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तीसरे प्रयास में मिली सफलता, अब गांवों के विकास पर फोकस, यूपीपीसीएस टॉपर अभिलाषा शर्मा
ग्रामीण क्षेत्रों में योजनाओं के सही क्रियान्वयन की कमी से लोगों को जो समस्याएं होती हैं, उन्हें दूर करना उनकी प्राथमिकता और महिलाओं की शिक्षा और सशक्तिकरण पर विशेष जोर
ओबरा /सोनभद्र-
उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPCS) के हालिया घोषित परिणाम में जनपद सोनभद्र के ओबरा नगर की निवासी अभिलाषा शर्मा (उर्फ प्रिया शर्मा) ने 14वीं रैंक प्राप्त कर खंड विकास अधिकारी (BDO) पद पर चयन हासिल किया है। परिणाम जारी होने के बाद उनसे की गई विशेष बातचीत में उनकी सफलता के पीछे का संघर्ष, पारिवारिक सहयोग और भविष्य की सोच सामने आई।
अभिलाषा शर्मा एक साधारण परिवार से आती हैं। उनके दादा स्वर्गीय अंगद शर्मा एवं दादी स्वर्गीय मनरा देवी रहे । उनके पिता अवधेश शर्मा ओबरा स्थित हाइडिल विभाग में बड़े बाबू के पद पर कार्यरत हैं, जबकि माता शशि शर्मा गृहिणी हैं। परिवार में चार संतानों में वह एकमात्र बेटी हैं उनके तीन भाई हसदेव शर्मा, सत्य प्रकाश शर्मा और ऋषभ शर्मा हैं।
अभिलाषा ने बताया कि यह सफलता उन्हें तीसरे प्रयास में मिली है। उन्होंने अपनी प्रारंभिक तकनीकी शिक्षा पॉलिटेक्निक (इलेक्ट्रिकल ट्रेड) से पूरी की। इसी दौरान कौशांबी के तत्कालीन जिलाधिकारी मनीष वर्मा द्वारा कॉलेज में आयोजित संवाद कार्यक्रम ने उनके जीवन की दिशा बदल दी।जब उन्होंने कहा कि छात्राएं प्रशासनिक सेवाओं में क्यों नहीं आ रहीं, तो वह बात मेरे मन में बैठ गई।
इसके बाद उन्होंने प्रयागराज में रहकर तैयारी शुरू की और लगातार मेहनत जारी रखी। उन्होंने बताया कि दो प्रयासों में असफलता के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी। इस दौरान परिवार की ओर से विवाह का दबाव भी आया, लेकिन उन्होंने स्पष्ट रूप से अपनी प्राथमिकता पढ़ाई को बताया और परिवार ने उनका पूरा साथ दिया।
रिजल्ट वाले दिन का अनुभव साझा करते हुए उन्होंने बताया कि सबसे पहले उनके पिता ने परिणाम देखा। इसके बाद परिचितों और मित्रों के संदेश आने लगे। रात करीब 3 बजे जब मैंने फोन देखा, तब मुझे खुद विश्वास हुआ कि मैं सफल हो गई हूं।
अभिलाषा शर्मा ने बताया कि उनका लक्ष्य प्रशासनिक सेवा में जाकर जिला कलेक्टर बनने का था, हालांकि वर्तमान में खंड विकास अधिकारी के रूप में चयन को वह एक महत्वपूर्ण अवसर के रूप में देखती हैं।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में योजनाओं के सही क्रियान्वयन की कमी से लोगों को जो समस्याएं होती हैं, उन्हें दूर करना उनकी प्राथमिकता होगी। साथ ही महिलाओं की शिक्षा और सशक्तिकरण के लिए विशेष रूप से कार्य करने की इच्छा व्यक्त की।
उनकी इस सफलता को क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह उपलब्धि यह साबित करती है कि यदि लगन और जज्बा हो, तो किसी भी पृष्ठभूमि से आकर बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है।
अभिलाषा शर्मा की कहानी न केवल सोनभद्र बल्कि उन सभी युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का साहस रखते हैं।


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