ओबरा नगर पंचायत में पावर गेम अध्यक्ष पर नियमों की अनदेखी का आरोप, EO की जॉइनिंग और फिटनेस सर्टिफिकेट पर उठे सवाल

ईओ मधुसूदन जायसवाल के मेडिकल सर्टिफिकेट पर उठा सवाल, लोगों ने किया जाँच की मांग

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अजित सिंह / राजेश तिवारी ( ब्यूरो रिपोर्ट) 

सोनभद्र/ उत्तर प्रदेश -

 नगर पंचायत ओबरा एक बार फिर बड़े प्रशासनिक विवाद के घेरे में है। समाजवादी पार्टी से जुड़ी नगर पंचायत अध्यक्ष चांदनी देवी पर आरोप है कि उन्होंने अपने अधिकार क्षेत्र की सीमाओं को लांघकर शासन के नियमों और हाईकोर्ट के आदेशों की मनमानी व्याख्या की है। मामला अधिशासी अधिकारी (EO) के तबादले, जॉइनिंग और संदिग्ध मेडिकल फिटनेस से जुड़ा है।

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बीते 28 जनवरी 2026 को नगर पंचायत अध्यक्ष चांदनी देवी ने एक कार्यालय आदेश जारी किया।इस आदेश के तहत उन्होंने स्थानांतरित किए जा चुके EO मधुसूदन जायसवाल को पुन कार्यभार ग्रहण करने की अनुमति दे दी, जबकि प्रभारी अधिशासी अधिकारी अखिलेश सिंह को तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त कर दिया। विवाद का मुख्य बिंदु प्रशासनिक जानकारों का कहना है कि किसी भी अधिकारी की जॉइनिंग या कार्यमुक्ति का अधिकार केवल शासन या स्थानीय निकाय निदेशक के पास होता है।

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अध्यक्ष द्वारा जारी यह आदेश 'अधिकार क्षेत्र से बाहर' माना जा रहा है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रिट-A संख्या 879/2026 में स्थानांतरण आदेश पर यथास्थिति (Status Quo) बनाए रखने का निर्देश दिया था। अध्यक्ष ने इस आदेश की गलत व्याख्या की। यथास्थिति का अर्थ उस समय की प्रशासनिक स्थिति को बरकरार रखना था, न कि नए आदेश जारी कर व्यवस्था को बदलना। विवादित जॉइनिंग में सबसे चौंकाने वाला पहलू EO मधुसूदन जायसवाल द्वारा प्रस्तुत किया गया मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट है।

आरोप है कि यह सर्टिफिकेट किसी सरकारी अस्पताल या CMO/मेडिकल बोर्ड के बजाय एक निजी MBBS डॉक्टर के क्लीनिक से जारी कराया गया है। फिटनेस प्रमाणपत्र में हाइपरटेंशन (BP) और डायबिटीज जैसी बीमारियों का जिक्र तो है, लेकिन बिना किसी विस्तृत जांच रिपोर्ट या OPD नंबर के, उसी दिन व्यक्ति को पूरी तरह 'फिट' घोषित कर दिया गया। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसा प्रमाणपत्र कानूनी रूप से मान्य नहीं है।

सामाजिक कार्यकर्ता राकेश केशरी ने इस पूरे प्रकरण को लेकर प्रमुख सचिव (नगर विकास) और मंडलायुक्त (विंध्याचल मंडल) को पत्र लिखकर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उनकी प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं।28.01.2026 के कार्यालय आदेश को तत्काल निरस्त किया जाए। EO की जॉइनिंग और मेडिकल दस्तावेजों की उच्च स्तरीय विभागीय जांच हो।

नियमों के उल्लंघन के लिए नगर पंचायत अध्यक्ष की जवाबदेही तय की जाए। नगर पंचायत ओबरा में अध्यक्ष और शासन के बीच यह टकराव अब कानूनी और प्रशासनिक पेचदगियों में उलझ गया है। अब सबकी नजरें प्रमुख सचिव और मंडलायुक्त के फैसले पर टिकी हैं कि क्या ओबरा में प्रशासनिक व्यवस्था नियमों के अनुरूप बहाल हो पाएगी या यह विवाद और गहराएगा।

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