प्रेरणादायक विचार

रवींद्रनाथ टैगोर: विचारों का वह वृक्ष, जिसकी छाया आज भी शीतल है

सभ्यताएँ अपनी सबसे बड़ी पूँजी स्मारकों में नहीं, उन विचारों में बचाकर रखती हैं जो पीढ़ियों का हाथ थामे रहते हैं। 7 अगस्त 1941 को रवींद्रनाथ टैगोर का शरीर कोलकाता के जोड़ासाँको में  शांत हुआ, पर उनका सृजन...
संपादकीय  स्वतंत्र विचार 

आनंद और अवसाद और सुख और पीड़ा, जीवन के अलग-अलग सोपान

सुख और दुख दो ऐसे सोपान हैं जिन पर चलकर ही मनुष्य अपनी संपूर्णता को समझ पाता है। जीवन कभी एक सीधी रेखा की तरह नहीं चलता, उसमें उतार-चढ़ाव, सुख-दुःख, आशा-निराशा, संभावनाएं और आशंकाएं निरंतर एक-दूसरे में गुंथी रहती हैं।...
संपादकीय  स्वतंत्र विचार