कुशीनगर : गंडक मार्ग जटहां–शास्त्रीनगर 8 किमी बनाम 20 किमी का खेल!

कम लागत–अधिक लाभ वाली योजना छोड़ सरकार ने क्यों चुना महंगा रास्ता?

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शास्त्री नगर–बेलवनिया पुल पर भड़की जनता, मशाल जुलूस से तेज हुआ आंदोलन

ब्यूरो प्रमुख प्रमोद रौनियार

कुशीनगर। यह महज संयोग है या फिर सरकारी नौटंकी और छलावे का सुनियोजित खेल—यह सवाल अब गंडक पार की लाखों जनता की जेहन में गूंजने लगा है। सच्चाई यह है कि बिहार के शास्त्री नगर से उत्तर प्रदेश के जटहां/पिपरासी की दूरी महज 8 किलो मीटर है और जटहां से नेबुआ NH-727 तक पहले से टू-लेन सड़क बनी हुई है। यदि इस व्यावहारिक और कम बजट वाली योजना पर राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्रालय ने समय रहते ध्यान दिया होता, तो आज पिपरासी और मधुबनी अंचल की लाखों आबादी को पुलिस जिला बगहा, कोर्ट-कचहरी और प्रशासनिक सुविधाओं का सीधा लाभ मिल चुका होता।

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(जटहां/पिपरासी–शास्त्री नगर गंडक मार्ग से यात्रा करते किसान मजदूर यात्रीगण इस मार्ग से बेलवनिया कोसों दूर) 

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लेकिन हैरानी की बात यह रही कि कम दूरी, कम लागत और अधिक जनहित वाली 8 किमी परियोजना को नजरअंदाज कर, विभाग ने 20 किमी लंबी शास्त्री नगर–बेलवनिया NH-727 परियोजना को स्वीकृति दे दी। अब उसी स्वीकृत योजना को “अधिक लागत” का हवाला देकर ठंडे बस्ते में डाल दिए जाने की खबर सामने आ रही है।

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इस फैसले से आक्रोशित गंडक तटवर्ती बगहा और बेलवनिया क्षेत्र की जनता सड़कों पर उतर आई है। हाथों में मशाल लेकर “गंडक नदी पुल बनाओ” के नारों के साथ विभागीय अधिकारियों के खिलाफ मशाल जुलूस निकाला जा रहा है। पुल निर्माण आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है, जिसका राजनीतिक और सामाजिक परिणाम केंद्र सरकार के पास सुरक्षित माना जा रहा है।

ज्ञापन में  जदयू से मंच संचालक राकेश सिंह अध्यक्षता फ़िरोज़ आलम ने की उपस्थित आंदोलन में जयनेन्द्र सिंह, अमरेशवर सिंह, कामरान अज़ीज़, हृदयानन्द दूबे, नागेंद्र सहनी, दयाशंकर सिंह, गिरिन्द्र पाण्डेय, अरविन्द नाथ तिवारी, सुबोध चौहान, अजय साहनी, विशाल पाण्डेय, कामेश्वर तिवारी, जुगनू आलम, विनय यादव, सुशील दूबे, रामाशंकर दूबे, उमेश गुप्ता, निवेदिता मिश्रा, बबलू यादव, श्रेयांशु कुमार, शैलेश जदुवंशी, प्रमोद रौनियार, अनिल सहनी, मो0 राशिद, छोटे श्रीवास्तव, अशोक कुमार मिश्रा, दीपू जायसवाल, हिमांशु जायसवाल, शांति देवी, माधुरी देवी सुषमा सिंह, संदीप उर्फ़ गोलू सहनी, रविकेश पाठक, रंजीत राज आदि गणमान्य लोग शामिल रहे। 

––आज हालात ऐसे बन चुके हैं कि सरकार बनाम जनता की बहस खुलकर सामने आ गई है। यदि दोनों राज्यों की जनता की अदालत लगाई जाए तो यह साफ हो जाएगा कि— जटहां/पिपरासी–शास्त्री नगर मार्ग जनहित में अधिक उपयोगी है, या शास्त्री नगर–बेलवनिया 20 किमी लंबा विकल्प।

यदि NHAI का मुद्दा केवल NH-727 से जुड़ाव ही है, तो फिर 8 किमी और 20 किमी के बीच का अंतर—कम दूरी, कम लागत और अधिक लाभ—अपने आप सच्चाई बयान कर देता है। NHAI का मिशन एक ही है NH–727 से जोड़ना, लेकिन रास्ता कौन-सा जनता के लिए हितकारी है, यह प्रश्न अब सरकार के सामने सुलगता हुआ खड़ा है।

सबसे अहम पहलू यह भी है कि जटहां/पिपरासी–शास्त्री नगर पुल बनने से वाल्मीकि नगर टाइगर रिजर्व (VTR) की दूरी बढ़ जाएगी, जिससे वन्य जीवों को ध्वनि प्रदूषण से बड़ी राहत मिलेगी। इसके बावजूद राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्रालय के अधिकारी 8 किमी के तर्क को स्वीकार नहीं कर पा रहे, यही आज सबसे बड़ा और चौंकाने वाला सवाल बन गया है।

अब जनता साफ शब्दों में कह रही है—

“पुल चाहिए, बहाना नहीं।

कम दूरी का रास्ता छोड़ महंगे प्रस्ताव का खेल अब नहीं चलेगा।”

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