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राजस्थान का जनकल्याणकारी बजट 2026-27 विकास विश्वास और समृद्धि की नई इबारत
पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष का बजट अधिक व्यापक, अधिक व्यावहारिक और अधिक जनोन्मुखी नजर आता है
राजस्थान विधानसभा में प्रस्तुत वर्ष 2026-27 का बजट राज्य के समग्र विकास का स्पष्ट रोडमैप लेकर आया है। उप मुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री दिया कुमारी ने जिस संतुलन, दूरदृष्टि और संवेदनशीलता के साथ इस बजट को रखा है, वह इसे केवल आंकड़ों का दस्तावेज नहीं बल्कि जनआकांक्षाओं का संकल्प पत्र बना देता है। यह बजट विकास, सामाजिक सुरक्षा, आधारभूत ढांचे के विस्तार और आर्थिक सशक्तिकरण का ऐसा समन्वित मॉडल प्रस्तुत करता है, जिसमें गांव से शहर तक, किसान से युवा तक और महिला से आम नागरिक तक सभी के लिए ठोस प्रावधान किए गए हैं।
पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष का बजट अधिक व्यापक, अधिक व्यावहारिक और अधिक जनोन्मुखी नजर आता है। वित्त मंत्री ने बताया कि राज्य की अर्थव्यवस्था का आकार 41 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 21 लाख करोड़ रुपए से ऊपर पहुंच गया है। प्रति व्यक्ति आय भी 1.68 लाख से बढ़कर 2 लाख 2 हजार रुपए के पार पहुंचने का अनुमान है। यह केवल आर्थिक वृद्धि का संकेत नहीं बल्कि वित्तीय प्रबंधन की मजबूती और निवेश प्रोत्साहन की सफलता का प्रमाण है। पिछला बजट जहां हरित सोच और आधार निर्माण की दिशा में केंद्रित था, वहीं इस वर्ष का बजट उस नींव पर तेज गति से विकास का विस्तार करता दिखाई देता है।
किसानों के लिए यह बजट अत्यंत राहतकारी और उत्साहवर्धक है। 35 लाख किसानों को 25 हजार करोड़ रुपए का ब्याज मुक्त फसली ऋण देने की घोषणा ऐतिहासिक है। इसके लिए 800 करोड़ रुपए ब्याज अनुदान के रूप में खर्च किए जाएंगे। सहकारी बैंकों से दीर्घकालीन कृषि ऋण पर 5 प्रतिशत ब्याज अनुदान भी किसानों को स्थायी सहारा देगा। 50 हजार सोलर पंप लगाने के लिए 1500 करोड़ रुपए का प्रावधान, 36 हजार नए फार्म पॉन्ड के निर्माण पर अनुदान, 8000 डिग्गियों का निर्माण और 50 हजार किसानों को तारबंदी पर 288 करोड़ का अनुदान,ये सभी कदम कृषि को अधिक उत्पादक और सुरक्षित बनाने की दिशा में मजबूत पहल हैं। बीसलपुर की दायीं मुख्य नहर के 5000 हेक्टेयर क्षेत्र में फव्वारा सिंचाई प्रणाली पर 100 करोड़ का खर्च जल संरक्षण और आधुनिक सिंचाई के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दर्शाता है। शेखावाटी तक हथनी कुंड से यमुना जल लाने की 32 हजार करोड़ की परियोजना तो प्रदेश के जल भविष्य को सुरक्षित करने वाली दूरगामी योजना है।
महिलाओं और बालिकाओं के लिए भी यह बजट विशेष रूप से सशक्तकारी है। मुख्यमंत्री लखपति दीदी योजना में ऋण सीमा को 1 लाख से बढ़ाकर 1.50 लाख रुपए करना महिला स्वावलंबन की दिशा में बड़ा कदम है। 25 हजार महिलाओं और युवाओं को मिनी ई-मित्र के रूप में अधिकृत करना उन्हें डिजिटल अर्थव्यवस्था से जोड़ने का प्रयास है। 5 लाख पशुपालकों को दूध पर बोनस के लिए 700 करोड़ का प्रावधान ग्रामीण महिलाओं की आय बढ़ाने में सहायक होगा। आंगनबाड़ियों की मरम्मत के लिए 275 करोड़ और 700 से अधिक आंगनबाड़ियों को नंद घर में अपग्रेड करने के लिए 225 करोड़ का प्रावधान बच्चों के पोषण और प्रारंभिक शिक्षा को सुदृढ़ करेगा। 17 हजार से अधिक आंगनबाड़ी केंद्रों पर बिजली कनेक्शन और किशोरी बालिकाओं को पूरक पोषाहार का लाभ देने की घोषणा सामाजिक सुरक्षा की मजबूत कड़ी है।
