राजनीति
सिस्टम में खोट, तो न्याय से वंचित फरियादी खजनी के बेलडॉड गांव में मुआवज़े की लूट
बैंक–पुलिस गठजोड़ के आरोप, गरीब की आवाज़ पर लाठी
ख़जनी गोरखपुर जनपद के खजनी थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम सभा बेलडॉड से न्याय व्यवस्था को कटघरे में खड़ा करने वाला एक मर्मिक मामला सामने आया है। यहां एक ही परिवार के भीतर उत्पीड़न, धोखाधड़ी और कथित सिस्टम–गठजोड़ ने एक गरीब मजदूर परिवार को हक़ से वंचित कर दिया।
ख़जनी क्षेत्र बेलडॉड गांव निवासी रामजीत यादव के दो पुत्र—कमलेश यादव और श्यामदेव यादव—थे। आरोप है कि बड़े पुत्र कमलेश की प्रताड़ना से तंग आकर श्यामदेव किशोरावस्था में ही घर छोड़कर लापता हो गया और करीब 12 वर्षों बाद किसी तरह गांव लौटा। गांव-समाज के हस्तक्षेप से उसका विवाह हुआ। आज श्यामदेव की तीन मासूम बेटियां हैं और वह मजदूरी कर परिवार पाल रहा है। इधर, बड़े भाई कमलेश ने फालिजग्रस्त पिता रामजीत को अपने प्रभाव में रखकर उनकी पूरी पेंशन का लाभ उठाया, मकान पत्नी के नाम करा लिया और छोटे भाई को घर से बाहर कर दिया—ऐसा आरोप है।
समय के साथ रामजीत यादव की जमीन रेलवे अधिग्रहण में चली गई। बदले में रेलवे मुआवज़े के रूप में लगभग 44 लाख रुपये रामजीत के बैंक खाते में आए। यहीं से कथित साज़िश का खेल शुरू हुआ। आरोप है कि कमलेश ने खजनी कस्बे स्थित इंडियन बैंक के एक कर्मचारी से मिलीभगत कर शाखा प्रबंधक को विश्वास में लिया और बैंक कर्मी को घर ले जाकर पैरालाइज पिता से हस्ताक्षर नहीं, बल्कि अंगूठा लगवाकर पूरी रकम अपने पुत्र संतोष यादव के खाते में ट्रांसफर करा दी। यह गोपनीय लेन-देन कुछ लोगों तक सीमित रहा। इसके बाद रामजीत यादव की रहस्यमय मृत्यु हो गई।
पिता की मौत के बाद श्यामदेव को मुआवज़े की जानकारी मिली। जब गांव में यह बात फैली तो ग्रामीणों में आक्रोश भड़क उठा। श्यामदेव को उसका हक दिलाने के लिए ग्रामीण आगे आए। लेकिन आरोप है कि खजनी थाना प्रभारी की भूमिका संदिग्ध रही—वे पीड़ित के बजाय आरोपी पक्ष की पैरवी करते दिखे। न्याय की मांग को लेकर जब ग्रामीण थाने के बाहर एक स्वर में आवाज़ उठाने लगे, तो कुछ युवाओं को हिरासत में लेकर आवाज़ दबा दी गई। लाठी के दम पर गरीब–असहाय की पुकार को शांत करने की कोशिश हुई और मामला ठंडा पड़ता दिखा।
ग्रामीणों का कहना है कि बैंक–पुलिस की कथित साठगांठ ने न्याय को बंधक बना लिया है। गांव–गांव यह सवाल गूंज रहा है—जब सिस्टम में ही खोट हो, तो फरियादी न्याय कैसे पाए? आज बेलडॉड की कहानी हर उस पीड़ित की कहानी बन गई है, जिसकी आवाज़ सत्ता और व्यवस्था के शोर में दबा दी जाती है। अब निगाहें प्रशासन और उच्च अधिकारियों पर हैं—क्या पीड़ित को इंसाफ मिलेगा, या यह मामला भी फाइलों में दफन हो जाएगा?

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