विकराल ज्वालामुखी बन सकता है मजदूर आंदोलन की चिंगारी 

भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर रोक लग सके और औद्योगिक माहौल स्थिर बना रहे

Swatantra Prabhat UP Picture
Published On

मनोज कुमार अग्रवाल 

उत्तर प्रदेश सरकार ने न्यूनतम वेतन दरों में संशोधन को मंजूरी दे दी है। नोएडा में कर्मचारियों के उग्र प्रदर्शन के बाद योगी सरकार ने यह फैसला लिया है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार ये नई अंतरिम दरें 1 अप्रैल से लागू कर दी गई हैं। नोएडा में 13 अप्रैल को हुए श्रमिकों के विरोध-प्रदर्शन के बाद आज पूरे दिल्ली-एनसीआर में हाई अलर्ट है।मजदूरों के गुस्से को देख कर सरकार आनफुट आ गयी है। केंद्र सरकार मामले की मानिटरिंग कर रही है वहीं यूपी हरियाणा राजस्थान की प्रदेश सरकारें अपने अपने स्तर पर मजदूरों के आंदोलन के शमन और मजदूरों को भड़काने वाले लोगों की पहचान करने में लगे हुए हैं। सरकार का मानना है कि यह समिति संवाद और आपसी सहमति के जरिए विवादों को सुलझाएगी, जिससे भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर रोक लग सके और औद्योगिक माहौल स्थिर बना रहे।

उत्तर प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में वेतन बढ़ोत्तरी समेत सामाजिक सुरक्षा के कई बिंदुओं को लेकर मजदूरों के आंदोलनों व उग्र प्रदर्शनों ने केंद्र तक को सतर्क कर दिया है। दरअसल, हरियाणा से शुरू हुई आग उत्तर प्रदेश पहुंच चुकी है। हरियाणा से सटे राजस्थान के इक्के दुक्के स्थानों पर छिटपुट घटना होकर फिलहाल शांत है।  पता हो कि दिल्ली से सटे नोएडा औद्योगिक क्षेत्र में मजदूरों का गुस्सा अब एक शहर तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे दिल्ली-एनसीआर में फैला हुआ एक बड़े आंदोलन का रूप ले चुका है. वेतन वृद्धि, महंगाई और श्रम सुविधाओं को लेकर शुरू हुआ यह विरोध अब कई जिलों में असर दिखा रहा है.

नोएडा में चल रहे इस आंदोलन की शुरुआत 7 अप्रैल को गुरुग्राम के मानेसर इलाके से हुई थी, जहां मजदूरों ने अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन शुरू किया था.इसके बाद यह विरोध धीरे-धीरे नोएडा और फिर ग्रेटर नोएडा पहुंचा. अब इस आंदोलन का असर गाजियाबाद, बुलंदशहर और हापुड़ तक में भी दिखाई दे रहा है. आज बड़ी संख्या में बुलंदशहर और गाजियाबाद में श्रमिकों ने प्रदर्शन किया और सड़कों को जाम कर दिया. गाजियाबाद में स्थिति इतनी खराब हो गई कि नोएडा-गाजियाबाद बॉर्डर पर कई किलोमीटर लंबा जाम लग गया.

जान लीजिए नोएडा में यह आंदोलन 9 अप्रैल को फेस-टू थाना क्षेत्र में मौजूद होजरी कंपलेक्स से शुरू हुआ. जहां गारमेंट और होजरी यूनिट्स में काम करने वाले मजदूर फैक्ट्रियों के बाहर इकट्ठा हुए. वो वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर धरने पर बैठ गए. शुरुआत में यह प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण था. मजदूरों ने नारेबाजी और बातचीत के जरिए अपनी बात रखने की कोशिश कीअप्रैल से लेकर 11 अप्रैल तक आंदोलन बिना किसी हिंसा के चलता रहा. हालांकि, मजदूरों का कहना था कि उनकी मांगों पर कंपनियों और प्रशासन की ओर से कोई ठोस जवाब नहीं दिया जा रहा, जिससे उनके बीच असंतोष लगातार बढ़ता गया.

मजदूरों के आंदोलन की स्थिति ने 12 अप्रैल को बड़ा मोड़ लिया. ग्रेटर नोएडा के इकोटेक थर्ड इलाके में प्रदर्शन के दौरान मिंडा कंपनी के पास हालात अचानक बिगड़ गए. इस दौरान पुलिस कार्रवाई में गोली चलने की घटना सामने आई, जिसमें एक महिला मजदूर को गोली लग गई.यह घटना पूरे आंदोलन के लिए टर्निंग प्वाइंट साबित हुई. जैसे ही गोलीकांड की खबर फैली, मजदूरों में भारी आक्रोश फैल गया और आंदोलन ने उग्र रूप ले लिया.अगले ही दिन 13 अप्रैल यानी सोमवार की सुबह नोएडा के फेस-2, सेक्टर-62 और एनएच-9 जैसे प्रमुख इलाकों में हजारों मजदूर सड़कों पर उतर आए. इससे यातायात पूरी तरह ठप हो गया. प्रदर्शनकारियों ने सड़कें जाम कर दी. डिवाइडर पर चढ़कर नारेबाजी की. कई जगह वाहनों को रोक दिया. इस दौरान हालात तेजी से बिगड़े और कई जगह तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाएं सामने आईं.

