पुतिन फिर पांचवीं बार रूस के सर्वे सर्वा। क्या तानाशाही का नया दौर शुरू होगा ?

(शपथ ग्रहण का पश्चिमी देशों द्वारा खुला बहिष्कार)

 पुतिन फिर पांचवीं बार रूस के सर्वे सर्वा। क्या तानाशाही का नया दौर शुरू होगा ?

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन फिर रूसी सरकार के पांचवें राष्ट्रपति चुने गए। उन्होंने रूस के ग्रैंड क्रेमलिन पैलेस में 33 शब्दों में शपथ ग्रहण की है। उनके पांचवीं बार शपथ ग्रहण लेते ही विश्व में शांति स्थापना के प्रयासों को एक बड़ा झटका लगा है । इस शपथ ग्रहण समारोह का रूस,ब्रिटेन तथा अन्य यूरोपीय देशों ने बहिष्कार कर दिया। 2000 में पहली बार व्लादिमीर पुतिन रूस के राष्ट्रपति तथा प्रधानमंत्री चुने गए थे, उसके बाद 2004 2012 और 2018 में राष्ट्रपति की शपथ ले चुके हैं। व्लादिमीर पुतिन के राष्ट्रपति चुने जाने के साथ ही वैश्विक देश तथा अन्य संगठनों के विश्व स्तर पर चलाए जा रहे शांति प्रयासों में निराशा जनक वातावरण तैयार हुआ है।

व्लादिमीर पुतिन को साम्राज्यवादी विचारधारा का बड़ा समर्थक बताया जाता है और इसी विस्तारवादी सनक के चलते उन्होंने यूक्रेन में बड़ा सैनिक हमला किया था, अरबो रुपए के नुकसान तथा जान माल की हानि के बाद भी युद्ध अभी तक जारी है। अभी भी व्लादिमीर पुतिन तथा यूक्रेन के राष्ट्रपति के हौसले लड़ाई के लिए बुलंद देखे जा रहे हैं। रूस में 2000 से लेकर 2024 तक व्लादिमीर पुतिन 5 बार राष्ट्रपति चुने गए हैं इस दौरान अमेरिका में पांच अलग-अलग राष्ट्रपति और ब्रिटेन के सात प्रधानमंत्री बदले जा चुके हैं। शपथ लेने के बाद कांस्टीट्यूशनल कोर्ट के अध्यक्ष वालेरी जरकिन ने स्वागत किया और विक्ट्री शेक हैंड किया।

पुतिन ने शपथ ग्रहण के बाद 21 तोपों की सलामी लेते हुए राष्ट्रगान भी किया इसके बाद उन्होंने अपनी स्पीच में कहा कि हम उन देशों से बात करने सहर्ष तैयार हैं जो हमें परंपरागत दुश्मन समझते हैं। हम अन्य देशों से अपने संबंध बेहतर बनाना चाहते हैं उल्लेखनीय की शपथ ग्रहण समारोह का अमेरिका ब्रिटेन यूरोप के अन्य देशों ने बहिष्कार किया है हालांकि भारत के राजदूत विनय कुमार इस कार्यक्रम में मौजूद थे। दिनांक 15 मार्च से 17 मार्च 24 तक राष्ट्रपति चुनाव आयोजित किए गए थे इसमें व्लादिमीर पुतिन को 88% वोट मिले थे और उनके विरोधी निकोले खरातीनोव केवल 4% वोट ही मिले हैं। वैश्विक स्तर पर इस चुनाव को गैर-पारदर्शी और गैर-निष्पक्ष चुनाव माना गया है क्योंकि इस चुनाव में पुतिन का कोई खास विरोध नहीं किया गया था।

रूस में जोसेफ स्टालिन के बाद व्लादिमीर पुतिन ही सबसे ज्यादा समय से राष्ट्रपति बने हुए हैं रूस की जनता उन्हें कितना पसंद करती है यह तो नहीं मालूम पर वर्ष 2000 से 24 तक व्लादिमीर पुतिन ने रूस में आर्थिक सामरिक तथा सामाजिक परिवर्तन किए हैं एवं लगातार यूरोपीय देशों का विरोध करते आ रहे हैं। पिछले 2 वर्ष से ज्यादा समय से यूक्रेन से साम्राज्यवादी युद्ध की आधारशिला भी व्लादिमीर पुतिन ने ही रखी है एवं अभी भी युद्ध जारी है। यह तो तय है कि वैश्विक स्तर पर बाहुबली अमेरिका, ब्रिटेन,कनाडा, फ्रांस की वैश्विक दादागिरी को रूस व्लादिमीर पुतिन के नेतृत्व में चेक एंड बैलेंस करने में कामयाब रहा है। व्हाइट हाउस के पूर्व सुरक्षा सलाहकार फियोना हिल के अनुसार व्लादिमीर पुतिन अपने को रूस के सम्राट की तरह महान समझने लगे और 10 वर्ष पहले से क्रीमिया में कब्जे के बात तथा देश को यूक्रेन के युद्ध में झुकने के बाद काफी नाटकीय परिवर्तन हुए हैं अब व्लादिमीर पुतिन अपने को प्रगतिवादी शासक से बदलकर साम्राज्यवादी नेता के रूप में स्थापित करने के प्रयास में लगे हुए हैं।

उल्लेखनीय है कि पूरे विश्व में चीन के तानाशाह शी जिनपिंग, उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भी तुलना एक तानाशाह राष्ट्रपति के रूप में की जाती रही है। चीन और उत्तरी कोरिया को जहां वैश्विक शांति के लिए पूरा विश्व खतरा मानता है वही यूक्रेन युद्ध के बाद व्लादिमीर पुतिन भी इसी श्रेणी में आकर खड़े हो गए हैं। रूस की समाचार एजेंसी के अनुसार पुतिन ने अपने शपथ ग्रहण समारोह के भाषण में कहा है कि हम अपने एशियाई साथी दोस्तों के साथ मल्टीपोलर वर्ल्ड ऑर्डर के लिए काम करते रहेंगे उन्होंने यह भी कहा कि हम यूरोपीय देश के साथ खुले दिल से बात करने की तैयार है जो हमेशा हमारे विकास में बड़ा अवरोध बनते रहे हैं एवं रूस के विरुद्ध आक्रामक रवैया अपना कर रखते हैं। अब यह आशा की जानी चाहिए कि व्लादिमीर पुतिन के पांचवीं बार राष्ट्रपति बनने के बाद शायद उनके वैचारिक एवं सामरिक विचारों में परिवर्तन आ जाए।

संजीव ठाकुर, (वर्ल्ड रिकॉर्ड धारी लेखक,कवि), चिंतक, स्तंभकार,

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