लालगंज पुलिस को खुली चुनौती दे रहा सस्पेंड सफाईकर्मी और बहरूपिए 'प्रधान' का खूनी खेल

पत्रकार को मरा समझ कर भागे थे दरिंदे

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बस्ती। बस्ती जिले के थाना लालगंज पुलिस की कर शैली पर उठ रहे सवाल अपराधियों में नहीं डर सता रहा पुलिस का कानून का इकबाल खत्म हो चुका है और खाकी का खौफ अब केवल कागजों तक सीमित रह गया है। लालगंज थाना क्षेत्र में एक सफेदपोश अपराधी और खुद को 'प्रधान' बताने वाले बहरूपिए रमेश चौधरी ने अपने गुर्गों के साथ मिलकर पत्रकारिता के चौथे स्तंभ को लहूलुहान कर दिया। यह हमला इतना वीभत्स था कि दरिंदों ने पत्रकार को तब तक मारा जब तक वह शांत नहीं हो गया और उसे 'लाश' समझकर मौके से फरार हो गए।
 
​फर्जी झंडी और रसूख के पीछे छिपा है 'गंदा' सच
​आरोपी रमेश चौधरी इलाके का वह शातिर बहरूपिया है जो भाजपा नेताओं के साथ फोटो खिंचवाकर और अपनी गाड़ी पर सत्ता की फर्जी झंडी लगाकर अपनी 'गुंडागर्दी' को ढकता है। सत्ता के गलियारों में अपनी झूठी पैठ दिखाकर यह अपराधी न केवल आम जनता को डराता है, बल्कि अब पुलिस की नाक के नीचे जानलेवा हमलों को अंजाम दे रहा है​सस्पेंड सफाईकर्मी 'भोलू' के साथ मिलकर रची खूनी साजिश​जांच में जो सबसे 'गंदा' और घिनौना सच निकलकर सामने आया है, वह है भोलू उर्फ शेषराम की संलिप्तता।
 
यह सस्पेंड सफाईकर्मी, जो पहले से ही अपने काले कारनामों के कारण निलंबित चल रहा है, इस पूरी खूनी साजिश का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। सीडीआर (CDR) के खुलासे ने साफ कर दिया है कि घटना के वक्त भोलू और हमलावर रमेश चौधरी के बीच फोन पर लगातार बातचीत हो रही थी।
 
​सत्ता की हनक या पुलिस की लाचारी?​मुकदमा दर्ज होने के बावजूद मुख्य आरोपी रमेश चौधरी अपने भाइयों और भांजे के साथ खुलेआम घूम रहा है। आखिर लालगंज पुलिस के हाथ क्यों कांप रहे हैं? क्या नेताओं के साथ खिंचवाई गई फर्जी फोटो इतनी प्रभावशाली है कि एक पत्रकार की जान लेने की कोशिश करने वाले अपराधी को गिरफ्तार नहीं किया जा रहा?
 
​अपराधियों का 'कॉम्बिनेशन': एक सस्पेंड कर्मी और एक फर्जी प्रधान
​क्षेत्र में चर्चा है कि यह सस्पेंड सफाईकर्मी और फर्जी प्रधान का 'गठबंधन' पूरे इलाके में आतंक का पर्याय बना हुआ है। भ्रष्टाचार और अवैध कार्यों की खबरों से बौखलाए इन गुंडों ने पत्रकार को रास्ते से हटाने का जो प्रयास किया, उसने पुलिस प्रशासन की मुस्तैदी पर गहरा दाग लगा दिया है।
 
​मुख्य बिंदु जो अखबार में हाइलाइट होंगे:
​सीडीआर का बड़ा खुलासा: सस्पेंड सफाईकर्मी भोलू की पल-पल की लोकेशन और कॉल डिटेल्स ने खोली पोल।​बहरूपिया प्रधान: फर्जी पहचान और सत्ता की धौंस के दम पर पत्रकार पर कातिलाना हमला।​पुलिस की चुप्पी: नामजद मुकदमा होने के बाद भी गिरफ्त से दूर हैं 'सफेदपोश' अपराधी।

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