Success Story: बिना कोचिंग पहले प्रयास में बनीं IFS अफसर, पढ़ें 22 साल की मुस्कान जिंदल की सक्सेस स्टोरी

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Success Story: जिंदगी में अगर कुछ हासिल करने का जज्बा हो तो महंगी कोचिंग या बार-बार कोशिशों की जरूरत नहीं पड़ती। खुद पर भरोसा, मेहनत के प्रति ईमानदारी और मजबूत हौसला आपको सफलता तक पहुंचा सकता है। इस बात को सच कर दिखाया है हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले की रहने वाली मुस्कान जिंदल ने, जिन्होंने बिना किसी कोचिंग के पहले ही प्रयास में UPSC परीक्षा पास कर IFS अधिकारी बनने का सपना पूरा किया।

हिमाचल के सोलन जिले से ताल्लुक रखती हैं मुस्कान

IFS अधिकारी मुस्कान जिंदल हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले में नगर परिषद बद्दी के हाउसिंग बोर्ड फेज-2 की रहने वाली हैं। उनके पिता एक बिजनेसमैन हैं, जबकि माता गृहिणी हैं। परिवार में दो बहनें हैं। मुस्कान का बचपन से ही पढ़ाई में रुझान रहा है।

स्कूल टॉपर से UPSC तक का सफर

मुस्कान ने बद्दी के एक निजी स्कूल से 12वीं तक की पढ़ाई की। 12वीं बोर्ड परीक्षा में उन्होंने 96.4 प्रतिशत अंक हासिल कर स्कूल में पहला स्थान प्राप्त किया। इसके बाद उन्होंने चंडीगढ़ के एसडी कॉलेज से बीकॉम ऑनर्स की पढ़ाई पूरी की।

घर पर रहकर की UPSC की तैयारी

ग्रेजुएशन के साथ ही मुस्कान ने UPSC सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी। उन्होंने किसी भी तरह की कोचिंग नहीं ली, बल्कि घर पर रहकर सेल्फ-स्टडी पर पूरा फोकस किया। मुस्कान रोजाना 4 से 5 घंटे नियमित पढ़ाई करती थीं। ग्रेजुएशन पूरा होने के बाद उम्र कम होने के कारण उन्होंने एक साल का ब्रेक लिया और फिर परीक्षा के लिए आवेदन किया।

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पहले ही प्रयास में मिली बड़ी सफलता

साल 2019 में मुस्कान जिंदल ने अपने पहले ही प्रयास में UPSC सिविल सेवा परीक्षा पास कर ली। महज 22 साल की उम्र में उन्होंने 87वीं रैंक हासिल की और भारतीय विदेश सेवा (IFS) में चयनित हो गईं। बिना कोचिंग, बिना किसी अतिरिक्त संसाधन के यह उपलब्धि उन्हें खास बनाती है।

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बचपन का सपना हुआ पूरा

मुस्कान जिंदल का सिविल सर्विस में जाने का सपना बचपन से ही था। स्कूल के दिनों से ही उन्होंने अपने लक्ष्य को लेकर गंभीरता दिखाई। सही रणनीति, समय प्रबंधन और आत्मविश्वास के बल पर उन्होंने अपने सपने को साकार कर दिखाया।

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युवाओं के लिए मिसाल बनीं मुस्कान

IFS मुस्कान जिंदल आज उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा हैं, जो संसाधनों की कमी या कोचिंग न मिलने को अपनी कमजोरी मानते हैं। उनकी सफलता साबित करती है कि अगर लक्ष्य साफ हो और मेहनत सच्ची हो, तो कोई भी मंजिल दूर नहीं।

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