तपसी श्रोत परियोजना अधूरी, 275 गांवों पर पेयजल संकट, ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी

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स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज

बारा  क्षेत्र में करोड़ों रुपए की लागत से शुरू की गई तापसी तपसी स्रोत जल परियोजना लंबित काम की वजह से अधूरी पड़ी हुई है।इसका मकसद यमुना नदी से पानी लेकर ग्रामीण पहाड़ी और दुर्गम इलाकों तक शुद्ध पेयजल पहुंचाना था,लेकिन कार्य में सुस्ती और लापरवाही से ग्रामीणों की उम्मीदें अधूरी रह गई है।

ग्रामीणों ने बताया कि जल जीवन मिशन के तहत 275 गांवों को नल कनेक्शन से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया था।पाइपलाइन,ट्रीटमेंट प्लांट और वितरण नेटवर्क की स्थापना शुरू हुई थी, लेकिन कई महीनो से काम पूरी तरह तप पड़ा है कई जगह पाइप मिट्टी में दबी हैं,जबकि निर्माण सामग्री धूल खा रही है। गर्मी में स्थिति और भी गंभीर हो जाती है। पहाड़ी व सूखे क्षेत्रों में लोग दो-तीन किलोमीटर दूर से हैंडपंप या कुओं से पानी लाते हैं। महिलाएं और बच्चे घंटों लाइन में लगकर पानी भरते हैं। जबकि कई गांव में हैंडपंप भी खराब हैं।

 
 ग्रामीणों का आरोप है कि ठेका कंपनी के बीच तालमेल की कमी के कारण परियोजना अधूरी रह गई।न तो कोई नियमित निरीक्षण हो रहा है,और ना ही काम की प्रगति का स्पष्ट रोड मैप जारी किया गया है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि सरकार करोड़ों रुपए की योजनाएं मंजूर कर रही है,तो जमीनी स्तर पर काम क्यों अधूरा पड़ा है ?
 
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि काम की गति नहीं बढ़ाई गई, तो वह सड़क पर उतरकर आंदोलन करेंगे। फिलहाल तपसी स्रोत परियोजना का भविष्य अनिश्चित है,और 275 गांव के लोग इस योजना के पूरा होने का इंतजार कर रहे हैं।अब देखना होगा कि लोगों की यह प्रतीक्षा कहीं शबरी प्रतीक्षा बनकर ना रह जाए। 

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