केवल नाम का 'आदर्श गांव'! 2023-24 में 40 लाख स्वीकृत गांव सभा में लेकिन आज तक कार्य अधूरा, ज़मीनी विकास शून्य

दरगारबंद जीपी के अंतर्गत आदर्श कृष्णनगर में ग्रामीणों का आक्रोश, जिला प्रशासन अधिकारी मौन भूमिका में ! प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग

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सरकार द्वारा ‘आदर्श गांव’ योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे, शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता, डिजिटल सेवाओं और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बड़ी धनराशि आवंटित की जाती है। लेकिन श्रीभुमि जिला के दरगारबंद ग्राम पंचायत अंतर्गत आदर्श कृष्णनगर और छनटिला गांवों में विकास कार्यों को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।ग्रामीणों के अनुसार, वर्ष 2023–24 में 40 लाख रुपये की परियोजना स्वीकृत हुई थी गांव सभा के माध्यम से, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्य ज़मीन पर दिखाई नहीं दिया। इससे गांववासियों में भारी असंतोष व्याप्त है।
 
बुनियादी सुविधाओं का अभाव सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार एक आदर्श गांव में निम्नलिखित सुविधाएँ अपेक्षित हैं: सीसी सड़कें, उन्नत जल निकासी प्रणाली, सौर अथवा विद्युत स्ट्रीट लाइट शुद्ध पेयजल (PHE के माध्यम से) सार्वभौमिक शौचालय सुविधा तेज़ इंटरनेट कनेक्टिविटी ग्रामीणों का दावा है कि इनमें से अधिकांश सुविधाएँ कागज़ों तक ही सीमित हैं। स्वास्थ्य और स्वच्छता पर प्रश्न कई घरों में शौचालय नहीं हैं। नियमित कचरा संग्रहण की व्यवस्था नहीं है और स्थायी स्वास्थ्य केंद्र भी स्थापित नहीं किया गया है। इससे ग्रामीणों को दैनिक जीवन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
 
शिक्षा व्यवस्था प्रभावित कृष्णनगर में स्थित 155 नंबर निशिकांत एलपी स्कूल अब संचालित नहीं है, सरकार की तरफ से इसे बंद कर दिया गया है , जिससे बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो रही है। गांव में न तो आधुनिक विद्यालय है, न पुस्तकालय, न डिजिटल लैब और न ही कोई सक्रिय डिजिटल सेवा केंद्र।
 
आर्थिक और सामाजिक विकास ठप
कुटीर उद्योग, लघु उद्यम, आधुनिक कृषि प्रशिक्षण जैसी योजनाओं का भी कोई स्पष्ट प्रभाव दिखाई नहीं देता। स्थानीय बाजार व्यवस्था का विकास भी नगण्य बताया जा रहा है। खेल मैदान, सामुदायिक केंद्र और जल संरक्षण जैसे कार्य भी अधूरे हैं।
 
प्रशासन की प्रतिक्रिया
इस संबंध में जब विभागीय अधिकारियों और बीडीओ से संपर्क किया गया, तो बताया गया कि वर्ष 2023–24 के 40 लाख रुपये अभी तक प्राप्त नहीं हुए हैं। प्रशासन की इस स्थिति से ग्रामीणों में और असंतोष बढ़ गया है। ग्रामीणों ने भारत के लोकप्रिय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा से मामले में हस्तक्षेप कर शीघ्र जांच और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की है। ग्रामीणों का सीधा सवाल है स्वीकृत 40 लाख रुपये कहां गए! विकास कार्य अब तक शुरू क्यों नहीं हुए! अब देखना यह है कि ‘आदर्श गांव’ की संकल्पना कागज़ों तक सीमित रहेगी या वास्तव में आदर्श कृष्णनगर और छनटिला में बदलाव की नई शुरुआत होगी।
 
अब असली प्रश्न यही है—क्या ‘आदर्श गांव’ केवल सरकारी फाइलों और घोषणाओं तक सीमित रहेगा, या आदर्श कृष्णनगर और छनटिला में विकास की ठोस और पारदर्शी पहल वास्तव में दिखाई देगी? यदि आवंटित धनराशि का सही उपयोग हो, योजनाओं का समयबद्ध क्रियान्वयन हो और प्रशासन जवाबदेही के साथ आगे आए, तो सड़क, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता और डिजिटल सुविधाओं जैसे मूलभूत क्षेत्रों में सकारात्मक परिवर्तन संभव है। लेकिन यदि निगरानी और पारदर्शिता का अभाव बना रहा, तो “आदर्श” शब्द केवल नाम मात्र बनकर रह जाएगा। अब ग्रामीणों की निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई, जांच प्रक्रिया और विकास कार्यों की वास्तविक शुरुआत पर टिकी हैं यही तय करेगा कि यह संकल्पना प्रतीकात्मक रहेगी या परिवर्तनकारी।

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