यूरिया पर मनमानी वसूली, किसान पर दोहरी मार, जिम्मेदार मौन

-समितियों में तय मूल्य से अधिक में बिक रही यूरिया खाद,निगरानी तंत्र फेल

यूरिया पर मनमानी वसूली, किसान पर दोहरी मार, जिम्मेदार मौन

प्राइवेट दुकानों से यूरिया खाद की बोरी का गायब होना किसानों के प्रति प्रशासनिक उदासीनता का परिचायक

बस्ती। बस्ती जिलमें रबी फसलों की पहली सिंचाई के बाद यूरिया की मांग बढ़ी फसली सीजन के ठंडी सुबह में खेतों की मेड़ पर खड़ा किसान केवल आसमान नहीं, बल्कि व्यवस्था की दिशा भी देख रहा कि खेतों में खड़ी फसलें खाद की प्रतीक्षा में ठहरी हैं, जबकि समितियों की मनमानी और ढीली निगरानी ने परिस्थितियों को और जटिल बना दिया। स्थिति अब उत्पादन तक सीमित नहीं रही, बल्कि किसान की आय, परिवार और रसोई पर सीधा असर डाल रही। यूरिया की आपूर्ति से वितरण तक फैली लापरवाही ने उस विश्वास को डगमगा दिया है जिस पर खेती ही नहीं, देश व समाज निर्भर है  प्राप्त समाचार के अनुसार विकासखंड बनकटी के अंतर्गत साधन समिति खोरिया बसौढ़ी और सजहरा महथा में सहकारी समितियों पर यूरिया 275 रुपये प्रति बोरी बेचे जाने का मामला केवल आर्थिक अनियमित नहीं बल्कि प्रशासनिक उदासीनता के जीवंत उदाहरण हैं ।
 
किसानों ने ऑन-कैमरा बयान देकर अवैध वसूली की पुष्टि की है, जिससे प्रशासनिक निगरानी की सच्चाई उजागर हो रही है। सरकारी व्यवस्था किसानों की आंखों के सामने कैसे बिखरती जा रही और जिम्मेदार तंत्र मौन बना बैठा रहता है।फसली मौसम के अहम मोड़ पर खाद की जरूरत से जूझ रहे किसानों को अब महंगे दाम की दोहरी मार झेलनी पड़ रही है।किसानों के अनुसार समितियों पर खाद लेने पहुंचने पर निर्धारित दर की जगह ज्यादा रकम मांगी जाती है। सवाल उठाने पर कभी स्टॉक खत्म होने तो कभी आदेश न होने की बात कही जाती है।
 
फसल को समय पर खाद न मिलने के डर से किसान मजबूरी में अधिक कीमत चुकाने को विवश हैं।जिले के जागरूक व्यक्तियों का कहना कहना है कि यही स्थिति क्षेत्र की अन्य समितियों पर भी बनी हुई है, जहां नियम कागजों में सिमट कर रह गए हैं। खाद वितरण अनियमितता ने खेती की लागत बढ़ा दी है और लाभ पहले से ही सीमित किसानों के लिए संकट और गहरा हो गया है।
 
यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो यह व्यवस्था कालाबाजारी को और मजबूत करेगी। गौरतलब है कि हर फसली मौसम में खाद की किल्लत और अधिक कीमत वसूली की शिकायतें सामने आती रही हैं।आपूर्ति से लेकर वितरण तक कमजोर नियंत्रण के चलते समितियों पर जवाबदेही तय नहीं हो पा रही,जिसका सीधा नुकसान अन्नदाता को उठाना पड़ रहा है।इस संबंध में जब जिला कृषि रक्षा अधिकारी से बात की गई तो उन्होंने बताया कि उक्त प्रकरण अभी तक हमारे संज्ञान में नहीं था,अब मामला प्रकाश में आया है विभाग द्वारा इसकी जांच कराकर उचित व वैधानिक कार्यवाही की जाएगी।
 
 

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