विगत 20 वर्षों से ध्वस्त पड़ी आर.ई.ओ. सड़क का पुनर्निर्माण नहीं किये जाने पर बढ़ा ग्रामीणों का रोष
तत्कालीन बी.डी.ओ. के आश्वासन के बाद भी विभागीय निर्माण की नहीं मिली स्वीकृति
पाकुड़िया, पाकुड़, झारखण्ड:- अच्छी चम-चमाती सड़कें केवल प्रगति का दर्पण ही नहीं होतीं, सड़कें इन दिनों ग्रामीण स्वावलम्बन का मार्ग भी प्रशस्त करती दिख रही हैं। बताया जाता है कि उक्त तालवा–चांदना आर.ई.ओ. सड़क बीस साल पूर्व राज्य के केन्द्रीय मंत्री स्वर्गीय देवीधन बेसरा ने नये सिरे से आर.ई.ओ. विभाग से स्वीकृति दिलाकर क्षेत्र के लोगों को आवागमन की सुविधा उपलब्ध कराई थी।
परन्तु विगत कई वर्षों से उक्त पथ अत्यधिक जर्जर व ध्वस्त होने के पश्चात भी न तो सांसद, विधायक और न ही आर.ई.ओ. विभाग के कार्यपालक अभियंता ने उक्त महत्वपूर्ण जीर्ण तालवा स्थित सिदो–कान्हू मोड़ पाकुड़िया–पाकुड़ पी.डब्ल्यू.डी. मुख्य पथ से चांदना ग्राम तक ध्वस्त सड़क के पुनर्निर्माण को गम्भीरता से लिया। फलस्वरूप इन दिनों ग्रामीणों विशेष रूप से महिलाओं एवं छात्र–छात्राओं की नाराजगी बढ़ती देखी जा रही है।
पिछले दिनों इन ग्रामीण इलाकों के लोगों, विशेषकर शिक्षित युवक व महिलाओं विद्यार्थियों ने जर्जर व अत्यधिक
ध्वस्त नुकीले बिखरे स्टोन पथ की महत्ता के संदर्भ में बताया कि यह पथ पाकुड़िया प्रखण्ड के अलावा महेशपुर के कई गांवों के लोगों के लिए आवागमन का मुख्य माध्यम है और बड़े पैमाने पर प्रत्येक दिन सभी मौसमों में उपयोग में लाया जाता रहा है। लेकिन पाकुड़िया प्रखण्ड के विभिन्न क्षेत्रों की सड़कों का पुनर्निर्माण किया गया, वहीं सर्वाधिक जीर्ण तालवा–चांदना महत्वपूर्ण सड़क का पुनर्निर्माण नहीं किये जाने पर ग्रामीणों में गहरा रोष है।
ग्रामीणों ने जोर देकर पूरे दावे के साथ कहा कि कई वर्ष पूर्व इस जीर्ण सड़क निर्माण के लिए कई ग्रामों के लोगों ने पाकुड़िया–पाकुड़ पी.डब्ल्यू.डी. रोड पर धरना देकर जाम कर दिया था, जिससे सड़क जाम हो गई थी। तब तत्कालीन प्रखण्ड विकास पदाधिकारी समीर अल्फ्रेड मुर्मू ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया था कि शीघ्र ही उक्त जीर्ण सड़क निर्माण हेतु उच्चाधिकारियों से संपर्क कर पुनर्निर्माण कराने का प्रयास करेंगे। लेकिन वर्षों बाद भी पथ निर्माण की स्वीकृति नहीं मिलने से ग्रामीणों में गहरी नाराजगी देखी जा रही है।

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