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भारत और वेनेजुएला के संबंधों की नई दिशा
इसी कारण दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग वर्षों से आर्थिक संबंधों का प्रमुख स्तंभ बना हुआ है।
भारत और वेनेजुएला के बीच संबंध कई दशकों पुराने हैं और समय के साथ इनका दायरा लगातार बढ़ता गया है। ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार, खनिज संसाधन, फार्मास्यूटिकल्स, कृषि और वैश्विक दक्षिण के देशों के बीच सहयोग जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों की साझेदारी मजबूत होती रही है। हाल ही में वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल डिक्ले रोड्रिक्यूज की भारत यात्रा और प्रधानमंत्री नरेंद्र के साथ उनकी बैठक ने एक बार फिर दोनों देशों के संबंधों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। यह यात्रा ऐसे समय में हुई है जब भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए विविध स्रोतों की तलाश कर रहा है और वेनेजुएला अपने विशाल प्राकृतिक संसाधनों के आधार पर वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपनी भूमिका को और मजबूत करना चाहता है।
भारत और वेनेजुएला के राजनयिक संबंध वर्ष 1959 में स्थापित हुए थे। तब से दोनों देशों के बीच मित्रतापूर्ण संबंध बने हुए हैं। हालांकि भौगोलिक दूरी काफी अधिक है और दोनों देश अलग-अलग महाद्वीपों में स्थित हैं, फिर भी आर्थिक हितों और विकासशील देशों की साझा चिंताओं ने उन्हें एक-दूसरे के करीब रखा है। भारत ने हमेशा वेनेजुएला को लैटिन अमेरिका के एक महत्वपूर्ण साझेदार के रूप में देखा है, जबकि वेनेजुएला ने भारत को एक विश्वसनीय और उभरती हुई आर्थिक शक्ति माना है।
वेनेजुएला दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार वाले देशों में शामिल है। इसी कारण भारत और वेनेजुएला के संबंधों का सबसे महत्वपूर्ण आधार ऊर्जा क्षेत्र रहा है। भारत विश्व के सबसे बड़े ऊर्जा उपभोक्ताओं में से एक है और अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयातित तेल से पूरा करता है। दूसरी ओर वेनेजुएला के पास विशाल कच्चे तेल के भंडार हैं। इसी कारण दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग वर्षों से आर्थिक संबंधों का प्रमुख स्तंभ बना हुआ है।
भारत की सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की तेल कंपनियां लंबे समय से वेनेजुएला के साथ व्यापार करती रही हैं। भारत के लिए वेनेजुएला केवल तेल का स्रोत नहीं बल्कि ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने का एक महत्वपूर्ण विकल्प भी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता और भू-राजनीतिक तनावों के बीच भारत अपनी नीति के अनुसार विभिन्न देशों से तेल खरीदता है ताकि किसी एक क्षेत्र पर अत्यधिक निर्भरता न रहे। हाल के वर्षों में भारत ने वेनेजुएला से तेल आयात बढ़ाया है और यह देश भारत के प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ताओं में शामिल हुआ है।
ऊर्जा क्षेत्र के अलावा अब दोनों देश अपने संबंधों को नए क्षेत्रों तक विस्तारित करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। हाल की उच्चस्तरीय बातचीत में क्रिटिकल मिनरल्स यानी महत्वपूर्ण खनिजों पर विशेष जोर दिया गया। आधुनिक तकनीक आधारित अर्थव्यवस्था में लिथियम, निकेल, कोबाल्ट और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों का महत्व तेजी से बढ़ रहा है। इनका उपयोग इलेक्ट्रिक वाहनों, बैटरियों, रक्षा उपकरणों और उन्नत औद्योगिक उत्पादों के निर्माण में होता है। भारत हरित ऊर्जा और तकनीकी विकास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है, इसलिए ऐसे खनिजों की उपलब्धता उसके लिए रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है।
वेनेजुएला केवल तेल ही नहीं बल्कि सोना, हीरा और अनेक अन्य खनिज संसाधनों से भी समृद्ध है। इसी कारण भारत वहां खनन और खनिज क्षेत्र में निवेश की संभावनाएं तलाश रहा है। यदि दोनों देशों के बीच इस क्षेत्र में सहयोग बढ़ता है तो इससे भारत को आवश्यक संसाधन प्राप्त होंगे और वेनेजुएला को निवेश तथा तकनीकी सहयोग मिलेगा।
