मलिहाबाद में गोवंश कटान का गोरख धंधा: पांच दिन बाद भी पुलिस खाली हाथ, दबाव में जांच?
मलिहाबाद। लखनऊ जिले के मलिहाबाद इलाके में गोवंश कटान की एक सनसनीखेज घटना ने स्थानीय समुदाय को झकझोर दिया है। बिराहिमपुर गांव में हुई इस वारदात को पांच दिन बीत चुके हैं, लेकिन पुलिस अब तक अपराधियों का पता लगाने में नाकाम साबित हुई है। सूत्रों के मुताबिक, इस मामले में पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं, जहां जांच को दबाने की कोशिशें की जा रही हैं, जबकि गोमांस तस्करी अपने चरम पर पहुंच चुकी है।
इस इलाके में गोमांस तस्करी का धंधा बहुत जोरो से बड़ा चुका है, लेकिन पुलिस की निष्क्रियता ने इसे और बढ़ावा दिया है।मामले की जांच में पुलिस की खानापूर्ति साफ नजर आ रही है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पुलिस अधिकारी घटना की जानकारी साझा करने से कतरा रहे हैं और उच्चाधिकारी भी चुप्पी साधे हुए हैं।
इतना ही नहीं, इस घटना के मात्र दो दिन बाद काकोरी के दुर्गागंज चौराहे पर एक तीन पहिया लोडर से संदिग्ध मांस बरामद किया गया था, जो इस तस्करी नेटवर्क से जुड़ा हो सकता है। लेकिन पुलिस ने इस कड़ी को जोड़ने की बजाय मामले को रफा-दफा करने में लगी हुई है।सबसे गंभीर आरोप पुलिस की मिलीभगत का है। स्थानीय लोगों और सूत्रों का दावा है कि पुलिस विभाग के कुछ अधिकारी तस्करों को संरक्षण दे रहे हैं, जिसकी वजह से वे इतनी आसानी से अपना धंधा चला पा रहे हैं।
उच्च पदों पर बैठे अधिकारी कथित तौर पर पत्रकारों से समझौता करने की कोशिश कर रहे हैं और खबरों को दबाने का दबाव डाल रहे हैं। कुछ पत्रकार, जो अधिकारियों की चाटुकारिता में लगे हैं, इस मुद्दे को उठाने वाले साथी पत्रकारों को फर्जी मुकदमों में फंसाने की धमकियां दे रहे हैं।इसके अलावा, जांच में पक्षपात का आरोप भी लग रहा है। सूत्रों के हवाले से पता चला है कि पुलिस एकतरफा कार्रवाई कर रही है और केवल हिंदू व्यक्तियों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है।
यह घटना हिंदू आस्था के खिलाफ है, जो गौमाता को पवित्र मानती है, लेकिन पुलिस की कार्रवाई में हिंदू समुदाय को ही टारगेट किया जा रहा है। इससे इलाके में तनाव बढ़ रहा है और स्थानीय निवासियों में असंतोष फैल रहा है।पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) कार्यालय से संपर्क करने पर कोई आधिकारिक बयान नहीं मिला। एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि जांच चल रही है और जल्द ही दोषियों को गिरफ्तार किया जाएगा।
लेकिन पांच दिन बीतने के बाद भी कोई प्रगति न होना पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।यह घटना उत्तर प्रदेश में गोवंश संरक्षण कानून की सख्ती के बावजूद तस्करी के बढ़ते मामलों को उजागर करती है। स्थानीय संगठनों ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए उच्च स्तरीय कमेटी गठित की जाए और यदि पुलिस की मिलीभगत साबित होती है तो दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई हो। फिलहाल, गांववासी सतर्क हैं और आगे ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सामूहिक प्रयास कर रहे हैं।

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