सोनभद्र में मजदूरों की ढाल बने डब्लू सिंह स्वर्गीय भाई शिव प्रताप सिंह के पदचिह्नों पर चलकर दे रहे न्याय को नई धार
मजदूरों के मसीहा बने डब्लू सिंह भाई शिव प्रताप सिंह की विरासत को बढ़ा रहे आगे
अजित सिंह ( ब्यूरो)
कोयला, बिजली, एल्युमीनियम और सीमेंट जैसी भारी औद्योगिक इकाइयों के कारण सोनभद्र की पहचान पूरे देश में ऊर्जांचल के रूप में होती है। लेकिन इन चमकती लाइटों और बड़ी चिमनियों के पीछे मजदूरों के शोषण और अन्याय की काली हकीकत भी छिपी रहती है। इस औद्योगिक चक्र में पिसते मजदूरों के लिए कभी स्वर्गीय शिव प्रताप सिंह एक अभेद्य दीवार बनकर खड़े होते थे। आज उनके जाने के बाद, उनके छोटे भाई और प्रखर समाजसेवी डब्लू सिंह ने उस संघर्ष की मशाल को थाम लिया है। सोनभद्र का श्रमिक इतिहास शिव प्रताप सिंह के जिक्र के बिना अधूरा है। वे केवल एक नेता नहीं, बल्कि मजदूरों की उम्मीद थे। उन्होंने उद्योगपतियों और रसूखदारों की मनमानी के खिलाफ भूख हड़ताल, अनशन और सड़क से लेकर सदन तक ऐसे आंदोलन किए, जिसने व्यवस्था को झुकने पर मजबूर कर दिया। मजदूरों को इंसाफ दिलाने के लिए वे किसी भी हद तक जाने से पीछे नहीं हटते थे। शिव प्रताप सिंह की हत्या के बाद मजदूरों में जो असुरक्षा की भावना पैदा हुई थी, उसे डब्लू सिंह ने अपने सेवा भाव से दूर किया है। हाल ही में मजदूरों के बीच पहुँचकर डब्लू सिंह ने उन्हें भरोसा दिलाया और कहा आपके या आपके परिवार पर जब भी कोई आफत आए या कोई आपका शोषण करे, तो मुझे अपना भाई समझकर याद करना। मेरे भाई शिव प्रताप सिंह ने अपना जीवन मजदूरों के हक के लिए समर्पित किया था, मैं उस बलिदान को व्यर्थ नहीं जाने दूँगा।
स्थानीय लोगों का मानना है कि डब्लू सिंह के भीतर वही राजपूताना रक्त और संस्कार हैं, जो अन्याय के विरुद्ध शस्त्र उठाने की प्रेरणा देते हैं। इतिहास गवाह है कि जब भी कहीं अत्याचार हुआ है, राजपूत समाज ने रक्षा का दायित्व निभाया है। डब्लू सिंह इसी परंपरा का निर्वहन करते हुए। किसी भी औद्योगिक दुर्घटना या आपदा की सूचना मिलते ही वे मौके पर पहुँचते हैं। वे तन-मन-धन और पूर्ण समर्पण के साथ पीड़ित पक्ष की मदद में लग जाते हैं। मजदूरों की जायज मांगों को फैक्ट्री प्रबंधन और जिला प्रशासन के सामने मजबूती से रखना उनकी सबसे बड़ी ताकत है। आज रेणुकूट और आसपास के क्षेत्रों में डब्लू सिंह का नाम एक निर्भीक समाजसेवी के रूप में उभरा है। जब भी किसी मजदूर के साथ अन्याय होता है, डब्लू सिंह सबसे पहले आवाज उठाते हैं। उनके इसी जुझारू व्यक्तित्व के कारण वे आज सोनभद्र के सबसे विश्वसनीय समाजसेवियों में से एक माने जाते हैं।
सोनभद्र के मजदूरों के लिए डब्लू सिंह अब केवल एक नेता नहीं, बल्कि एक सुरक्षा कवच बन गए हैं। उनके नेतृत्व ने यह साबित कर दिया है कि भले ही नेतृत्व का चेहरा बदल गया हो, लेकिन मजदूरों के हक की लड़ाई और शोषण के खिलाफ संघर्ष आज भी वही है।


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