए चारों श्रम संहिता (लेबर कोड) श्रमिकों को गुलाम बनाने की साजिश है, जिसे तत्काल रद्द किया जाना चाहिए।

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बृजेश तिवारी (उपाध्यक्ष, जिला कांग्रेस व इंटक) उन्होंने कहा कि मनरेगा को जानबूझकर कमजोर किया जा रहा है। ठेका और आउटसोर्सिंग प्रथा ने युवाओं का भविष्य अंधकार में डाल दिया है। सार्वजनिक उपक्रमों को बेचना आम जनता के साथ विश्वासघात है। कामरेड लालचंद व शमीम अख्तर वक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि विद्युत संशोधन विधेयक 2025 और बीज बिल 2025 वापस नहीं लिए गए, तो यह आंदोलन और उग्र होगा। प्रदर्शन के दौरान प्रमुखता से निम्नलिखित मांगें उठाई गईं चारों नए लेबर कोड्स को तुरंत रद्द करना।

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सभी श्रमिकों के लिए न्यूनतम वेतन ₹26,000 प्रति माह तय करना। सरकारी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना की बहाली। रेल, भेल, बैंक, बीमा, कोयला और बिजली जैसे रणनीतिक क्षेत्रों का निजीकरण बंद हो। आंगनबाड़ी और आशा बहुओं जैसे स्कीम वर्कर्स को सरकारी कर्मचारी का दर्जा और ₹10,000 पेंशन मिले। ठेका, संविदा और आउटसोर्स कर्मियों को स्थाई किया जाए। ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकृत सभी कामगारों को आयुष्मान कार्ड और अन्य सुरक्षा लाभ मिले।

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प्रदर्शन में मुख्य रूप से आशुतोष दुबे, आकाश वर्मा, जयशंकर भारद्वाज, एच.के. उपाध्याय, राजेश देव पांडे, हरिशंकर गौड़, राजाराम भारती, मुकेश चेरो, प्रहलाद गुप्ता, जवाहर यादव समेत भारी संख्या में महिला कार्यकर्ता जैसे कौशल्या देवी, मीना देवी और शांति देवी उपस्थित रहीं। नेताओं ने अंत में स्पष्ट किया कि यह केवल एक दिन की हड़ताल नहीं, बल्कि एक बड़े राष्ट्रव्यापी आंदोलन की शुरुआत है।

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