ओबरा में स्वच्छता की खुली पोल नाली बनी कूड़ादान, बीमारियों को दे रही दावत

आदर्श नगर पंचायत की खुली पोल, लोगों ने लगाये गंभीर आरोप, वहीं लोगों का जीना हुआ दूभर

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नगर पंचायत के लिए सबसे बड़ा सवाल?

अजीत सिंह ( ब्यूरो रिपोर्ट) 

ओबरा/सोनभद्र-

एक ओर जहां ओबरा नगर पंचायत ने आदर्श नगर पंचायत का खिताब अपने नाम किया है और साफ-सफाई के क्षेत्र में प्रथम स्थान प्राप्त किया है, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। नगर के कई ऐसे इलाके हैं जहां विकास और स्वच्छता के दावों की हवा निकलती दिखाई देती है।

खुली नालियां और कूड़ेदानों की कमी के कारण यहां गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं, जो न केवल नगर की सुंदरता को धूमिल कर रही हैं, बल्कि नागरिकों के स्वास्थ्य के लिए भी एक बड़ा खतरा बन गई हैं।स्थानीय लोगों की गैरजिम्मेदारी और नगर पंचायत के अधिकारियों की कथित अनदेखी के चलते, ओबरा की नालियां अब कूड़ादान का रूप ले चुकी हैं। नगर के रहवासी बिना किसी डर के अपने घरों का कचरा और अन्य अपशिष्ट पदार्थ सीधे नालियों में डाल रहे हैं।

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इसके परिणामस्वरूप, नालियां पूरी तरह से जाम हो गई हैं, जिससे गंदा पानी सड़कों और गलियों में बह रहा है। यह जमा हुआ पानी न केवल दुर्गंध पैदा कर रहा है, बल्कि मच्छरों, मक्खियों और अन्य हानिकारक कीड़े-मकोड़ों के प्रजनन का केंद्र भी बन गया है। इस कारण नगर में मलेरिया, डेंगू और अन्य जलजनित बीमारियों के फैलने का खतरा तेजी से बढ़ रहा है।

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स्थानीय निवासियों का कहना है कि नालियों की नियमित सफाई भी नहीं हो रही है, जिसके कारण स्थिति दिन-प्रतिदिन बदतर होती जा रही है। कई निवासियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उन्होंने इस समस्या के बारे में नगर पंचायत में कई बार शिकायत दर्ज कराई है। उनकी मांग है कि नालियों को जल्द से जल्द साफ

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करवाया जाए और उन पर सीमेंट की पटिया डालकर उन्हें ढका जाए, ताकि भविष्य में कोई उनमें कूड़ा न डाल सके। इसके साथ ही, उन्होंने नगर के विभिन्न सार्वजनिक स्थानों पर पर्याप्त संख्या में कूड़ेदान स्थापित करने की भी मांग की है, ताकि लोगों को कूड़ा इधर-उधर फेंकने की मजबूरी न हो। हालांकि, स्थानीय लोगों का आरोप है कि उनकी शिकायतों पर नगर पंचायत की ओर से कोई संतोषजनक कार्रवाई नहीं की गई है।

यह विडंबना ही है कि एक ओर ओबरा नगर पंचायत स्वच्छता के लिए पुरस्कार जीत रही है, वहीं दूसरी ओर उसके अपने ही क्षेत्र में इस तरह की गंभीर समस्याएं व्याप्त हैं। यह स्थिति न केवल नगर की स्वच्छता की छवि को खराब कर रही है, बल्कि नागरिकों के मौलिक अधिकार - स्वस्थ वातावरण - का भी उल्लंघन कर रही है।

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नगर पंचायत के अधिकारी इस गंभीर समस्या पर कब ध्यान देते हैं और नागरिकों को स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण प्रदान करने के लिए ठोस कदम कब उठाते हैं। यदि समय रहते उचित कार्रवाई नहीं की गई, तो ओबरा की यह लापरवाही न केवल बीमारियों का कारण बनेगी, बल्कि 'आदर्श नगर पंचायत' के उसके तमगे पर भी एक बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा कर देगी।

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