बच्चों में मोबाइल का बढ़ता चलन, आंखों पर पड़ रहा गहरा असर
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गोण्डा। डिजिटल युग में बच्चों का रुझान तेजी से मोबाइल फोन की ओर बढ़ता जा रहा है। पढ़ाई, खेल और मनोरंजन के नाम पर मोबाइल का बढ़ता उपयोग अब बच्चों की सेहत, विशेषकर आंखों के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। चिकित्सकों के अनुसार कम उम्र में ही बच्चों में नेत्र संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं।
नेत्र विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक मोबाइल स्क्रीन देखने से बच्चों में आंखों में जलन, सूखापन, सिरदर्द, धुंधला दिखाई देना और कम उम्र में चश्मा लगने की समस्या सामने आ रही है। लगातार स्क्रीन पर ध्यान केंद्रित करने से आंखों की मांसपेशियों पर दबाव पड़ता है, जिससे दृष्टि कमजोर होने की आशंका बढ़ जाती है।
इस संबंध में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र रूपईडीहा के वरिष्ठ नेत्र चिकित्सक डा. श्याम लाल गौतम ने बताया कि मोबाइल गेम और वीडियो देखने की आदत के कारण बच्चे घंटों स्क्रीन से जुड़े रहते हैं। इसका दुष्प्रभाव केवल आंखों तक सीमित नहीं है, बल्कि नींद में कमी, चिड़चिड़ापन, एकाग्रता में गिरावट और शारीरिक गतिविधियों से दूरी जैसी समस्याएं भी उत्पन्न हो रही हैं।
डा. गौतम ने अभिभावकों को सलाह दी कि बच्चों के मोबाइल प्रयोग पर नियंत्रण आवश्यक है। उन्होंने कहा कि बच्चों को हर 20 मिनट बाद आंखों को आराम देने, आउटडोर खेलों के लिए प्रेरित करने, योग व आंखों के व्यायाम कराने तथा सोने से पहले मोबाइल का उपयोग न करने की आदत डालनी चाहिए।
चिकित्सकों का मानना है कि समय रहते जागरूकता नहीं बरती गई तो भविष्य में बच्चों को आंखों की गंभीर बीमारियों का सामना करना पड़ सकता है। बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए स्वस्थ दिनचर्या और मोबाइल से संतुलित दूरी बेहद जरूरी है।
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