नोएडा के फेस-2 इलाके में कई वाहनों को नुकसान पहुंचाया गया. इससे पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया. पुलिस और मजदूर आमने-सामने आ गए. स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले दागने पड़े. भारी पुलिस बल की तैनाती के बाद किसी तरह हालात को काबू में लाया गया, लेकिन तनाव अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. इस आंदोलन का सीधा असर नोएडा और ग्रेटर नोएडा के औद्योगिक ढांचे पर पड़ा. फेस-2 के होजरी कंपलेक्स में करीब 500 कंपनियां संचालित होती हैं. वहीं, इकोटेक थर्ड के औद्योगिक क्षेत्र में भी करीब 400 से अधिक फैक्ट्रियां और निजी कंपनियां हैं. इनमें सैकड़ों की संख्या में मजदूर काम करते हैं. दोनों प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में उत्पादन प्रभावित हुआ और कई कंपनियों को अस्थायी रूप से काम बंद करना पड़ा.

यह आंदोलन किसी एक कंपनी के खिलाफ नहीं, बल्कि कई कंपनियों के मजदूरों का सामूहिक विरोध है. अब इसका असर पूरे एनसीआर में दिखने लगा है. गाजियाबाद, बुलंदशहर और हापुड़ जैसे जिलों में भी मजदूर सक्रिय हो गए हैं, जिससे आने वाले दिनों में आंदोलन और व्यापक होने की आशंका है. मजदूरों की प्रमुख मांगों में न्यूनतम वेतन बढ़ाकर 26,000 रुपये प्रति माह करना, ओवरटाइम का भुगतान दोगुनी दर से करना, साप्ताहिक अवकाश सुनिश्चित करना, समय पर वेतन भुगतान, सैलरी स्लिप देना और बोनस को सीधे बैंक खाते में समय पर भेजना शामिल है. उनका कहना है कि महंगाई के इस दौर में मौजूदा वेतन से गुजारा संभव नहीं है.

प्रदर्शन के दौरान नोएडा-गाजियाबाद बॉर्डर पर कई किलोमीटर लंबा जाम लग गया, जिससे ट्रैफिक पुलिस को मोर्चा संभालना पड़ा. यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा और कई जगह एंबुलेंस फंसने की घटनाएं भी सामने आईं.
आपको बता दें राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में न्यूनतम वेतन देश में सबसे अधिक है और लपटें यहां तक नहीं पहुंची हैं, लेकिन गर्माती राजनीति में कुछ भी असंभव नहीं माना जा रहा है। ऐसे में भाजपा के लिए परेशानी बढ़ेगी क्योंकि ये चारो राज्य भाजपा शासित हैं।

ऐसे में अगर जरूरत महसूस हुई तो औपचारिक अनौपचारिक रूप से केंद्रीय स्तर पर इन राज्यों की बैठकें कर स्थिति को संभालने की कोशिश होगी। उद्योगों को भी साथ लेकर चलने की जरूरत है और मजदूरों का ध्यान रखने की भी। मजदूरों की सामाजिक सुरक्षा में कोई कमी नहीं होनी चाहिए लेकिन उद्योगों की भी सुरक्षा होनी चाहिए।पिछले कुछ दिनों से उत्तर प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में जिस तरह आग फैली है उसमें राजनीतिक मंशा देखी जा रही है क्योंकि अगले साल की शुरूआत में ही वहां चुनाव है। राजस्थान में भी न्यूनतम वेतन अपेक्षाकृत कम है लेकिन वहां भिवाड़ी के अलावा किसी स्थान पर कोई घटना नहीं हुई और अब शांत है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर राज्य सरकार ने एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। इस कमेटी का मुख्य उद्देश्य मजदूरों के हितों की सुरक्षा के साथ-साथ औद्योगिक क्षेत्रों में शांति और संतुलन बनाए रखना है। इनको सौंपी गई समिति की कमान गठित समिति की कमान औद्योगिक विकास आयुक्त को सौंपी गई है। इसके अलावा अपर मुख्य सचिव (एमएसएमई) और प्रमुख सचिव, श्रम एवं सेवायोजन को भी इसमें सदस्य बनाया गया है। खास बात यह है कि समिति में श्रमिक संगठनों के पांच प्रतिनिधियों और उद्योग संगठनों के तीन प्रतिनिधियों को शामिल कर सभी पक्षों की भागीदारी सुनिश्चित की गई है।सरकार की प्राथमिकता मजदूरों के असंतोष को दबाने कम करने और विपक्ष राजनीतिक लाभ के लिए उकसाने मे नाकाम करने की है इसके लिए सरकार मजदूरों के हित मे हर कदम उठाने को तैयार है।

About The Author

Post Comments

Comments