भारत और वेनेजुएला के बीच व्यापारिक संबंधों में फार्मास्यूटिकल्स क्षेत्र भी महत्वपूर्ण स्थान रखता है। भारत विश्व का प्रमुख जेनेरिक दवा उत्पादक देश है और उसकी दवाएं गुणवत्ता तथा किफायत दोनों के लिए जानी जाती हैं। वेनेजुएला सहित लैटिन अमेरिकी देशों में भारतीय दवाओं की अच्छी मांग है। स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ बनाने में भारतीय दवा कंपनियां महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। इसी कारण दोनों देशों ने फार्मा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर भी चर्चा की है।
भारत से वेनेजुएला को मुख्य रूप से दवाएं, ऑटोमोबाइल और ऑटो पार्ट्स, रसायन, मशीनरी, कपड़ा उत्पाद, इंजीनियरिंग सामान और विभिन्न औद्योगिक उत्पाद निर्यात किए जाते हैं। भारतीय कंपनियों ने अपनी गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धी कीमतों के कारण वेनेजुएला के बाजार में अच्छी पहचान बनाई है। विशेष रूप से फार्मास्यूटिकल्स और वाहन क्षेत्र में भारतीय उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है।
दूसरी ओर भारत वेनेजुएला से मुख्य रूप से कच्चा तेल आयात करता है। इसके अलावा पेट्रोलियम उत्पाद, कुछ खनिज संसाधन और अन्य प्राकृतिक संसाधनों का भी आयात किया जाता है। वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था लंबे समय तक तेल पर आधारित रही है और भारत उसके लिए एक महत्वपूर्ण ग्राहक रहा है। ऊर्जा व्यापार दोनों देशों के आर्थिक संबंधों की रीढ़ माना जाता है।
दोनों देशों के संबंध केवल व्यापार और ऊर्जा तक सीमित नहीं हैं। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी दोनों देशों के बीच सहयोग देखने को मिलता है। विकासशील देशों के हितों की रक्षा, वैश्विक आर्थिक असमानताओं को कम करने और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को बढ़ावा देने जैसे मुद्दों पर दोनों देशों की सोच में काफी समानता है। इसी कारण वे विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर संवाद और सहयोग बनाए रखते हैं।
हाल के वर्षों में भारत ने लैटिन अमेरिका के देशों के साथ अपने संबंधों को मजबूत करने की नीति अपनाई है। इस क्षेत्र में वेनेजुएला एक महत्वपूर्ण देश माना जाता है। प्राकृतिक संसाधनों की प्रचुरता, रणनीतिक स्थिति और आर्थिक संभावनाओं के कारण भारत वहां दीर्घकालिक साझेदारी विकसित करना चाहता है। वहीं वेनेजुएला भी एशिया में अपने आर्थिक और व्यापारिक संबंधों का विस्तार करने के लिए भारत को एक प्रमुख भागीदार के रूप में देखता है।
वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज की भारत यात्रा ने यह संकेत दिया है कि दोनों देश अपने संबंधों को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के इच्छुक हैं। ऊर्जा, खनिज, फार्मा, ऑटोमोबाइल और कृषि जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाएं मौजूद हैं। इसके साथ ही सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंध भी दोनों देशों को जोड़ते हैं। रोड्रिगेज का आंध्र प्रदेश स्थित Sri Sathya Sai Ashram जाने का कार्यक्रम इसी मानवीय और सांस्कृतिक जुड़ाव का प्रतीक माना जा रहा है।
वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में ऊर्जा सुरक्षा और संसाधनों तक पहुंच किसी भी देश के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत और वेनेजुएला के बीच बढ़ता सहयोग इसी आवश्यकता को दर्शाता है। दोनों देशों के पास एक-दूसरे को देने के लिए बहुत कुछ है। भारत के पास तकनीक, उद्योग, दवा निर्माण और विशाल बाजार है जबकि वेनेजुएला के पास ऊर्जा और खनिज संसाधनों का बड़ा भंडार है। ऐसे में यह साझेदारी आने वाले वर्षों में और अधिक मजबूत हो सकती है।
कुल मिलाकर भारत और वेनेजुएला के संबंध छह दशकों से अधिक पुराने विश्वास, सहयोग और साझा हितों पर आधारित हैं। आज जब दोनों देश ऊर्जा, खनिज और व्यापार के नए अवसरों की तलाश कर रहे हैं तब यह संबंध केवल तेल व्यापार तक सीमित नहीं रह गया है। भविष्य में निवेश, प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य और औद्योगिक सहयोग के नए आयाम दोनों देशों की मित्रता को और सशक्त बना सकते हैं।
कांतिलाल मांडोत
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