राजनीति
यूपी में लैंडस्कैम से मिलेगी मुक्ति; अब आधार वेरिफिकेशन के बाद ही होगी जमीन की रजिस्ट्री
रजिस्ट्रार बृजेश पाठक ने इस नई व्यवस्था को लेकर जानकारी साझा की
ब्यूरो प्रयागराज। यूपी में अब जमीन का पंजीकरण आधार प्रमाणीकरण के माध्यम से किया जा रहा है. इसकी शुरुआत उप निबंधक कार्यालय से कर दी गई है. शनिवार को सब रजिस्ट्रार बृजेश पाठक ने इस नई व्यवस्था को लेकर जानकारी साझा की. उप निबंधक बृजेश पाठक ने बताया कि आधार बेस्ड पंजीकरण प्रक्रिया के तहत अब तक उनके कार्यालय में 7 जमीनों का रेजिस्ट्रेशन सफलतापूर्वक किया जा चुका है. ये प्रक्रिया फिलहाल प्रारंभिक स्टेज में है, लेकिन सोमवार से इसे पूरी तरह से लागू कर दिया जाएगा।
लेकिन 2 फरवरी से पूरे प्रदेश में ये लागू कर दिया जाएगा. उन्होंने बताया कि जब जमीन खरीदने और बेचने वाले के लिए जब कोई आवेदन करेगा तो आधार बेस्ड सत्यापन में हां या न के ऑप्शन पर क्लिक करना होगा. जिस मोबाइल नंबर से आधार लिंक है, उस पर ओटीपी जाएगी. ओटीपी भरने से आधार से सत्यापित हो जाएगा. उसका एप्लीकेशन उनके कार्यालय के ऑपरेटर के पास आ जाएगा।
जब खरीदार और विक्रेता उनके कार्यालय में आएगा तो वहां पर एक डिवाइस रहेगी. जिस पर वह अपना अंगूठा लगाएगा. उससे वह मैच करता है तो आधार वेरीफाइड हो जाएगा. आधार वेरीफाइड होने के बाद ही हम थंब इंप्रेशन लेंगे और फोटो खींचेंगे और बिलिंग का पंजीकरण कर देंगे. इससे जो व्यक्ति फर्जी पहचान पत्र लेकर आ जाता था तो वह फर्जीवाड़ा रोकने के लिए शासन ने यह प्रभावी कदम उठाया है।
पाठक ने बताया कि हमारे कार्यालय में मॉडल के रूप में अभिलेखों का आवेदन कराया गया है. जिसमें 7 अभिलेखों का ट्रायल हमने सफलतापूर्वक किया है. जिसमें किसी प्रकार की परेशानी नहीं आई है. NIC केंद्र मुख्यालय लखनऊ की देखरेख में यह संपन्न हुआ है. ये ट्रायल हमारा कामयाब रहा।
पाठक ने बताया कि आधार प्रमाणीकरण के जरिए क्रेता (buyer) और विक्रेता (Seller) दोनों की पहचान पुख्ता होगी, जिससे भविष्य में किसी भी प्रकार के विवाद की संभावना कम हो जाएगी. शासन का उद्देश्य है कि डिजिटल माध्यमों का अधिकतम उपयोग कर पंजीकरण प्रक्रिया को सरल और भरोसेमंद बनाया जाए।
उप निबंधक कार्यालय में इस नई व्यवस्था को लेकर कर्मचारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जा रहे हैं, ताकि सोमवार से आम जनता को किसी प्रकार की परेशानी न हो. आम लोगों ने भी इस पहल को सकारात्मक बताते हुए कहा कि इससे जमीन पंजीकरण की प्रक्रिया में ट्रांसपेरेंसी बढ़ेगी।

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