प्रतापगढ़ में दबंगों का खूनी खेल! घर पर हमला, बच्चों तक को नहीं बख्शा — पुलिस की निष्क्रियता पर बड़े सवाल
खौफ में कैद परिवार, बच्चों की पढ़ाई ठप वीडियो सबूत के बावजूद कार्रवाई नहीं
प्रतापगढ़ | संवाददाता
जनपद प्रतापगढ़ के थाना पट्टी क्षेत्र के ग्राम समोगरा से एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है, जहां दबंगों के कथित आतंक से एक परिवार पिछले दो वर्षों से दहशत में जीने को मजबूर है। पीड़ित पंकज सिंह ने अपने ही पटीदार सर्वेश सिंह, उनकी माता प्रेमा सिंह, तथा पड़ोसी राजेश सिंह और धर्मेश सिंह पर लगातार उत्पीड़न, मारपीट की कोशिश और जान से मारने की धमकी देने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।
पीड़ित के अनुसार, वे करीब 20 वर्षों तक सूरत (गुजरात) में रहकर व्यापार करते थे, लेकिन व्यापार बंद होने के बाद लगभग दो वर्ष पहले अपने पैतृक गांव लौटे। गांव लौटने के बाद से ही विवाद की शुरुआत हुई, जो धीरे-धीरे हिंसक घटनाओं में बदलती चली गई।
रोजाना गाली-गलौज, धमकी और दहशत का माहौल
पंकज सिंह का आरोप है कि विरोधी पक्ष आए दिन उनके घर के सामने गाली-गलौज करते हैं, जान से मारने की धमकी देते हैं और जानबूझकर झगड़े की स्थिति बनाते हैं। इससे पूरे परिवार में लगातार भय का माहौल बना रहता है। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि उनकी पत्नी, जो एक अध्यापिका हैं, को स्कूल जाते समय रास्ते में रोका जाता है, टोका-टाकी की जाती है और उनके साथ अभद्र व्यवहार किया जाता है। वहीं उनके 13 वर्षीय और 9 वर्षीय मासूम बच्चों को भी नहीं छोड़ा गया। आरोप है कि बच्चों को स्कूल बस स्टॉप पर डराया-धमकाया जाता है और कथित तौर पर अवैध हथियार दिखाकर मानसिक रूप से दबाव बनाया जाता है।
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अवैध हथियारों का खुला प्रदर्शन
पीड़ित का कहना है कि आरोपी राजेश सिंह खुलेआम अवैध पिस्टल लेकर घूमता है और कई बार उन्हें दौड़ा भी चुका है। धर्मेश सिंह के पास भी अवैध बंदूक होने की जानकारी दी गई है। इतना ही नहीं, आरोप है कि ये लोग तेज संगीत बजाकर और सोशल मीडिया पर वीडियो डालकर अपने दबदबे का प्रदर्शन करते हैं, जिससे इलाके में डर का माहौल और गहरा होता जा रहा है।
26 अप्रैल का खूनी हमला — घर पर बोला धावा
घटना का सबसे भयावह पहलू 26 अप्रैल 2026 को सामने आया, जब आरोपियों ने अपने परिजनों के साथ मिलकर पीड़ित के घर पर हमला कर दिया। बताया जा रहा है कि लाठी-डंडों, पत्थरों और नुकीले-धारदार हथियारों से लैस होकर ये लोग सीधे दरवाजे पर आ धमके और पूरे परिवार पर हमला बोल दिया। इस हमले में पंकज सिंह और उनके 13 वर्षीय बेटे को चोटें आईं, जबकि पत्नी और 9 वर्षीय छोटे बच्चे पर भी पत्थर और डंडे फेंके गए। किसी तरह सभी ने अपनी जान बचाई।
वीडियो सबूत के बावजूद कार्रवाई नहीं
पीड़ित का कहना है कि उन्होंने समय-समय पर इन घटनाओं के वीडियो सबूत पुलिस को दिए, लेकिन इसके बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस की ओर से भी असंवेदनशील जवाब दिए गए, जैसे—
“असलहे की फोटो लेकर आओ, तब कार्रवाई होगी”
और “धमकी दे रहे हैं, सच में मारेंगे नहीं”
इन बयानों ने पीड़ित परिवार की चिंता और बढ़ा दी है।

खौफ में कैद परिवार, बच्चों की पढ़ाई ठप
लगातार हो रही घटनाओं के कारण पूरा परिवार मानसिक तनाव में है। बच्चे डर के कारण स्कूल नहीं जा पा रहे हैं और पत्नी भी घर से बाहर निकलने में असहज महसूस कर रही हैं।
पीड़ित का कहना है कि अब हालात ऐसे हो गए हैं कि वे अपने ही घर में सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं।
बड़ा सवाल — कब जागेगा प्रशासन?
यह मामला कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। एक तरफ आरोपियों के हौसले बुलंद हैं, वहीं दूसरी ओर पीड़ित परिवार न्याय और सुरक्षा के लिए दर-दर भटक रहा है। पीड़ित ने प्रशासन से मांग की है कि आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, अवैध हथियारों की जांच हो और उनके परिवार को तत्काल सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए।
चेतावनी जैसी अपील
पीड़ित का कहना है कि अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो कभी भी कोई बड़ी और गंभीर घटना घट सकती है।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर मामले में क्या कदम उठाता है और क्या पीड़ित परिवार को न्याय और सुरक्षा मिल पाती है या नहीं।


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