प्रापर्टी डीलर के आगे तहसील प्रशासन नतमस्तक
प्रापर्टी डीलर और राजत्व विभाग की मिली भगत से ग्राम समाज की जमीन बैनामा करा लेने के आरोप
लखीमपुर-खीरी। प्रापर्टी डीलर के भ्रष्टाचार के आगे राजस्व विभाग नतमस्तक दिखाई पद रहा है। बताया जाता है कि ब्लाक फूलबहेड के गांव बुढ़नापुर में प्रॉपर्टी डीलर मनीष जैन के द्वारा कुछ खेत खरीदे गए थे। दौरान रजिस्ट्री के खेत के आगे ग्राम समाज की भूमि पर कुछ गरीबों के मकान बने हुए थे।उक्त मकान आवासीय पट्टों पर बने हुए थे। मनीष जैन द्वारा तहसील प्रशासन से साठ गांठ करके ग्राम समाज की जमीन का बैनामा करा लिया गया।
ऐसे आरोप ग्रामीणों द्वारा लगाए जा रहे हैं। जिसके चलते धन-बल के दंमपर आये दिन ग़रीबों को तंग किया जाता है। जांच का विषय यह है कि उक्त प्रापर्टी डीलर के पास प्रापर्टी डीलिग करने का रजिस्ट्रेशन नहीं है और न हीं मानकों के अनुसार प्रापर्टी डीलिग ही करते हैं ।जो जांच का विषय बनाहुआहै।।धन बल के दंमपर आये दिन ग़रीबों को परेशान करना उक्त प्रापर्टी डीलर की दिनचर्या में शामिल है।
घटना दिनांक 19/01/2026 को लेखपाल पंकज तोमर नपाई करने पहुंचे ।बताते चले गाटा संख्या 443 जो ग्राम समाज की भूमि दर्ज कागजात है।जिसमें दशको पहले पट्टे हुए थे । जो राजस्व अभिलेखों में दर्ज कागजात है ।उक्त प्रापर्टी डीलर द्वारा गाटा 431/1.306 है0 खेत आशीष गुप्ता पुत्र विनोद गुप्ता, दिलीप चंद्र पुत्र हुलाश चंद्र,मनीष जैन,विनय जैन पुत्र धर्मसिंह लोगों ने खरीदा था ।
उसी की आंड़ में ग्राम समाज की भूमि के गाटा संख्याओं में हेर-फेर किया जा रहा है।झूठे वाद डाल कर न्यायालय को गुमराह किया जा रहा है।यदि जांच हो प्रापर्टी डीलरों के साथ साथ राजस्व विभाग के चंद जिम्मेदारों की भूमिका संदिग्ध नजर आयेंगी।जबकि 431/ 1.306 हे0 भूमि विक्रेता स्व बाबू पठान के पुत्र वाशिर का कहना है कि मैंने सिर्फ 431 गाटा संख्या की भूमि बेची थी ।अतिरिक्त प्रापर्टी डीलरों द्वारा क्या किया गया मुझे नहीं पता। क्योंकि मेरी भूमि 431/1.306 हे0 ही थी ।
इसके अतिरिक्त कोई भी गाटा संख्या मेरे नाम दर्ज कागजात नहीथा और न ही. मैंने विक्री ही किया है।मेरे खेत के आगे ग्राम समाज की भूमि पर पट्टे धारक लोग काबिज है जिससे मेरा कोई वास्ता व सरोकार नहीं है।खेत व ग्राम समाज की भूमि पर बने मकानों की संख्या भिन्न है बैनामा में खेल किया गया है।जिसमें दिखाया गया कि मेरे मकान 1000 रूपया माशिक किराये पर उठे हैं।। जबकि उक्त गाटा संख्याओं की असली भू स्वामी ही उक्त मकानों में काबिज चले आ रहे है।
और यह जमीन ग्राम समाज के नाम राजत्व अभिलेखों में दर्ज कागजात है।और इस पर काफी समय पहले पट्टे बनाए गए थे। उक्त ऑन रोड जमीन हथियाने की नीयत से लेखपाल और कानूनगो से .मिलीभगत करके जमीन हड़पने का प्रयास किया जा रहा है।यदि मामले की हो निष्पक्ष जांच तो भ्रस्टाचार का एक बड़ा मामला खुलकर आएगा सामने और तहसील प्रशासन समेत प्रॉपर्टी डीलरों पर भी आएगी जांच की आंच।
