बंगाल में हटाए गए मतदाताओं को झटका, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- अभी मतदान का अधिकार नहीं, न्यायाधिकरण में जाएंi

उन्हें वोट देने की इजाज़त तभी दी जाएगी, जब उनके नाम फाइनल फैसले के बाद वोटर लिस्ट में शामिल किए जाएंगे

Swatantra Prabhat UP Picture
Published On

ब्यूरो प्रयागराज- सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए लोगों को अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि लंबित अपीलों वाले मतदाताओं को फिलहाल मतदान का अधिकार नहीं दिया जा सकता। सीजेआई की अगुवाई वाली पीठ ने उन याचिकाकर्ताओं की मांग खारिज करते हुए उन्हें अपीलीय न्यायाधिकरणों के पास जाने का निर्देश दिया, जिनके नाम एसआईआर अभियान में हटाए गए थे और जिनकी अपीलें अभी अपीलीय न्यायाधिकरणों में लंबित हैं।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने कहा कि अंतरिम राहत देना असंभव है, क्योंकि इससे चुनावी प्रक्रिया प्रभावित होगी। पीठ ने कहा कि जिन लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं और जिनकी अपील अपीलीय न्यायाधिकरणों में सुनवाई के लिए पेंडिंग हैं, उन्हें वोट देने की इजाज़त तभी दी जाएगी, जब उनके नाम फाइनल फैसले के बाद वोटर लिस्ट में शामिल किए जाएंगे।

सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी 13 लोगों के एक समूह द्वारा दायर याचिका पर आई, जिसमें मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के खिलाफ हस्तक्षेप की मांग की गई थी। पीठ ने याचिका को 'समय से पहले' बताते हुए खारिज कर दिया और याचिकाकर्ताओं को अपीलीय न्यायाधिकरणों में ही राहत मांगने की सलाह दी। पीठ ने अपने आदेश में कहा चूंकि याचिकाकर्ता (कुरैशा यास्मीन और अन्य) पहले ही अपीलीय न्यायाधिकरणों से संपर्क कर चुके हैं, इसलिए याचिका में व्यक्त आशंकाएं समय से पहले हैं। अगर याचिका स्वीकार कर ली जाती है, तो इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। हालांकि, अदालत ने यह भी कहा कि उसने याचिका के गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त नहीं की है।

याचिका में आरोप लगाया गया था कि निर्वाचन आयोग ने उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना मनमाने ढंग से नाम हटाए हैं, और इसके खिलाफ दायर अपील पर समय पर सुनवाई नहीं की जा रही। चुनाव आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ वकील डीएस नायडू ने बताया कि लगभग 30 से 34 लाख अपीलें अभी लंबित हैं। याचिकाकर्ताओं के वकील ने कहा कि अगर बहस करने की अनुमति ही नहीं दी जाती तो अपीलों का क्या फायदा? क्या इनका फैसला तय समयसीमा में होगा या इन्हें लगातार टाला जाएगा?

बेमौसम बारिश और आंधी से किसानों की बढ़ी चिंता, गेहूं की फसल को नुकसान Read More बेमौसम बारिश और आंधी से किसानों की बढ़ी चिंता, गेहूं की फसल को नुकसान

सुनवाई के दौरान टीएमसी के वरिष्ठ नेता कल्याण बनर्जी ने पीठ को बताया कि कम से कम 16 लाख अपीलें दायर की गई हैं। उन्होंने आग्रह किया कि इन लोगों को आगामी दो चरणों के विधानसभा चुनाव में वोट डालने की अनुमति दी जाए। इस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि यह बिल्कुल असंभव है। अगर हम ऐसा करते हैं, तो संबंधित व्यक्तियों के मतदान अधिकार निलंबित करने पड़ेंगे।

शिक्षा का 'बाजार' या 'संस्कार'—दोषी कौन? व्यवस्था, समाज या मानसिकता? Read More शिक्षा का 'बाजार' या 'संस्कार'—दोषी कौन? व्यवस्था, समाज या मानसिकता?

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि न्यायिक अधिकारियों ने 9 अप्रैल तक फैसला पूरा कर लिया है- भले ही उन्होंने 1-2 दिन ज़्यादा लगा दिए हों, मैंने उन्हें (आगे के दावों पर फैसला करने के लिए) इजाज़त दे दी है। 153 चुनाव क्षेत्र हैं- 7-8 चुनाव क्षेत्रों का कुछ हिस्सा अलग था- जो नाम छूट गए थे, उन्हें 23 अप्रैल के चुनावों की लिस्ट में जोड़ दिया जाएगा। चिंता न करें, अगर उनके नाम हैं, तो वे वोटिंग करेंगे।

सिद्धार्थनगर में 120 फिट ऊंचे टावर पर  चढ़ा युवक, प्रेमिका से शादी करने के जिद पर , 2 घंटे चला हाई वोल्टेज ड्रामा Read More सिद्धार्थनगर में 120 फिट ऊंचे टावर पर  चढ़ा युवक, प्रेमिका से शादी करने के जिद पर , 2 घंटे चला हाई वोल्टेज ड्रामा

इस पर, कल्याण बनर्जी ने कहा कि शामिल करने के लिए (अपीलेट ट्रिब्यूनल में) 16 लाख अपीलें फाइल की गई हैं और पूछा कि उन सभी दावों पर फैसला करना कैसे मुमकिन होगा। इस पर सीजेआई ने कहा कि अगर यही हालात है, जैसा पिटीशनर्स बता रहे हैं, तो कोर्ट को क्या करना चाहिए? सीजेआई ने कहा, “जिन्हें इजाज़त दी गई है, क्या हमें उन शामिल किए गए नामों पर भी रोक लगा देनी चाहिए।” सीजेआई ने जोर देकर कहा कि अगर पिटीशनर्स एसआईआर प्रक्रिया पर आपत्ति जताते रहेंगे, तो चुनाव कैसे होंगे।

About The Author

Post Comments

Comments