अंग्रेजी शासन काल में बना अप्सरा नदी का वाधहुआ जर्जर पर पुल निर्माण की विधायक ने की मांग कोई ठोस कार्रवाई नहीं 

विकासखंड भदपुरा की सबसे प्रमुख समस्या है आश्वासन को कई बार मिला पर कार्यवाही नहीं जनता के हाथ लगी मायुसी

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बरेली/ क्योलड़िया नवाबगंज-क्योलड़िया मार्ग पर अप्सरा नदी स्थित क्योलड़िया डैम के पास पुल निर्माण की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। क्षेत्रीय विधायक और दर्जनों गांव के ग्राम प्रधानों ने उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम और लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को पत्र भेजकर पुल निर्माण की   मांग की है। उन्होंने कहा कि आठ से नौ दशक पुराना जर्जर डैम से ही बड़े वाहनों का आवागमन होता है। जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। यहां डैम के पास सैकड़ों गांवों के आवागमन के लिए पुल निर्माण आवश्यक है। 
 
निवर्तमान मंडल अध्यक्ष शशि कपूर समेत दर्जनों गांवों के प्रधानों ने क्षेत्रीय विधायक डॉ एम पी आर्य को लिखित शिकायत कर अवगत कराया कि क्योलड़िया डैम अंग्रेजी शासनकाल में बनाया गया था और वर्तमान में इसकी स्थिति काफी जर्जर हो चुकी है। इसी डैम से होकर तहसील और ब्लॉक मुख्यालय तक लोगों का आवागमन होता है। 
 
क्षेत्र के खंड विकास कार्यालय, खंड शिक्षा कार्यालय, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, पशु चिकित्सालय, कृषि विभाग, पुलिस स्टेशन, बैंक, विद्यालय और कॉलेज समेत तमाम सरकारी व गैर सरकारी संस्थानों तक पहुंचने के लिए लोग इसी मार्ग का उपयोग करते हैं। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि डैम से बड़े वाहनों का आवागमन संभव नहीं होने के कारण क्षेत्र के विकास पर असर पड़ रहा है। लोगों को 15 से 20 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है,।
 
 जिससे व्यापारियों और ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। कच्चा और पक्का माल लाने-ले जाने में भी दिक्कतें बनी हुई हैं। जनप्रतिनिधियों ने कहा कि पुल निर्माण होने से क्षेत्र के हजारों लोगों को राहत मिलेगी और आवागमन सुगम हो सकेगा। जिस पर विधायक ने राज्य सेतु निगम से पुल निर्माण की मांग करते हुए पत्र दिया। पत्र पर सेतु निगम ने जांच की तो पुल की अधिक लंबाई होने के चलते सेतु निगम ने लोक निर्माण विभाग को स्टीमेट बनाकर भेजने को कहा।
 
ग्रामीणों को आंशका है इस अप्सरा नदी के बांध का निर्माण न होने से किसी दिन बड़ा हदसा होने से इनकार नहीं किया जा सकता क्योंकि किसी बात के ऊपर से स्कूल जाने वाले नन्हे मुन्ने बच्चों को लेकर वहां आते-जाते हैं किसी के ऊपर सेह कर गन्ने से अरे ट्रैक्टर-ट्रॉली ही निकलते हैं एक दशक को विभाग ने इस बांध के ऊपरसे भारी वाहनों का निकलना वर्जित कर दियाथ परंतु अब 10 वर्षों से उसे पुणे खोल दिया गया है। जोकिसी भी समय बड़ी घटना को अंजाम दे सकता है विभाग इस परआंख मीच बैठाहआ है।

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