बेदखली नोटिस जारी होने के बाद किस सक्षम अधिकारी के आदेश से होता रहा निर्माण कार्य

आखिर किन कारणों से लेखपाल देते रहे तहसीलदार को झूठी  जानकारी ,कि निर्माण कार्य  नहीं चल रहा, और निर्माण कार्य रहा जारी, भारी रिश्वत  राशि लेकर  खेल मैदान पर  निर्माण कार्य  करवाये जाने के  लेखपाल और  ग्राम प्रधान  पर  ग्रामीणों  ने लगाये गंभीर आरोप 

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लखीमपुर खीरी। जनपद की तहसील गोला में तैनात तहसीलदार गोला की धनलोलुपता के चलते सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जा का खेल बदस्तूर  जारी है ।और इस खेल पर रोक लगा पाने में तहसीलदार पूरी तरह से नाकाम साबित हो रहे हैं। मामला ग्राम पंचायत जटपुरा का बताया जाता है जहां पर खेल मैदान के नाम आरक्षित भूमि गाटा संख्या 1192 / 0.1500 हेक्टेयर और प्राइमरी पाठशाला के नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज जमीन गाटा संख्या 474 व 159 पर दबंग मुस्लिम लोगों द्वारा दबंगई के दम पर बाहर से आकर पक्के मकान बना लिए जाने की का मामला प्रकाश में आया है। तहसील प्रशासन द्वारा इनको रोकना उचित नहीं समझ गया।
 
मामले की मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत किए जाने के साथ ही मीडिया में काफी हाईलाइट होने के बाद उक्त की जांच कराई गई जांच में भी खेल किया गया ।खेल मैदान की तो पैमाइश कर दी गई और उस पर काबिज मिले आधा दर्जन लोगों के खिलाफ 67 (1)की कार्रवाई के लिए तहसीलदार गोला को रिपोर्ट सौपकर  लेखपाल द्वारा अपना पल्ला झाड़ लिया गया। प्राइमरी पाठशाला की आरक्षित जमीन पर अवैध तरीके से काबिज लोगों के विरुद्ध न  कार्रवाई की गई और ना ही इस जमीन की पैमाइश ही की गई ।
 
उक्त प्राइमरी पाठशाला की जमीन पर काबिज लोगों से नजराना लेकर उन्हें  अभयदान दे दिया गया। ऐसा ग्रामीणों का आरोप है इतना ही नहीं खेल मैदान पर काबिज किताबुद्दीन का नाम कार्रवाई से अलग कर दिया गया  क्यों?यक्ष प्रश्न यह है कि जब अन्य सभी अवैध कब्जेदरों के विरुद्ध नोटिस जारी की गई तो किताबुद्दीन को इस कार्रवाई से अलग क्यों रखा गया? इनके खिलाफ बेदखली की कार्यवाही किन  कारणों से नहीं की गई अहम सवाल बना हुआ है?
 
बेदखली नोटिस जारी होने के बाद किस सक्षम अधिकारी के आदेश से जारी रहा निर्माण कार्य
 
गोला तहसील के अंतर्गत ग्राम पंचायत जटपुरा में खेल मैदान के नाम आरक्षित जमीन पर अवैध तरीके से काबिज लोगों के विरुद्ध तहसील प्रशासन द्वारा बेदखली की नोटिस जारी की गई लेकिन उसके बाद भी दबंगों द्वारा अपना निर्माण कार्य जारी रखा। उक्त हो रहे अवैध निर्माण कार्य की जानकारी तहसीलदार गोला को दी गई उसके बावजूद भी निर्माण कार्य नहीं रोका जा सका।
 
सूत्रों द्वारा मिली जानकारी के अनुसार भूमि प्रबंध समिति अध्यक्ष ग्राम प्रधान कुलदीप कुमार और क्षेत्रीय लेखपाल की मिली भगत से अवैध कबजेदारों को खुला संरक्षण दिया जाता रहा । जिसके चलते नोटिस मिलने के बाद भी निर्माण कार्य बेखौफ जारी रहा। ग्रामीणों का आरोप है कि यह सारा खेल तहसीलदार गोला की सह पर ही हो रहा है तहसीलदार गोला द्वारा चोर से कहो चोरी करें और साह से कहो जागते रहो की कहावत चरितार्थ की जा रही है। यहां पर एक अहम सवाल पैदा होता है कि जब अवैध कब्जा की पुष्टि हो गई और बेदखलिवाद की नोटिस जारी हो गई तो फिर निर्माण कार्य कैसे जारी है?
 
मामले की शिकायत करने पर जांच को गए लेखपाल द्वारा किन परिस्थितियों में अपने अधिकारी को गुमराह किया जाता रहा? सूत्र बताते हैं मकान में बाहर से ताला लगाकर  अंदर निर्माण कार्य जारी रहा और लेखपाल साहब के  जतपुरा  मौजूद रहते काम जारी रहा, अंदर जाकर देखना उचित नहीं समझा ।प्रधान के दरवाजे बैठकर तहसीलदार को भ्रामक एवं झूठी सूचनाओं देते रहे कि कहीं कोई निर्माण कार्य नहीं चल रहा है जबकि हकीकत के धरातल पर निर्माण कार्य युद्ध स्थल पर जारी रहा।
 
यहां पर अहम सवाल यह है कि क्या दबंग संविधान और कानून से ऊपर हैं या फिर चंद्र कागज के टुकड़ों के सामने जिम्मेदार दबंग के सामने मस्तक हो गए हैं मामले की शपथ पत्र के साथ जिला अधिकारी खीरी व अध्यक्ष राजस्व परिषद लखनऊ से शिकायत कर दोषी तहसील प्रशासन के विरुद्ध कार्यवाही और दबंगों के विरुद्ध मुकदमा पंजीकृत कराए जाने की मांग किए जाने की बात सामने आई है अब देखना यह है कि तहसीलदार गोला द्वारा लेखपाल शैलेंद्र वर्मा पर झूठी सूचना देने के आरोप में क्या कार्यवाही की जाती है ?और अवैध कबजेदारों के विरुद्ध मुकदमा पंजीकृत कराकर  नवीन निर्माण को तुरंत  ध्वस्त कराया जाता है अथवा धनवल के दम पर अभय दान दे दिया जाएगा।क्या कहते हैं  तहसील दार  गोला  भीमचंद ने बताया मामला मेरे संज्ञान में आया है दोषियों के विरुद्ध मुकदमा पंजीकृत
 
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