‌भगोड़े आर्थिक अपराधी से बीजेपी सरकार की साठ गांठ आरोप।

‌भगोड़े आर्थिक अपराधी से बीजेपी सरकार की साठ गांठ आरोप।

‌पेट्रोलियम मंत्रालय बेसर्मी के साथ उनसे कर रहा है व्यापार।



‌‌स्वतंत्र प्रभात



‌प्रयागराज-


‌एक ओर मोदी सरकार ने देश के नागरिकों कि आंखों में धूल झोंकने के लिए भगोड़ा आर्थिक अपराधी कानून 2018 बनाया है वहीं दूसरी ओर उनमें से चुनिन्दा भगोड़ा आर्थिक अपराधियों से उसकी मिलीभगत है। इसे कहते हैं खाने के दांत कुछ और दिखाने के दांत कुछ और। सरकार न केवल आर्थिक अपराधियों के लिए सुरक्षित निकास की सुविधा प्रदान कर रही है बल्कि उनके साथ व्यापार भी कर रही है। मामला स्टर्लिंग बायोटेक समूह नितिन संदेसरा और चेतन संदेसरा का है, जो भगोड़े आर्थिक अपराधी हैं। स्टर्लिंग ऑयल एक्सप्लोरेशन एंड एनर्जी प्रोडक्शन कंपनी लिमिटेड (सीपको) से कच्चे तेल के आयात को जारी रखा गया है , जो स्टर्लिंग बायोटेक समूह की इकाई है।

‌सितंबर 2020 में, एक विशेष अदालत ने स्टर्लिंग बायोटेक समूह के प्रमोटरों नितिन संदेसरा और चेतन संदेसरा को कथित तौर पर ₹ 15,000 करोड़ के बैंक ऋणों को छीनने के लिए आर्थिक अपराधी घोषित किया। अक्टूबर 2017 में, प्रवर्तन निदेशालय ने स्टर्लिंग बायोटेक और संदेसरा बंधुओं के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया। मामला दर्ज होने से ठीक पहले नितिन संदेसरा, चेतन संदेसरा, उनकी पत्नी दीप्ति और सहयोगी हितेशकुमार नरेंद्रभाई पटेल देश छोड़कर भाग गए।


‌कांग्रेस ने आज प्रेस कॉन्फ्रेंस करके मोदी सरकार पर आर्थिक अपराध में शामिल लोगों को देश से भगाने और उनका साथ देने का आरोप लगाया। एक आरटीआई का हवाला देते हुए कांग्रेस प्रवक्ता गौरव वल्लभ ने आरोप लगाया कि सरकार उन्हें कानून के दायरे में लाने के प्रयास करने के बजाय उनसे कच्चा तेल खरीद रही है। उनके व्यापार और संपत्ति पर अंकुश लगाने या जब्त करने के बजाय, पेट्रोलियम मंत्रालय बेशर्मी से संदेसराओं के साथ व्यापार कर रहा है। 


1 जनवरी, 2018 से 31 मई, 2020 तक, भारतीय तेल सार्वजनिक उपक्रमों द्वारा सीपको नाइजीरिया से 5701.83 करोड़ के कच्चे तेल का शिपमेंट प्राप्त किया गया था। इन खुलासे से सवाल उठता है कि सरकार ने संदेसरा बंधुओं के प्रत्यर्पण को सुनिश्चित करने के लिए कोई प्रयास क्यों नहीं किया। उन्होंने पूछा कि क्या मोदी सरकार संदेसरा बंधुओं को भगोड़ा आर्थिक अपराधी मानती है, और अगर ऐसा करती है, तो तेल सार्वजनिक उपक्रम अभी भी उनके साथ व्यापार कैसे कर रहे हैं।

‌वल्लभ ने कहा कि जब भारतीय डीजल, पेट्रोल और रसोई गैस की कीमतों में तेजी से वृद्धि कर रहे थे, तो भगोड़े समृद्ध हो रहे थे।ऐसा लगता है कि सच्चे ‘विकास’ और ‘अच्छे दिन’ केवल डिफॉल्टरों और भगोड़ों के लिए हैं।वल्लभ ने कहा कि सरकार पैसा वसूलने के बजाए लोगों को भगाने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का एक मॉडल बन चुका है कि देश से एक्सपोर्ट करते हैं भगोड़ों को और वो भगोड़े बाहर जाकर उन्हीं की कंपनी में बनी वस्तुएं और सेवाएं देश में भेजते हैं और देश की सरकार उन्हों भगोड़ों से वस्तुएं खरीदती है।

‌गौरव वल्लभ ने आरोप लगाया की संदेसरा ग्रुप की, यह लाइन खत्म ही नहीं हो रही है। इसमें नीरव मोदी, मेहुल चौकसी, विजय माल्या शामिल हैं। जैसे ही इन लोगों पर ईडी की कार्रवाई शुरू होती है, यह लोग देश छोड़ कर चले जाते हैं।इन पर कोई यू टोक नहीं होती। वापस लाने के नाम पर कहते हैं वो लोग इंटरपोल के नोटिस खारिज करवा देते हैं।सरकार इस पर चुप्पी साधे रहती है। इसके बाद वो वहां से वस्तुएं और सेवाएं भेजते हैं, जिन्हें भारत सरकार खरीदती है।


