सेफ सिटी परियोजना की 'तीसरी आंख' बंद

भुगतान विवाद में 1,000 AI-सक्षम कैमरों की लाइव फीड और रिकॉर्डिंग ठप

Sachin Bajpai Picture
Published On

लखनऊ सेफ सिटी परियोजना के तहत शहर पर नजर रखने वाले 1,000 आधुनिक सर्विलांस कैमरों की लाइव वीडियो फुटेज और रिकॉर्डिंग भुगतान के विवाद में पूरी तरह से बंद

लखनऊ, — राजधानी लखनऊ की महिलाओं की सुरक्षा और अपराध नियंत्रण के लिए शुरू की गई महत्वाकांक्षी सेफ सिटी परियोजना को बड़ा झटका लगा है। शहर भर में लगे लगभग 1,000 आधुनिक सर्विलांस कैमरों की लाइव वीडियो फुटेज और रिकॉर्डिंग पूरी तरह से बंद हो गई है। यह व्यवस्था भुगतान को लेकर लंबे समय से चले आ रहे विवाद के कारण ठप हो गई है।

प्रोजेक्ट की पृष्ठभूमि और महत्व

लखनऊ सेफ सिटी परियोजना केंद्र सरकार की 'निरभया फंड' और उत्तर प्रदेश सरकार के सहयोग से चलाई जा रही है, जिसकी कुल लागत करीब 195 करोड़ रुपये है। इसमें AI-सक्षम स्मार्ट कैमरे, इंटीग्रेटेड स्मार्ट कंट्रोल रूम, पिंक बसें, पिंक बूथ, स्ट्रीट लाइटिंग और महिलाओं की सुरक्षा से जुड़ी अन्य सुविधाएं शामिल हैं। परियोजना के तहत शहर के प्रमुख इलाकों, चौराहों, बाजारों, बस स्टैंडों, रेलवे स्टेशनों और संवेदनशील स्थानों पर लगभग 1,000 से अधिक कैमरे (कुछ रिपोर्टों में 1,061 तक) लगाए गए हैं, जिनमें से अधिकांश AI-आधारित हैं। ये कैमरे झगड़े, उत्पीड़न, दुर्घटना, सार्वजनिक धूम्रपान/शराब पीने जैसी गतिविधियों का स्वचालित पता लगाकर तुरंत अलर्ट जारी करते हैं।

यह परियोजना महिलाओं की सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा सुनिश्चित करने, अपराध की रोकथाम और त्वरित कार्रवाई के लिए शुरू की गई थी। लखनऊ को अन्य शहरों की तुलना में इस परियोजना में अच्छा प्रदर्शन करने वाला माना जाता रहा है, लेकिन अब तकनीकी और वित्तीय समस्याओं ने इसकी प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

संत रविदास की जयन्ती का सृजना कुटीर मे हुआ आयोजन Read More संत रविदास की जयन्ती का सृजना कुटीर मे हुआ आयोजन

भुगतान विवाद का विवरण

मतदाता सूची से वंचित न रहे कोई भी पात्र नागरिक— मण्डलायुक्त Read More मतदाता सूची से वंचित न रहे कोई भी पात्र नागरिक— मण्डलायुक्त

सूत्रों के अनुसार, समस्या लखनऊ स्मार्ट सिटी लिमिटेड (LSCL) और परियोजना की देखरेख करने वाली निजी एजेंसी (एलाइड डिजिटल सर्विसेज लिमिटेड या संबंधित वेंडर) के बीच बकाया भुगतान को लेकर उत्पन्न हुई है। बकाया राशि लगभग 8.43 करोड़ रुपये बताई जा रही है। निजी एजेंसी ने बार-बार भुगतान की मांग के बावजूद राशि न मिलने पर सेवा निलंबित कर दी। इससे कैमरों की लाइव फीडिंग और रिकॉर्डिंग पूरी तरह बंद हो गई है।

संदिग्ध हालत मे मिली युवक की लाश पुलिस कर रही है जांच Read More संदिग्ध हालत मे मिली युवक की लाश पुलिस कर रही है जांच

यह पहली बार नहीं है जब ऐसी समस्या सामने आई है। पिछले साल (2025) अगस्त, सितंबर, अक्टूबर और नवंबर में भी इसी तरह के भुगतान विवाद के कारण कैमरे कई-कई घंटों या दिनों तक ऑफलाइन रहे थे। एक बार तो 7-8 घंटे की बाधा आई, जबकि हालिया मामला पांच दिनों से अधिक समय से जारी है। इससे शहर की निगरानी प्रणाली पूरी तरह लकवाग्रस्त हो गई है।

प्रभाव और चिंताएं

महिलाओं की सुरक्षा पर असर: परियोजना मुख्य रूप से महिलाओं की सुरक्षा के लिए डिजाइन की गई थी, लेकिन अब कैमरे बंद होने से उत्पीड़न, छेड़छाड़ या अन्य अपराधों की रोकथाम मुश्किल हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि AI कैमरे केवल रिकॉर्डिंग तक सीमित नहीं, बल्कि रीयल-टाइम अलर्ट सिस्टम हैं, जिनके बिना पुलिस को घटना के बाद ही पता चलता है।

अपराध नियंत्रण में कमी: ट्रैफिक उल्लंघन, चोरी, झगड़े और अन्य घटनाओं की निगरानी प्रभावित हुई है।

जनता में असंतोष: शहरवासियों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च कर 'तीसरी आंख' लगाई गई, लेकिन भुगतान जैसे बुनियादी मुद्दे पर सब कुछ ठप हो जाना दुर्भाग्यपूर्ण है।

प्रशासन की प्रतिक्रिया

लखनऊ स्मार्ट सिटी लिमिटेड और पुलिस अधिकारियों ने अभी तक आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन सूत्र बताते हैं कि विवाद सुलझाने के लिए बातचीत जारी है। पिछले मामलों में भुगतान जारी होने पर सेवा बहाल हो गई थी। महिला एवं बाल सुरक्षा संगठन (WCSO), जो परियोजना का नोडल एजेंसी है, स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

विशेषज्ञों की राय

सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि परियोजना में तकनीक पर अधिक निर्भरता है, लेकिन मानवीय निगरानी, रखरखाव और वित्तीय प्रबंधन कमजोर है। बिजली कटौती, नेटवर्क समस्या और रोजाना ऑफलाइन होने की शिकायतें पहले भी सामने आ चुकी हैं।

यह घटना लखनऊवासियों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। प्रशासन से अपेक्षा है कि जल्द से जल्द बकाया चुकाकर कैमरों को बहाल किया जाए, ताकि शहर की सुरक्षा व्यवस्था फिर से मजबूत हो सके।

About The Author

Post Comments

Comments

संबंधित खबरें