शिक्षा के क्षेत्र में यह बजट नई ऊर्जा का संचार करता है। कक्षा 10वीं और 12वीं के मेधावी छात्रों को 20 हजार रुपए तक का ई-वाउचर देकर लैपटॉप सहायता देना डिजिटल सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। कक्षा 1 से 8वीं तक के 40 लाख विद्यार्थियों को निःशुल्क यूनिफॉर्म के लिए 250 करोड़ का प्रावधान सीधे तौर पर गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को राहत देता है। 2500 से अधिक स्कूलों की मरम्मत और 450 करोड़ की लागत से जर्जर स्कूल भवनों का निर्माण शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करेगा। कॉलेज छात्रों के लिए ड्रीम प्रोग्राम, 1000 युवाओं को विदेशी भाषाओं का प्रशिक्षण और एआई स्टार्टअप प्रोग्राम के तहत टेक्नो हब की स्थापना राज्य को नई अर्थव्यवस्था की दिशा में अग्रसर करेगी। राजस्थान टेस्टिंग एजेंसी की स्थापना से प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और सुविधा बढ़ेगी।
स्वास्थ्य क्षेत्र में बजट अत्यंत मानवीय दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत किया गया है। जिन मरीजों के पास दस्तावेज नहीं हैं, उन्हें भी मुफ्त इलाज की सुविधा देना सरकार की संवेदनशीलता का परिचायक है। गंभीर मरीजों और दुर्घटना पीड़ितों के लिए ‘राज सुरक्षा’ योजना तथा हाईवे पर एंबुलेंस तैनाती जीवनरक्षक कदम साबित होंगे। मानसिक स्वास्थ्य के लिए ‘राज ममता’ कार्यक्रम, मेडिकल कॉलेजों और जिला अस्पतालों में मेंटल हेल्थ सेंटर तथा कॉलेजों में काउंसलिंग की अनिवार्यता युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने का संकेत है। अस्पतालों में फायर सेफ्टी के लिए 300 करोड़ और बड़े शहरों में मरीजों के परिजनों के लिए धर्मशालाओं पर 500 करोड़ का प्रावधान स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुरक्षित और मानवीय बनाएगा।
आम आदमी के लिए यह बजट राहत और सुविधाओं का मिश्रण है। 6500 गांवों को हर घर नल योजना से जोड़ना, 3 लाख नए पेयजल कनेक्शन और 24 हजार करोड़ की पेयजल परियोजनाओं के वर्क ऑर्डर ग्रामीण जीवन की गुणवत्ता में बड़ा सुधार लाएंगे। 42 हजार किलोमीटर सड़कों का विकास, 1800 करोड़ की लागत से नए ब्रिज और आरओबी, 250 अटल प्रगति पथ और बारिश से क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत के लिए 500 करोड़ का प्रावधान आम नागरिक की रोजमर्रा की यात्रा को सुगम बनाएगा। शहरी क्षेत्रों में 7 लाख से अधिक स्ट्रीट लाइट, ड्रेनेज परियोजनाएं और सिग्नल फ्री संभाग मुख्यालय आधुनिक शहरी जीवन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
उद्योग और निवेश के क्षेत्र में नए इंडस्ट्रियल पार्क, लॉजिस्टिक हब और औद्योगिक क्षेत्र का विस्तार रोजगार के नए अवसर सृजित करेंगे। युवाओं को 10 लाख तक का ब्याज मुक्त ऋण देने की योजना उद्यमिता को प्रोत्साहन देगी। पर्यावरण के प्रति प्रतिबद्धता भी बजट में स्पष्ट दिखती है। सोलर और विंड प्लांट की जमीन के 10 प्रतिशत हिस्से पर वृक्षारोपण अनिवार्य करना, 10 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य और पर्यावरण फ्रेंडली दाह संस्कार केंद्रों की स्थापना हरित विकास की सोच को मजबूत करती है।
समग्र रूप से देखा जाए तो यह बजट केवल घोषणाओं का पुलिंदा नहीं बल्कि विकास की ठोस रूपरेखा है। इसमें किसान की समृद्धि, महिला की आत्मनिर्भरता, बच्चे का उज्ज्वल भविष्य, युवा का रोजगार, शहर का आधुनिकीकरण और गांव का सशक्तिकरण।सब कुछ संतुलित रूप में समाहित है। पिछले वर्ष की आधारभूत संरचना और हरित सोच को आगे बढ़ाते हुए इस वर्ष का बजट विकास को गति देने वाला, समावेशी और दूरदर्शी दस्तावेज है। यह बजट सच मायनों में आम आदमी का बजट है, जो हर वर्ग को साथ लेकर समृद्ध राजस्थान की दिशा में आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ता हुआ दिखाई देता है।
कांतिलाल मांडोत

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