‌उन्होंने कहा कि सरकार ने इन लोगों को आर्थिक भगोड़ा घोषित कर दिया है। पिछले सात सालों में सरकारी बैंकों का पैसा लेकर, सरकारी संरक्षण में फ्लाइट पकड़ कर विदेश जाओ। वहां से बीच पर आराम फरमाते हुए फोटो भेजो।और अब तो एक कदम और आगे बढ़ गया है। वल्लभ ने कहा कि मध्यम और निम्न आय वर्ग का व्यक्ति अखबार खोलता है तो देखता है कि आज पेट्रोल के दाम कितने बढ़े। आज डीजल के दाम कितने बढ़े और अगर महीने की शुरुआत है तो रसोई गैस के दाम कितने बढ़े।


‌गौरव वल्‍लभ ने कहा कि अक्टूबर 2017 को ये लोग भाग जाते हैं और उसके बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) इन पर केस दर्ज करता है।इसके बाद 2020 में इन्हें भगोड़ा अपराधी घोषित किया जाता है। इसके बाद से 31 मार्च 2020 तक इनकी कंपनी से हजारों करोड़ रुपए का क्रूड ऑयल (कच्चा तेल) खरीदा जाता है। पंडोरा पेपर्स के खुलासे के अनुसार इन्होंने 6 शेल कंपनियां बनाई और पैसे ट्रांसफर किए। 2017-18 में जबकि ईडी ने इन पर केस रजिस्टर किया हुआ है। उन्‍होंने तंज करने के भाव में पूछा कि ये रिश्ता क्या कहलाता है? अभी तक इनसे वसूली करने और इन्हें वापस लाने के मुद्दे पर सरकार मौन धारण किये हुए है?


‌गौरव वल्‍लभ ने कहा कि क्या देश की एजेंसियां बाकी लोगों से भी ऐसा बर्ताव करती हैं?  पीएसयू इनसे क्यों सामान खरीद रही हैं? उन्‍होंने कहा कि भारत सरकार, ईडी इस शिप की लोकेशन देखे और इन्हें पकड़े, लेकिन ऐसा क्यों नहीं कर रही है?

‌संदेसरा ग्रुप के चार लोग नितिन संदेसरा, चेतन संदेसरा, दीप्ति संदेसरा और हितेष कुमार नरेंद्र भाई पटेल ने देश के सरकारी बैंकों को 15 हजार करोड़ का चूना लगाया। अक्टूबर 2017 में ईडी इनके खिलाफ केस दर्ज करती है। केस दर्ज करने के कुछ समय पहले ही यह देश छोड़ सकर चले जाते हैं।

‌वल्लभ ने कहा कि हम जैसे लोग अगर एक महीने की ईएमआई चुकाने में देरी कर देते हैं तो बैंक हमारा मकान कुर्क कर लेते हैं और यह लोग यहां से 15 हजार करोड़ रुपये लेकर नाइजीरिया में आराम फरमा रहे हैं। वहां की सरकार कह रही है कि हम इन्हें नहीं भेजेंगे। भारत सरकार इन्हें वापस लाने पर चुप्पी साधे बैठी है। इन्होंने इंटरपोल के नोटिस भी खारिज करवा दिए। इतना तो कई लोगों ने किया। लेकिन लोगों ने वहां व्यापार शुरू कर दिया और भारत सरकार इनसे वस्तुएं और सेवाएं खरीद रही है।


‌गौरव वल्‍लभ ने पंडोरा पेपर्स मामले में सरकार पर आरोपियों को संरक्षण देने का आरोप लगाया। और कहा कि भगोड़ों का साथ, भगोड़ों का विकास, सरकार का एक मॉडल बन चुका है। उन्‍होंने कहा कि संदेसरा ग्रुप में पिछले 7 सालों में यही हुआ कि लोगों का पैसा लो और सरकार के संरक्षण में फ्लाइट पकड़कर भागो और वहां कंपनियां बनाकर भारत को ही सामन बेचो। नितिन संदेसरा, हितेश कुमार पटेल, दीप्ति संदेसरा, चेतन संदेसरा ने ने यही किया है।


‌दुनिया भर में अमीर व्यक्तियों की वित्तीय संपत्ति का खुलासा करने वाले ‘पंडोरा पेपर्स’ में कारोबारियों सहित सैकड़ों धनाड्य भारतीयों के नाम भी शामिल हैं । दरअसल, ‘इंटरनेशनल कंसोर्टियम ऑफ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स’ ने यह रिपोर्ट जारी की, जो 117 देशों के 150 मीडिया संस्थानों के 600 पत्रकारों की मदद से तैयार की गई । इस रिपोर्ट को ‘पंडोरा पेपर्स’ कहा जा रहा है।


 

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