ब्लॉक रूपईडीह के 106 ग्राम पंचायतों में आरआरसी सेंटर बने शोपीस, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन ठप
स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत आरआरसी (रिसोर्स रिकवरी सेंटर) / एकीकृत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन केंद्र का निर्माण कराया गया था।
योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में निकलने वाले गीले व सूखे कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण कर गांवों को स्वच्छ बनाना था,लेकिन हकीकत यह है कि अधिकांश ग्राम पंचायतों में बने ये आरआरसी सेंटर आज शोपीस बनकर रह गए हैं।
गोण्डा
जनपद के विकास खंड रूपईडीह की ग्राम पंचायत पचरन,मिश्रौलिया,रूकमंगद पुर,उसरैना,खनवापुर, खरगूपुर डीगुर टडवागुलाम, पन्नाबगुलहा , अनेगी पंचायतों सहित अन्य में स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत आरआरसी (रिसोर्स रिकवरी सेंटर) / एकीकृत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन केंद्र का निर्माण कराया गया था। योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में निकलने वाले गीले व सूखे कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण कर गांवों को स्वच्छ बनाना था,
लेकिन हकीकत यह है कि अधिकांश ग्राम पंचायतों में बने ये आरआरसी सेंटर आज शोपीस बनकर रह गए हैं।
ग्राम पंचायतों में करोड़ों रुपये की लागत से एकीकृत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन केंद्र का निर्माण तो पूरा करा दिया गया, लेकिन संचालन की कोई ठोस व्यवस्था न होने के कारण ये केंद्र उपयोग में नहीं आ सके हैं। कई स्थानों पर आरआरसी सेंटर में ताले लटके हुए हैं, जबकि कहीं-कहीं ये भवन झाड़ियों और कूड़े के बीच खड़े नजर आ रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण के समय अधिकारियों ने गांवों को स्वच्छ बनाने और कचरे से खाद व अन्य उपयोगी सामग्री तैयार करने का दावा किया था, लेकिन आज स्थिति यह है कि कचरा अब भी सड़कों, नालियों और खाली पड़ी जमीनों पर फेंका जा रहा है। न तो कचरे का पृथक्करण हो रहा है और न ही किसी प्रकार का प्रसंस्करण।
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि सरकारी धन खर्च कर केवल इमारतें खड़ी कर दी गईं, लेकिन न तो मशीनें उपलब्ध कराई गईं और न ही कर्मचारियों की तैनाती की गई। इससे सरकार की महत्वाकांक्षी योजना कागजों में ही सिमट कर रह गई है और ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि आरआरसी सेंटरों के संचालन की तत्काल व्यवस्था कराई जाए, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए तथा ग्राम पंचायत स्तर पर नियमित निगरानी व्यवस्था लागू की जाए, ताकि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन योजना का वास्तविक लाभ गांवों तक पहुंच सके और सरकारी धन का सही उपयोग हो। इस संबंध में डीपीआरओ लाल जी दुबे ने बताया की प्रकरण की जांच कर विधिक कार्रवाई की जाएगी।

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