धार्मिक आजादी को लेकर संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन के लिए केन्द्र सरकार है जिम्मेदार- प्रमोद तिवारी

देश में धार्मिक स्वतंत्रता पर सीधा प्रहार किया जा रहा है।

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लालगंज-प्रतापगढ़। राज्यसभा में विपक्ष के उपनेता प्रमोद तिवारी ने देश में धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर अमेरिकी अर्न्तराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग वर्ष 2026 की रिपोर्ट को गंभीर चिंता का विषय करार दिया है। उन्होने आयोग की सलाना रिपोर्ट के हवाले से यह दावा जताया है कि इसमें खुफिया एजेंसी रॉ तथा भाजपा के मातृ संगठन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के द्वारा अर्न्तराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग में हस्तक्षेप किये जाने की पुष्टि की गयी है। उन्होने कहा कि इस रिपोर्ट से यह स्पष्ट हो गया है कि बीजेपी के मातृ संगठन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ व खुफिया एजेंसी रिसर्च एण्ड एनालिसिस विंग के द्वारा देश में धार्मिक स्वतंत्रता पर सीधा प्रहार किया जा रहा है।
 
सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि अर्न्तराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग के द्वारा आरएसएस और रॉ पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की गयी है।उन्होने कहा कि भारत एक धर्म निरपेक्ष राष्ट्र है ऐसे में आयोग की यह सालाना रिपोर्ट विदेशों में भी देश की छवि को धूमिल बना गयी है। उन्होने यह भी कहा कि इस रिपोर्ट को लेकर देश के अधिकतर राजनैतिक दलों ने भी ताजा चिन्ता व्यक्त की है।  उन्होने कहा कि अर्न्तराष्ट्रीय स्तर पर आयोग की रिपोर्ट से यह साफ हो गया है कि भारत के संविधान में सभी धर्मो को मानने वाले लोगों को प्रदत्त अधिकार का खुला उल्लंघन हो रहा है। सांसद प्रमोद तिवारी का बयान मंगलवार को यहां मीडिया प्रभारी ज्ञानप्रकाश शुक्ल के हवाले से निर्गत हुआ है।

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