एआई बनाम अंडरवर्ल्ड: नया भारत, नई लड़ाई

भारत की सुरक्षा का डिजिटल महाभारत शुरू

एआई बनाम अंडरवर्ल्ड: नया भारत, नई लड़ाई

डेटा, टेक्नोलॉजी और इरादा: मोदी सरकार की सुरक्षा क्रांति

भारत की आंतरिक सुरक्षा को अभेद्य कवच प्रदान करने की दिशा में मोदी सरकार ने एक ऐतिहासिक और दूरगामी पहल करते हुए 26 दिसंबर 2025 को राष्ट्रीय ऑर्गेनाइज्ड क्राइम नेटवर्क डेटाबेस (ओसीएनडी) का शुभारंभ किया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा एंटी-टेरर कॉन्फ्रेंस-2025 में लॉन्च किया गया यह प्लेटफॉर्म केवल एक तकनीकी नवाचार नहींबल्कि संगठित अपराध और आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक युद्ध की घोषणा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से संचालित यह प्रणाली अपराधियों के नेटवर्कउनके फंडिंग चैनल और अंतरराज्यीय गठजोड़ को जड़ से खत्म करने की क्षमता रखती है। एनआईएराज्य पुलिस और नेटग्रिड (नेशनल इंटेलिजेंस ग्रिड) के संयुक्त प्रयास से विकसित ओसीएनडीमोदी सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का सशक्त प्रमाण हैजो अपराधियों को यह स्पष्ट संदेश देता है कि अब भारत में छिपने की कोई जगह नहीं बची है।

संगठित अपराध की जटिल और बहुस्तरीय संरचना को समझते हुए सरकार ने यह स्वीकार किया कि केवल पारंपरिक पुलिसिंग से इस चुनौती का समाधान संभव नहीं। वर्षों से माफिया गिरोहड्रग नेटवर्कसाइबर अपराधी और अंतरराज्यीय सिंडिकेट सूचनाओं के बिखराव का लाभ उठाते रहे हैं। एक राज्य के पास अपराधी का अधूरा डेटा होता थाजबकि दूसरे राज्य में उसकी पूरी आपराधिक पृष्ठभूमि छिपी रह जाती थी। ओसीएनडी इस खामी को समाप्त करता है। यह सभी राज्यों की एफआईआरचार्जशीटखुफिया रिपोर्टडोसियर और बायोमेट्रिक जानकारियों को एकीकृत मंच पर लाकर रीयल-टाइम एक्सेस देता है। अधिकारियों का कहना है कि यह प्लेटफ़ॉर्म ‘प्राकृतिक भाषा में खोज और तुरंत उत्तर’ देने वाले एआई मॉडल जैसी कार्यप्रणाली अपनाता हैजिससे अपराध नेटवर्क को पूरी तरह उजागर किया जा सकता है।

ओसीएनडी की सबसे बड़ी ताकत इसकी उन्नत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्षमताएं हैंजो इसे वैश्विक स्तर का सुरक्षा टूल बनाती हैं। वॉयस सैंपल मैचिंगफिंगरप्रिंट पहचान और अन्य बायोमेट्रिक तकनीकों के जरिए संदिग्धों की पहचान अब सेकंडों में संभव होगी। नेटग्रिड से इसका समन्वय आतंक फंडिंगओवरग्राउंड वर्कर्स और हवाला नेटवर्क को बेनकाब करने में निर्णायक भूमिका निभाएगा। अमित शाह ने सही कहा कि कई अपराधी नेता विदेश भागकर आतंकी संगठनों से हाथ मिला लेते हैं और अपराध की कमाई से देश के खिलाफ साजिशें रचते हैं। ओसीएनडी इसी खतरनाक नेक्सस को तोड़ने का औजार है। इसके साथ लॉन्च किया गया वेपंस डेटाबेस खोएलूटे और बरामद हथियारों की ट्रैकिंग कर अपराध की सप्लाई चेन को ध्वस्त करेगा।

एंटी-टेरर कॉन्फ्रेंस में अमित शाह द्वारा घोषित “360 डिग्री असॉल्ट” रणनीति भारत की सुरक्षा सोच में गुणात्मक बदलाव को दर्शाती है। इसमें इंटेलिजेंस शेयरिंगअत्याधुनिक तकनीकअंतर-एजेंसी समन्वय और सहकारी संघवाद को एकीकृत किया गया है। यह नीति अपराध को केवल नियंत्रित करने की नहींबल्कि उसे जड़ से समाप्त करने की मंशा को दर्शाती है। इसी क्रम में अपडेटेड एनआईए क्राइम मैनुअल भी जारी किया गयाजिससे जांच प्रक्रियाएं अधिक वैज्ञानिकतेज और कानूनी रूप से मजबूत बनेंगी। अमित शाह ने स्पष्ट किया कि संगठित अपराध आतंकवाद की नर्सरी हैऔर जब तक इसे समाप्त नहीं किया जाएगाराष्ट्रीय सुरक्षा पूर्ण नहीं हो सकती। ओसीएनडी इस समग्र रणनीति का डिजिटल फंदा हैजो अपराधियों के हर कदम को ट्रैक करेगा।

