परियोजना प्रसाशन की मनमानी को लेकर राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्राचार्य सहित प्राध्यापकों ने राज्य मंत्री को सौंपा पत्रक

टूट क्षेत्र से बाहर परियोजना कॉलोनी में बगैर दूसरा आवास आवंटित आवासों को खाली कराने का मामला

SWATANTRA PRABHAT SONBHARA  Picture
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अजित सिंह / राजेश तिवारी ( ब्यूरो रिपोर्ट) 

ओबरा / सोनभद्र 

राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय ओबरा, सोनभद्र के प्राचार्य एवं प्राध्यापकों ने अनुसूचित जाति/जनजाति एवं समाज कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) से मिलकर उन्हें ओबरा तापीय विद्युत परियोजना प्रबंधन/ प्रशासन द्वारा टूट क्षेत्र से बाहर ओबरा तापीय परियोजना कॉलोनी में उन्हें उनके पद के अनुरूप अन्य कोई समुचित आवास आवंटित किए बिना, परियोजना कॉलोनी में उन्हें वर्तमान में आवंटित आवासों को खाली करने के लिए, की जा रही मनमानी एवं बनाए जा रहे अनुचित दबाव के संबंध में जानकारी देते हुए उन्हें पत्रक देकर उन्हें अवगत कराया कि राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय ओबरा, सोनभद्र उत्तर प्रदेश सरकार के उच्च शिक्षा विभाग के स्वामित्व वाली पूर्णतः सरकारी संस्था है।

इसके प्राचार्य एवं प्राध्यापक सभी प्रथम श्रेणी के राजपत्रित अधिकारी हैं। इस महाविद्यालय की स्थापना 1982 में तत्कालीन उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद द्वारा अपने सामाजिक दायित्व के निर्वहन के अंतर्गत अपने अधिकारियों, कर्मचारियों एवं यहां के नागरिकों को ओबरा में ही उच्च शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश शासन से अनुरोध करके यहां पर करवाई थी तथा महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापको एवं कर्मचारियों को निगमीय कर्मचारियों की भांति परियोजना कॉलोनी में ही आवास, विद्युत, पानी एवं चिकित्सा सुविधायें उपलब्ध कराने का वचन देते हुए उन्हें उक्त सुविधायें परियोजना कॉलोनी में ही उपलब्ध कराई गई थी।

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इसी कारण उस समय राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय ओबरा, सोनभद्र के निर्माण की कार्यदायी संस्था तत्कालीन उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद द्वारा महाविद्यालय परिसर में आवासों का निर्माण नहीं किया गया था बल्कि परियोजना कॉलोनी में ही महाविद्यालय के प्राचार्य, प्राध्यापको एवं कर्मचारियों को आवास आवंटित किए गए थे। राजकीय स्नातकोत्तर, महाविद्यालय ओबरा द्वारा भी प्रवेश में ओबरा के बच्चों को अतिरिक्त अधिभार (वेटेज)अंक प्रदान कर ओबरा के बच्चों को प्रवेश में वरीयता दी जाती रही है। 

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आज ओबरा तापीय परियोजना प्रबंधन/प्रशासन द्वारा 1982 में ओबरा में इस स्नातकोत्तर महाविद्यालय की स्थापना के लिए उत्तर प्रदेश सरकार/ उच्च शिक्षा विभाग को दिए गए वचनों से मुकरते हुए ओबरा डी परियोजना के नाम पर महाविद्यालय के प्राचार्य एवं प्राध्यापकों से निजी संस्था के कर्मचारी मानते हुए उनसे अवैधानिक रूप से आवास रिक्त करने के संबंध में अपनी मनमानी करते हुए उन पर अनुचित दबाव बनाया जा रहा है। एक तरफ महाविद्यालय के प्राचार्य/ प्राध्यापकों के ठीक बगल में, समीप में एवं उसी कॉलोनी में निगमीय अधिकारी/कर्मचारी रह रहे हैं, दूसरी तरफ महाविद्यालय के प्राध्यापकों/ कर्मचारियो से ओबरा डी परियोजना के नाम पर आवास खाली करने को कहा जा रहा है।

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लग रहा है कि ओबरा डी परियोजना का बॉयलर,टरबाइन, कोल हैंडलिंग प्लांट, स्विचयार्ड सब चुन -चुन कर राजकीय महाविद्यालय के प्राध्यापकों/कर्मचारियो के आवासों में ही केवल लगाया जाएगा। यह ओबरा डी परियोजना के नाम पर राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय ओबरा के प्राध्यापकों/कर्मचारियो से आवास खाली करने की सोची समझी साजिश, षड्यंत्र मात्र प्रतीत हो रहा है। परियोजना प्रबंधन की इस प्रकार की कार्यवाही पूर्णतः अनुचित एवं अन्याय पूर्ण है।

किसी भी परियोजना की स्थापना के लिए सामाजिक दायित्व के निर्वहन के अंतर्गत परियोजना प्रबंधन/ प्रशासन द्वारा वहां के लोगों के आवास, चिकित्सा, शिक्षा, विद्युत,पानी इत्यादि आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने एवं उनके निमित्त स्थापित संस्थाओं के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को भी उक्त समुचित सुविधाएं उपलब्ध कराना अनिवार्य है।

महाविद्यालय के प्राचार्य प्राध्यापको ने ओबरा तापीय परियोजना प्रबंधन प्रशासन द्वारा की जा रही मनमानी, सौतेले व्यवहार एवं अनुचित दबाव का विरोध करते हुए, परियोजना प्रबंधन प्रशासन, अध्यक्ष, प्रबंध निदेशक उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड सहित मा. राज्यपाल ,मुख्यमंत्री , अनुसूचित जाति जनजाति एवं समाज कल्याण राज्य मंत्री सहित जिलाधिकारी एवं उप जिलाधिकारी से अनुरोध किया है कि ओबरा एक अत्यंत छोटी सी जगह है जहां पर निजी आवासीय सुविधा न के बराबर है।

अतः महाविद्यालय परिसर में ही महाविद्यालय के प्राध्यापक एवं कर्मचारियों के लिए आवासों का निर्माण कराया जाए तथा जब तक आवासों का निर्माण नहीं हो जाता, तब तक ओबरा तापीय परियोजना,उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड द्वारा महाविद्यालय की स्थापना के समय दिए गए वचन का पालन करते हुए अपने अधिकारियों, कर्मचारियों की भांति महाविद्यालय के प्राध्यापको एवं कर्मचारियों को भी अपनी परियोजना कॉलोनी में ही आवास उपलब्ध कराए। टूट क्षेत्र से बाहर परियोजना कॉलोनी में बिना दूसरा आवास आवंटित किए, उनसे वर्तमान आवास रिक्त न कराया जाए । जिससे वे लोग बिना किसी मानसिक तनाव के स्वस्थ मन से अपने कर्तव्यों एवं दायित्वों का निर्वहन कर सकें।