Haryana: हरियाणा में इन 24 अधिकारियों के खिलाफ होगी कार्रवाई, सीएम सैनी ने दिए आदेश
Haryana News: हरियाणा सरकार प्रदेश की सड़कों को गड्ढामुक्त बनाने को लेकर सख्त रुख अपनाए हुए है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बुधवार को अक्तूबर माह में शुरू किए गए ‘म्हारी सड़क’ ऐप की समीक्षा की। समीक्षा के दौरान सड़क निर्माण से जुड़े विभागों के करीब 24 अधिकारियों की लापरवाही सामने आने पर मुख्यमंत्री ने उनके खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए।
अब तक 24 हजार से ज्यादा शिकायतें दर्ज
मुख्यमंत्री सैनी ने बताया कि अब तक ‘म्हारी सड़क’ ऐप के माध्यम से 24,482 शिकायतें प्राप्त हुई हैं। इनमें से 10,501 शिकायतों का निस्तारण हो चुका है, जबकि 12,930 शिकायतों पर कार्य प्रगति पर है। शेष शिकायतों का समाधान भी जल्द किया जा रहा है। ऐप के जरिए समाधान होने पर 1,770 लोगों ने संतुष्टि भी व्यक्त की है। मुख्यमंत्री के अनुसार अब तक 1 लाख 18 हजार किलोमीटर सड़कों को गड्ढामुक्त किया जा चुका है।
हर माह उपायुक्त करेंगे समीक्षा
मुख्यमंत्री ने आदेश दिए कि ‘म्हारी सड़क’ ऐप की मासिक समीक्षा जिलास्तर पर उपायुक्त की अध्यक्षता में की जाए। इसके अलावा लोक निर्माण विभाग के इंजीनियर-इन-चीफ को निर्देश दिए गए हैं कि वे प्रदेश में अब तक हुई सड़क मरम्मत, जारी कार्यों और शेष सड़कों को गड्ढामुक्त करने की समय-सीमा का विस्तृत ब्योरा प्रस्तुत करें। फिलहाल इस ऐप के तहत शहरी स्थानीय निकाय, लोक निर्माण विभाग, हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण, हरियाणा राज्य मार्केटिंग बोर्ड, एचएसआईआईडीसी, जिला परिषद, जीएमडीए और पीएमडीए जैसे विभाग कार्य कर रहे हैं।
हर जिले में बनेगी स्मार्ट सड़क
मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़कों से जुड़ी समस्याओं की जानकारी देना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। सरकार की योजना के तहत हर जिले में एक सड़क को ‘स्मार्ट सड़क’ के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां पाथवे जैसी सुविधाएं भी होंगी। अब तक 19,629 लोग इस ऐप को डाउनलोड कर चुके हैं। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सभी पंजीकृत ड्राइविंग लाइसेंस धारकों और वाहन मालिकों को संदेश भेजकर ऐप के अधिकतम उपयोग को बढ़ावा दिया जाए।
गलत समाधान दिखाने पर सख्त कार्रवाई
समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री के संज्ञान में आया कि कुछ स्थानों पर शिकायतों का वास्तविक समाधान किए बिना ही ऐप पर समाधान दर्शा दिया गया। कहीं कार्य शुरू ही नहीं हुआ, तो कहीं जवाब में लिखा गया कि समस्या का समाधान एक वर्ष में होगा। इस तरह की लापरवाही पर मुख्यमंत्री ने कड़ा रुख अपनाते हुए 7 से 10 दिनों के भीतर कारण बताओ नोटिस जारी करने और जवाब के साथ-साथ समस्या का तुरंत समाधान सुनिश्चित करने के आदेश दिए हैं।


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