ओसीएनडी का प्रभाव केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं रहेगाबल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा के पूरे इकोसिस्टम को नई धार देगा। ड्रग ट्रैफिकिंगटेरर फाइनेंसिंगसाइबर गैंग और अंतरराष्ट्रीय माफिया नेटवर्क अब इस डिजिटल निगरानी से बच नहीं पाएंगे। जहां पहले किसी नेटवर्क को समझने में महीनों लग जाते थेवहीं अब सेकंडों में एक्शन योग्य इंटेलिजेंस उपलब्ध होगी। मोदी सरकार ने इस पहल में राज्यों को भागीदार बनाकर सहकारी संघवाद को नई मजबूती दी है। विशेषज्ञ इसे “डिजिटल ड्रैगनेट” की संज्ञा दे रहे हैंजो न केवल मौजूदा अपराधियों को पकड़ेगा बल्कि भविष्य के खतरों का पूर्वानुमान भी लगाएगा। यह भारत को दुनिया की सबसे सशक्त और आधुनिक सुरक्षा प्रणालियों वाले देशों की कतार में खड़ा करता है।

मोदी सरकार की यह पहल स्पष्ट करती है कि भारत अब अपराध और आतंकवाद के खिलाफ रक्षात्मक नहींबल्कि आक्रामक रणनीति अपना चुका है। ओसीएनडी न केवल मौजूदा सिंडिकेट्स को ध्वस्त करेगाबल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित राष्ट्र की नींव रखेगा। अमित शाह की प्रशासनिक दूरदृष्टि और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्णायक नेतृत्व में एनआईए ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना को साकार किया है। आने वाले समय में “360 डिग्री असॉल्ट” रणनीति इसे और अधिक प्रभावी बनाएगी। राज्य पुलिस बलों का इसे पूरी निष्ठा से अपनाना विकसित भारत के लक्ष्य को गति देगा। ओसीएनडी अपराधियों के लिए चेतावनी नहींबल्कि उनके पूरे नेटवर्क के अंत की घोषणा है।

इसके साथ ही मोदी सरकार ने एंटी-टेरर इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बनाने पर विशेष जोर दिया हैजिसमें कॉमन एटीएस स्ट्रक्चर और अभेद्य सुरक्षा ग्रिड की परिकल्पना शामिल है। पहलगाम जैसे हमलों के बाद ऑपरेशन सिंदूर और महादेव जैसी कार्रवाइयों ने यह सिद्ध किया है कि भारत की जवाबी क्षमता पहले से कहीं अधिक सशक्त हुई है। ओसीएनडी इन अभियानों को डेटा और विश्लेषण का मजबूत आधार प्रदान करेगाजिससे आतंक की योजना बनाने वालों से लेकर उसे अंजाम देने वालों तक सभी पर शिकंजा कसेगा। यह व्यवस्था न केवल अपराध पर ब्रेक लगाएगीबल्कि भारत को आतंकमुक्त और समृद्ध राष्ट्र बनाने की दिशा में निर्णायक भूमिका निभाएगी। वैश्विक स्तर पर भी इस मॉडल की सराहना हो रही है।

ओसीएनडी मोदी सरकार की आंतरिक सुरक्षा नीति का एक ऐतिहासिक मील का पत्थर हैजो यह दर्शाता है कि भारत अब प्रतिक्रियात्मक नहींबल्कि पूर्णतः प्रोएक्टिव राष्ट्र बन चुका है। अमित शाह का यह एआई आधारित हथियार अपराधियों की जड़ों पर प्रहार करेगा और सहकारी संघवाद के माध्यम से सभी राज्यों को एक साझा सुरक्षा मंच पर लाएगा। यह विकसित भारत की मजबूत नींव हैजहां कोई अपराधी या आतंकी सुरक्षित महसूस नहीं कर सकेगा। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में स्थापित ये सुरक्षा मानक आने वाले दशकों तक देश को दिशा देंगे। ओसीएनडी केवल एक डेटाबेस नहींबल्कि राष्ट्र की अटूट सुरक्षासंप्रभुता और संकल्प का सशक्त प्रतीक है।

 

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