बिजली के तारों पर बिछा डिश-फाइबर का जाल, बड़े हादसों को दे रहा है दावत

जिम्मेदार मौन, लोगों ने किया कार्रवाई की मांग

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अजित सिंह /राजेश तिवारी ( ब्यूरो रिपोर्ट) 

ओबरा/सोनभद्र-

 नगर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली के खंभों पर डिश और फाइबर इंटरनेट के तारों का मकड़जाल किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है। सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर निजी संचालकों द्वारा खींचे गए ये तार न केवल आम जनता के लिए खतरा बने हुए हैं, बल्कि बिजली विभाग के कर्मचारियों के लिए भी बड़ी मुसीबत साबित हो रहे हैं। क्षेत्र में डिश और इंटरनेट फाइबर के संचालक अपने तारों को 11 KV और 33 KV जैसी हाई-टेंशन लाइनों के ऊपर या बेहद करीब से गुजार रहे हैं।

स्थिति यह है कि ये फाइबर तार अक्सर बिजली की जीवित लाइनों के संपर्क में रहते हैं। तकनीकी जानकारों का कहना है कि यदि कभी तेज हवा या शॉर्ट सर्किट के कारण इन तारों में हाई-वोल्टेज करंट उतरा, तो वह सीधे लोगों के घरों तक पहुँच जाएगा। इससे घरों में लगे उपकरण जल सकते हैं और जान-माल की भारी क्षति हो सकती है। इस अव्यवस्था की सबसे बड़ी मार बिजली विभाग के संविदा कर्मचारियों पर पड़ रही है।

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खंभों पर डिश और फाइबर के तारों को इस तरह बेतरतीब तरीके से लपेटा गया है कि फाल्ट होने की स्थिति में कर्मचारियों का खंभे पर चढ़ना दूभर हो जाता है। तारों के जाल में उलझकर गिरना या करंट की चपेट में आना उनके लिए रोज की चुनौती बन गया है। इसके बावजूद, अपनी ड्यूटी निभाते हुए ये कर्मचारी जान जोखिम में डालकर काम करने को मजबूर हैं। क्षेत्र के प्रबुद्ध नागरिकों और बुद्धिजीवियों ने बिजली विभाग के उच्चाधिकारियों का ध्यान इस ओर आकृष्ट कराया है। उनका कहना है कि जीवित बिजली लाइनों पर लिपटे अवैध तारों को तत्काल हटाया जाए। नियम विरुद्ध तार बिछाने वाले संचालकों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।

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घनी आबादी वाले क्षेत्रों में विशेष मॉनिटरिंग की जाए ताकि किसी अप्रिय घटना को रोका जा सके। जानकारों का स्पष्ट कहना है कि यदि भविष्य में इन अवैध तारों की वजह से कोई बड़ी दुर्घटना या जनहानि होती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित डिश और फाइबर संचालकों की होगी।

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